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MP News: Badwani में मछुआरों ने किया नर्मदा बचाओ आंदोलन, नाव रैली निकालकार सरकार के सामने रखी 10 मांगे

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Published On: 2 February 2026
MP News: Fishermen in Badwani Launch Narmada Bachao Andolan, Demand Rights and Rehabilitation
— MP News: Fishermen in Badwani Launch Narmada Bachao Andolan, Demand Rights and Rehabilitation

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Badwani में मछुआरों का नर्मदा बचाओ आंदोलन

MP  के Badwani जिले में मछुआरों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह आंदोलन विशेष रूप से सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने अधिकारों की मांग के लिए सोमवार को एक विशाल नाव रैली निकाली। इस रैली का नेतृत्व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने किया। रैली में 30 से अधिक नावों पर सवार सैकड़ों लोग शामिल हुए और कसरावद से राजघाट तक नर्मदा नदी में रैली निकाली। यह रैली मछुआरों द्वारा अपने अधिकारों के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास था।

मछुआरा संगठन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नाव रैली के समापन के बाद मछुआरा संगठनों की ओर से Badwani कलेक्टर को 10 सूत्रीय मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इन मांगों में प्रमुख रूप से सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के निर्णय के अनुसार उनके अधिकार दिए जाने, प्रस्तावित नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ के पंजीकरण, पुनर्वास से जुड़े लाभ, आवास और आजीविका की व्यवस्था की जाने, मत्स्य व्यवसाय को सहकारी समितियों को सौंपने, और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग की गई है।

जलाशय में प्रदूषण और अवैध रेत खनन से मछुआरों की चिंता

आंदोलन के दौरान मछुआरों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन और जलस्तर में गिरावट को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इन कारणों से मछली पालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। मछुआरों ने अपनी मांगों में यह भी कहा कि उन्हें किसान का दर्जा दिया जाए, केसीसी कार्ड उपलब्ध कराया जाए, और मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए। इसके साथ ही मछुआरों ने पुलिस और प्रशासन द्वारा उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई करने की भी मांग की।

आंदोलन में मेधा पाटकर ने दी चेतावनी

मंच पर मौजूद वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े शिकार हैं, और उन्हें अब तक उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। इस जल भरो आंदोलन और नाव रैली में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों से बड़ी संख्या में मछुआरा परिवारों ने भाग लिया।

नर्मदा ट्रिब्यूनल का हवाला

आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला दिया, जो सरदार सरोवर अंतरराज्यीय परियोजना से जुड़े लाभ, हानि और पुनर्वास के मुद्दों पर लंबी प्रक्रिया के बाद पारित हुआ था। इस फैसले के अनुसार, 18 अक्टूबर 2000 को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि नर्मदा ट्रिब्यूनल के निर्णय का पालन शासन की जिम्मेदारी है। ट्रिब्यूनल की धारा XI की उपधारा V(8) के तहत सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन के अधीन बताया गया है। इसी संदर्भ में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने कुछ वर्ष पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र भी भेजा था।

आंदोलन की रणनीति

यह आंदोलन नर्मदा बचाओ अभियान के हिस्से के रूप में चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य नर्मदा नदी से जुड़े मछुआरों को उनके अधिकार दिलाना है। मेधा पाटकर और उनके सहयोगी समाजसेवियों ने इस आंदोलन को और तेज करने की योजना बनाई है, ताकि मछुआरों के मुद्दों को सही तरीके से समाधान मिल सके। मछुआरों ने यह भी कहा है कि वे अपने अधिकारों के लिए हर प्रकार का संघर्ष करने को तैयार हैं और अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे विरोध को और अधिक तेज करेंगे।

सरकार से अपेक्षाएं

मछुआरों का कहना है कि अगर उनकी मांगों को सरकार द्वारा शीघ्रता से स्वीकार नहीं किया गया, तो वे आगामी समय में अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका यह आंदोलन न केवल मछुआरों के अधिकारों की बात कर रहा है, बल्कि यह नर्मदा नदी के संरक्षण और पर्यावरणीय संकट के बारे में भी सवाल उठा रहा है। मछुआरों का कहना है कि अगर सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो उनका आंदोलन एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

आखिरकार, यह आंदोलन न केवल नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए है, बल्कि यह मछुआरों के जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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