Khalsa बाग गुरुद्वारा में टी. चोइथराम संत बाबा घोला जी के सानिध्य में भव्य कीर्तन और लंगर समागम
Khalsa बाग गुरुद्वारा में टी. चोइथराम संत बाबा घोला जी के सानिध्य में भव्य धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सिख समुदाय के साथ ही अन्य समाजों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। हजारों श्रद्धालुओं ने कीर्तन का आनंद लिया और महाप्रसादी लंगर का स्वाद चखा।
बाबा घोला जी के सानिध्य में कीर्तन का अद्भुत वातावरण
Khalsa कार्यक्रम की शुरुआत बाबा घोला जी के सानिध्य में कीर्तन गायन से हुई। कीर्तन में भाग लेने वाले श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के साथ गुरुबाणी और भजनों का आनंद लेते नजर आए। गुरुद्वारा परिसर में हर ओर भक्तिमय वातावरण रहा। उपस्थित लोगों का कहना था कि कीर्तन का अनुभव इतना आध्यात्मिक था कि सभी भक्त मनोभाव से पूरी तरह मग्न हो गए।
महाप्रसादी लंगर ने बढ़ाई उत्सव की गरिमा
कीर्तन के पश्चात गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से महाप्रसादी लंगर का आयोजन किया गया। लंगर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन परोसा गया। इस अवसर पर सभी धर्म और समाज के लोग एक साथ भोजन कर रहे थे, जिससे भाईचारे और समानता का संदेश मिला। लंगर का आयोजन न केवल भोजन के लिए, बल्कि सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।
प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति
इस शुभ अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने कार्यक्रम में भाग लेकर इसे और भी विशेष बनाया। पूर्व विधायक विशाल पटेल, आईडिया उपाध्यक्ष बंटू अरोरा, पूर्व राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग संरक्षक समाजसेवी राजेश अग्रवाल, त्रिलोचन सिग, पूर्व अल्पसंख्यक आयोग सदस्य कैप्टन वासु, कैप्टन अरोरा, गुरुवेंद्र सिंह अरोरा सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। उन्होंने कीर्तन में भाग लेकर और लंगर का आनंद लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
समाज में भाईचारे और एकता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। लंगर और कीर्तन के माध्यम से सिख समाज और अन्य समुदायों के लोग एक साथ आए। यह आयोजन समाज में भाईचारे, एकता और सौहार्द की भावना को बढ़ाने का उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ।
प्रमुख वक्ताओं के संदेश
पूर्व विधायक विशाल पटेल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में भाईचारा बढ़ता है और धार्मिक आस्था को बनाए रखने में मदद मिलती है। समाजसेवी राजेश अग्रवाल ने सभी से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समाज में समरसता बनाए रखें।
हर्ष और उल्लास के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन हर्ष और उल्लास के साथ हुआ। गुरुद्वारा परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालु इस भव्य आयोजन की प्रशंसा करते हुए गए। कीर्तन और लंगर ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक भाईचारा साथ मिलकर समाज को मजबूत बनाते हैं।
इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज में भाईचारा, एकता और सद्भावना का संदेश भी फैलाते हैं। Khalsa बाग गुरुद्वारा में आयोजित यह कार्यक्रम सिख समाज और अन्य समाजों के लिए प्रेरणास्रोत साबित हुआ।
