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Nagda बेबीशाला प्री-स्कूल में ‘उत्सव 2026’ की धूम, नन्हे मुन्नों ने रंगों और संस्कारों से सजी मंच प्रस्तुति

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Published On: 2 February 2026
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— बेबीशाला प्री-स्कूल में उत्सव 2026: नन्हे मुन्नों ने रंग और संस्कार से सजी प्रस्तुति

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Nagda बेबीशाला प्री-स्कूल में ‘उत्सव 2026’ की धूम, नन्हे मुन्नों ने रंगों और संस्कारों से सजी मंच प्रस्तुति

Nagda  जं. (निप्र) – बेबीशाला प्री-स्कूल में वार्षिक उत्सव ‘उत्सव 2026’ अपने परंपरागत उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस वर्ष की थीम “संस्कृति के रंग, नन्हे मुन्नों के संग” रखी गई थी, जिसका उद्देश्य बच्चों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और उसके मूल्यों को उजागर करना था। स्कूल के हॉल को रंग-बिरंगी सजावट, फूलों और पारंपरिक झंडियों से सजाया गया था, जिससे माहौल अत्यंत उत्साहपूर्ण और उत्सव-सुलभ बन गया।

इस वर्ष के उत्सव में बच्चों ने अपने मासूम और रंगीन अंदाज के साथ मंच पर नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियां दी। बच्चों की प्रस्तुति में न केवल भारतीय संस्कृति के रंग और परंपराओं का सुंदर चित्रण किया गया, बल्कि आधुनिक समाज में आवश्यक संस्कारों की भी झलक दिखाई गई। बच्चों ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित दर्शकों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा भी प्राप्त की।

बच्चों की प्रस्तुतियों में शिक्षा और संस्कार का संगम

इस वर्ष के उत्सव की एक विशेष बात यह रही कि बच्चों ने मंच पर आधुनिक समाज के मुद्दों को भी दर्शाया। उन्होंने मोबाइल का अधिक उपयोग न करने और तकनीक के सही उपयोग पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। यह संदेश नन्हे बच्चों के माध्यम से न केवल उपस्थित अभिभावकों तक गया, बल्कि समाज में डिजिटल व्यवहार की आवश्यकता को भी उजागर किया। बच्चों के मासूम अंदाज और नृत्य के साथ संदेश देने की यह अनोखी शैली दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी।

रामायण के प्रसंगों पर आधारित नाट्य और नृत्य प्रस्तुति में बच्चों ने भूमिका निभाते हुए विभिन्न पात्रों की भाव-भंगिमा और संवादों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। नन्हे कलाकारों की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और बच्चों की सांस्कृतिक समझ और आत्मविश्वास का परिचय दिया।

Nagda
       Nagda में ‘उत्सव 2026’: बच्चों ने संस्कृति और लोक कला के रंग बिखेरे

मुख्य अतिथियों ने बढ़ाई महत्ता

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इनरव्हील क्लब की प्रेसिडेंट अंजू जी कांठेड़, सोनम जी कांठेड़, और डॉ. नितिशा जी वागरेचा उपस्थित रहीं। अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक समझ का विकास होता है।

मुख्य अतिथियों ने नन्हे कलाकारों की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति को देखकर बच्चों के माता-पिता और शिक्षकों की मेहनत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा का महत्व बहुत अधिक है और इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को समाज और संस्कृति से जोड़ने में सहायक होते हैं।

रंग-बिरंगी पोशाकों में बच्चों का आकर्षक प्रदर्शन

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान नन्हे कलाकार रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे नजर आए। बच्चों ने लोक नृत्य, गीत और नाट्य के माध्यम से मंच पर अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। उनके मासूम चेहरे और आत्मविश्वास ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। हर प्रस्तुति में बच्चों ने अपनी भूमिका के अनुरूप भाव-भंगिमा और तालमेल दिखाया, जिससे कार्यक्रम और भी जीवंत और मनोरंजक बन गया।

लोकगीतों और नृत्यों के माध्यम से बच्चों ने ग्रामीण जीवन, त्योहारों और भारतीय परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया। उपस्थित दर्शक, जिनमें अभिभावक और स्कूल स्टाफ शामिल थे, बच्चों की प्रस्तुति को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और बार-बार ताली बजाकर बच्चों को प्रोत्साहित किया।

आयोजन का संचालन और मंच प्रस्तुति

कार्यक्रम का संचालन हर्ष गुप्ता और सोनल जैन ने किया। उन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित किया और कार्यक्रम की समयबद्धता सुनिश्चित की। बच्चों के प्रदर्शन और प्रस्तुतियों के क्रम को उन्होंने बखूबी पेश किया, जिससे दर्शकों को कार्यक्रम का आनंद पूरी तरह से मिला। संचालन की सहजता और शैली ने पूरे उत्सव की शोभा बढ़ा दी।

डायरेक्टर ने व्यक्त किया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्कूल की डायरेक्टर स्नेहा जैन ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और स्टाफ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, टीम भावना और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बेबीशाला प्री-स्कूल में शिक्षा केवल पुस्तकीय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के माध्यम से भी दी जाती है।

डायरेक्टर स्नेहा जैन ने कहा, “बच्चों की छोटी-छोटी प्रस्तुतियां उनकी रचनात्मकता, मेहनत और संस्कृति के प्रति प्रेम का परिचायक हैं। हमें गर्व है कि हमारे बच्चे न केवल अच्छे छात्र हैं, बल्कि अच्छे संस्कारी नागरिक बनने की दिशा में भी अग्रसर हैं। यह उत्सव बच्चों के लिए यादगार अनुभव साबित होगा।”

उत्सव की विशेषताएँ

इस वर्ष के उत्सव की विशेषता थी कि इसमें नन्हे बच्चों ने न केवल भारतीय संस्कृति को दर्शाया, बल्कि आधुनिक समाज के महत्वपूर्ण संदेशों को भी प्रस्तुत किया। बच्चों की प्रस्तुति में नाट्य, नृत्य, गीत और संवाद का सही संयोजन देखने को मिला। उन्होंने मंच पर अभिनय करते हुए भावनाओं और संदेशों का स्पष्ट प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, स्कूल ने सुरक्षा और व्यवस्था पर भी पूरा ध्यान रखा। बच्चों की प्रस्तुति के दौरान सभी दर्शकों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा गया, ताकि उत्सव का आनंद सभी को बिना किसी व्यवधान के मिल सके।

आयोजन का सामाजिक और शैक्षणिक महत्व

बेबीशाला प्री-स्कूल का यह वार्षिक उत्सव केवल बच्चों के मनोरंजन का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन्हें भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और नैतिक मूल्यों से परिचित कराने का माध्यम भी है। इस तरह के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, सांस्कृतिक समझ और टीम भावना का विकास करते हैं।

अभिभावकों ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। उन्होंने शिक्षक और स्कूल प्रशासन को धन्यवाद दिया कि उन्होंने बच्चों के प्रतिभा और शिक्षा को मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।

दिनांक: 31/01/2026

स्थान: बेबीशाला प्री-स्कूल, Nagda जं.

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