MP: बांधवगढ़, कान्हा और पेंच में बाघों की संख्या में वृद्धि,
MP में बाघ संरक्षण की सफलता नई ऊँचाईयों को छू रही है। प्रदेश के प्रमुख Tiger रिजर्व बांधवगढ़, कान्हा और पेंच में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो राज्य और देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि है। वन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इन रिजर्वों में बाघों की संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयास सफल हो रहे हैं।
हालांकि, इसी के साथ नए चुनौतियां और जोखिम भी सामने आए हैं। बाघ स्वभाव से अत्यंत क्षेत्रीय प्राणी होते हैं और अपने क्षेत्र में किसी अन्य बाघ को स्वीकार नहीं करते। जैसे-जैसे संख्या बढ़ती है, बाघों के बीच वर्चस्व और क्षेत्रीय संघर्ष भी तेज हो रहा है। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 30 दिनों में प्रदेश में कुल 8 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से अकेले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 4 बाघों की मौत दर्ज की गई है।
Tiger रिजर्व की वहन क्षमता (Carrying Capacity) पर दबाव
वन अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कई टाइगर रिजर्व अब अपनी प्राकृतिक वहन क्षमता या कैरिंग कैपेसिटी के करीब या उससे अधिक पहुँच चुके हैं। सीमित जंगल क्षेत्र और बाघों की स्वाभाविक क्षेत्रीय प्रवृत्ति के कारण कमजोर या युवा बाघ अब कोर एरिया छोड़कर बफर जोन और रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे न केवल बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं, बल्कि मानव-वन्यजीव टकराव के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
बाघों के बीच संघर्ष के हालात
हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे शहडोल वन मंडल में दो बाघों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ, जिसमें एक 8 वर्षीय बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया। वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर जाकर बाघ को रेस्क्यू किया और उसका इलाज शुरू कराया। इसी प्रकार, बांधवगढ़ से निकलकर बाघ का रिहायशी क्षेत्रों में प्रवेश भी देखा गया, जो बढ़ती संख्या और नए ठिकानों की तलाश का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद नए आवास न बनाए जाने की स्थिति में संघर्ष और मौतों की संख्या और बढ़ सकती है। वर्ष 2022 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 165 बाघ दर्ज किए गए थे और मौजूदा अनुमान के अनुसार यह संख्या अब 200 के पार पहुंच सकती है।
वन विभाग की तैयारियाँ और नए आवास
बढ़ते दबाव को देखते हुए, मध्य प्रदेश वन विभाग अब नए बाघ आवास विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत नए कंजर्वेशन रिजर्व, अभयारण्य और संभावित नए टाइगर रिजर्व चिन्हित किए जा रहे हैं। इन नए क्षेत्रों में भी बाघों की गणना की जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में बाघों की संख्या और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की संख्या में वृद्धि जहां वन्यजीव संरक्षण की सफलता का संकेत है, वहीं इसके साथ प्रबंधन, निगरानी और संतुलन की नई चुनौती भी उत्पन्न हुई है। वन्यजीव और मानव के बीच संघर्ष को कम करने के लिए बफर जोन का विस्तार, रिहायशी क्षेत्रों में जागरूकता और बाघों के लिए नए ठिकानों का विकास जरूरी है।
MP में बाघों की ऐतिहासिक वृद्धि
भारत सरकार की वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार, देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए, जिनमें से अकेले मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सबसे अधिक है और मध्य प्रदेश को बाघ संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में 24 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि मध्य प्रदेश में यह वृद्धि लगभग 49 प्रतिशत रही। यह वृद्धि जहां वन्यजीव संरक्षण की सफलता को दर्शाती है, वहीं बाघों के लिए नए आवास और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता भी बढ़ा रही है।
सांख्यिकी और मौतों का आंकलन
- बीते 30 दिनों में प्रदेश में कुल 8 बाघों की मौत।
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: 4 बाघ मृत।
- पेंच टाइगर रिजर्व: 1 बाघ मृत।
- अन्य क्षेत्रों में भी बाघों की मौत की घटनाएं दर्ज।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए बाघ आवास और कंजर्वेशन रिजर्व विकसित न किए जाने पर बाघों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनकी मृत्यु दर और संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
MP ने Tiger संरक्षण में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। बांधवगढ़, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या इस सफलता की पुष्टि करती है। वहीं, वन विभाग और राज्य सरकार के सामने अब मानव-बाघ संघर्ष, बाघों के बीच संघर्ष और नए आवास विकसित करने की चुनौती भी है।
प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ना गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही यह आवश्यक है कि वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवास और मानव निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समुचित रणनीति अपनाई जाए। नए बाघ आवास, अभयारण्य और कंजर्वेशन रिजर्व विकसित करना और टाइगर रिजर्व की कैरिंग कैपेसिटी बनाए रखना अब प्रमुख आवश्यकता बन गई है।
इस तरह, मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी रहते हुए, बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने और संघर्षों को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
