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Indore नगर निगम में रिश्वतखोरी का खुलासा, एमआईसी सदस्य मनीष मामा ने कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा

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Published On: 2 February 2026
Corruption Uncovered Inside Indore Municipal Corporation Office
— Corruption Uncovered Inside Indore Municipal Corporation Office

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Indore नगर निगम में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, 

Indore नगर निगम (IMC) में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम मुख्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को हितग्राही से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इस कार्रवाई को अंजाम दिया इंदौर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के सदस्य मनीष शर्मा ने, जिन्हें शहर में ‘मनीष मामा’ के नाम से जाना जाता है।

यह घटना न सिर्फ नगर निगम में फैले कथित भ्रष्टाचार की पुष्टि करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रशासन के भीतर ही कुछ लोग व्यवस्था को सुधारने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

केवाईसी और आईडी रिकवरी के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम मुख्यालय में पदस्थ महिला कर्मचारी पिंकी पर यह आरोप है कि उसने एक हितग्राही से उसके वैध प्रशासनिक कार्य के बदले रिश्वत की मांग की। हितग्राही आकांक्षा पाल अपने आवश्यक दस्तावेजों की केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराने और नगर निगम से संबंधित आईडी रिकवर करवाने के लिए निगम कार्यालय पहुँची थीं।

आरोप है कि कर्मचारी पिंकी ने इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के बदले आकांक्षा पाल से 400 रुपये की मांग की। यह राशि किसी सरकारी शुल्क का हिस्सा नहीं थी, बल्कि पूरी तरह अवैध रूप से मांगी गई थी। हितग्राही द्वारा पैसे देने से पहले ही इस पूरे मामले की जानकारी एमआईसी सदस्य मनीष मामा तक पहुँचा दी गई।

एमआईसी सदस्य की तत्परता, मौके पर पहुँचे मनीष मामा

जैसे ही एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा को इस शिकायत की सूचना मिली, उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नगर निगम मुख्यालय पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। बिना किसी देरी के उन्होंने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर घटनाक्रम को देखा और जैसे ही कर्मचारी ने हितग्राही से पैसे लिए, उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कर्मचारी को पैसे लेते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। एमआईसी सदस्य की इस अचानक कार्रवाई से नगर निगम कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई।

वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई सूचना, कार्रवाई के निर्देश

रिश्वत लेते पकड़े जाने के तुरंत बाद मनीष मामा ने पूरे मामले की जानकारी नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच के आधार पर कर्मचारी को निलंबित किए जाने और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू किए जाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी को कड़ी सजा दी जाएगी।

Indore निगम मुख्यालय में भ्रष्टाचार की पुष्टि

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यह नगर निगम के मुख्यालय के भीतर हुई, जहाँ से पूरे शहर के प्रशासनिक कार्यों का संचालन होता है। आमतौर पर छोटे-छोटे कामों जैसे आईडी रिकवरी, केवाईसी अपडेट, दस्तावेज़ सत्यापन आदि के लिए आम नागरिकों को परेशान किया जाता है और कई बार उनसे अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं।

इस मामले ने उन शिकायतों को सच साबित किया है, जो लंबे समय से निगम कर्मचारियों पर लगती आ रही थीं। हालांकि, अब तक अधिकतर मामलों में पीड़ित सामने नहीं आते थे, लेकिन इस बार एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की सक्रियता से मामला उजागर हो सका।

प्रशासनिक शुचिता पर उठे सवाल

इंदौर नगर निगम देशभर में अपनी स्वच्छता व्यवस्था और प्रशासनिक नवाचारों के लिए जाना जाता है। लगातार कई वर्षों तक स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल रहने वाले इंदौर की छवि एक आदर्श नगर निगम के रूप में बनी हुई है। ऐसे में मुख्यालय के भीतर इस तरह की रिश्वतखोरी की घटना ने प्रशासनिक शुचिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटी-छोटी रकम के लिए भी कर्मचारी खुलेआम रिश्वत मांग रहे हैं, तो यह एक गंभीर प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करता है।

मनीष मामा की कार्रवाई की सराहना

एमआईसी सदस्य मनीष मामा की इस कार्रवाई की आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि इसी तरह मौके पर जाकर कार्रवाई करें, तो निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

मनीष मामा पहले भी अपने सख्त और सक्रिय रवैये के लिए जाने जाते रहे हैं। इस घटना के बाद उन्होंने साफ संदेश दिया है कि नगर निगम में भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भविष्य में कड़े कदम उठाने की तैयारी

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही निगम कार्यालयों में निगरानी बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरों की समीक्षा और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर भी विचार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी कर्मचारी द्वारा अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती है, तो उसकी तुरंत शिकायत करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

निष्कर्ष

Indore नगर निगम में सामने आया यह रिश्वतखोरी का मामला एक चेतावनी है कि स्वच्छ और आधुनिक प्रशासन की छवि के पीछे भी कुछ सड़ांध छिपी हो सकती है। हालांकि, एमआईसी सदस्य मनीष मामा की त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने यह भी साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद आरोपी कर्मचारी के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है और क्या इस घटना से सबक लेकर नगर निगम भविष्य में भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण कर पाता है या नहीं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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