Indore में कलेक्टर की अनुमति से नहीं कटेंगे पेड़: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
Indore में हाल ही में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय आया है, जिसने शहर के पर्यावरण और हरियाली की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है, कलेक्टर को नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि कलेक्टर द्वारा नियुक्त किसी भी ट्री ऑफिसर की अनुमति से पेड़ों की कटाई अब वैध नहीं मानी जाएगी।
यह आदेश विशेष रूप से पर्यावरण प्रेमियों और नागरिक संगठनों के लिए राहत देने वाला है, क्योंकि पिछले कई वर्षों में शहर में बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे थे।
मामला और याचिका
यह आदेश डॉ. अमन शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 की धारा 4 और 6 का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इस कानून के तहत ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है, न कि कलेक्टर को।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि नगर निगम द्वारा मल्हार आश्रम और एमओजी लाइंस जैसी विकास परियोजनाओं के लिए कई पुराने और हरे-भरे पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई, लेकिन यह अनुमति उन ट्री ऑफिसरों द्वारा दी गई थी, जिनकी नियुक्ति वैध नहीं थी। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि इस प्रकार शहर में अवैध और अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है।
Indore हाईकोर्ट का निर्णय
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा कि:
- कलेक्टर को ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
- राज्य सरकार द्वारा विधिवत नियुक्त ट्री ऑफिसर के बिना किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम है और इसका पालन सभी प्रशासनिक इकाइयों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार की भूमिका और अधिसूचना का अभाव
याचिका में यह भी बताया गया कि 18 दिसंबर 2024 को राज्य सरकार को निर्देश दिए गए थे कि वह तुरंत किसी गजेटेड रैंक के वन अधिकारी को ट्री ऑफिसर नियुक्त करे। इसके बावजूद अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार की सक्रियता जरूरी है, क्योंकि बिना वैध ट्री ऑफिसर के शहर में पेड़ों की कटाई कानूनन अवैध मानी जाएगी। अगली सुनवाई इस मामले में 16 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
इंदौर में पेड़ों की कटाई का इतिहास
पिछले 3-4 सालों में इंदौर में हरियाली लगातार घटती गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए हैं:
- भंवरकुआं, लवकुश, फूटी कोठी और खजराना ब्रिज परियोजनाओं के लिए लगभग 5000 पेड़ काटे गए।
- आईटी पार्क चौराहे पर बने रहे ब्रिज के कारण 1200 से अधिक पेड़ काटे गए।
- मूसाखेड़ी ब्रिज निर्माण के लिए भी बड़े पैमाने पर ग्रीन बेल्ट को नुकसान पहुंचा।
इन घटनाओं ने स्थानीय पर्यावरण और वनों के जीव-जंतु पर गंभीर प्रभाव डाला है।
हाईकोर्ट के संरक्षण में बचाए गए पेड़ और पक्षियों के आशियाने
हाईकोर्ट ने केवल पेड़ों की कटाई पर रोक ही नहीं लगाई, बल्कि शहर में रहने वाले पक्षियों, विशेषकर तोतों के आशियानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की।
- रानी सराय क्षेत्र में 200 से ज्यादा पेड़ों पर बसे हजारों तोतों के आशियानों को बचाया गया।
- बड़वाह में मोद्री जैसे घने वन क्षेत्रों में माइनिंग और विकास परियोजनाओं के लिए जंगल साफ करने पर अंतरिम स्टे लगाया गया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि हाईकोर्ट पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति गंभीर है।
आदेश का महत्व
इस आदेश का महत्व कई स्तरों पर देखा जा सकता है:
- कानूनी पहलू: राज्य सरकार के अधिकार और कलेक्टर के अधिकार की सीमा स्पष्ट हुई।
- पर्यावरण संरक्षण: शहर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगी।
- सामाजिक जागरूकता: नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह आदेश एक संदेश है कि वे अपने शहर के हरियाली की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
- भविष्य की योजनाएं: विकास परियोजनाओं में पेड़ों और जैव विविधता के संरक्षण को अब अनिवार्य माना जाएगा।
विशेषज्ञों और नागरिकों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस कदम से शहर की हरियाली को बचाने में मदद मिलेगी और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में योगदान मिलेगा।
वृक्ष प्रेमियों का मानना है कि यह आदेश शहर में वातावरणीय संतुलन और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।
आगे की सुनवाई
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 निर्धारित की है। इस दिन इसी मुद्दे से जुड़े अन्य मामलों पर भी सुनवाई होगी। कोर्ट की निगरानी में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिर्फ राज्य सरकार द्वारा नियुक्त ट्री ऑफिसर की अनुमति के बिना किसी भी पेड़ की कटाई न हो।
निष्कर्ष
Indore में हाईकोर्ट का यह आदेश पर्यावरण संरक्षण, कानूनी स्पष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। यह साबित करता है कि शहर की हरियाली और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि पेड़ों की कटाई केवल विधिवत नियुक्त ट्री ऑफिसर की अनुमति से ही हो। यह आदेश आने वाले समय में इंदौर के हरे-भरे भविष्य के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा।

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