Budget 2026: Gold और Silver सस्ते होने की उम्मीद,
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026। केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश होने से पहले Gold और Silver के बाजार में जबर्दस्त हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों और निवेशकों का अनुमान है कि सरकार कस्टम ड्यूटी में कटौती कर सकती है, जिससे धातुओं की कीमतों में नरमी आ सकती है।
इस कदम को निवेशकों और ज्वेलरी इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। पिछले वर्षों में लगातार बढ़ती कीमतों और टैक्स स्ट्रक्चर के कारण उपभोक्ताओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ गया था।
सोना और चांदी की संभावित सस्ती कीमत
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सरकार Gold और Silver पर कस्टम ड्यूटी 6 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर देती है, तो:
- सोना लगभग 3000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो सकता है
- चांदी लगभग 6000 रुपए प्रति किलो तक सस्ती हो सकती है
यह कटौती न केवल उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाएगी, बल्कि ज्वेलरी इंडस्ट्री और निवेशकों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगी।
जनवरी 2026 में मौजूदा दाम
जनवरी 2026 में धातुओं के दाम इस प्रकार हैं:
- 24 कैरेट सोना: लगभग 1,50,000 रुपए प्रति 10 ग्राम
- चांदी: लगभग 3,50,000 रुपए प्रति किलो
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर आम खरीदारों के लिए ऊंचा माना जा रहा है, और कस्टम ड्यूटी कटौती के बाद दामों में सूक्ष्म लेकिन महत्त्वपूर्ण कमी आ सकती है।
Read Also : Union Budget 2026 : विकास और वित्तीय अनुशासन का संतुलन तय करेगा दिशा
बीते वर्षों में धातुओं की कीमतें
आंकड़ों के मुताबिक:
- 2025 में सोने की कीमतों में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई
- चांदी की कीमतों में 167 प्रतिशत की तेजी देखी गई
इस तेजी ने निवेशकों के लिए अवसर पैदा किया, लेकिन उपभोक्ता मांग पर दबाव भी बढ़ा। ज्वेलरी इंडस्ट्री और रिटेल मार्केट में कीमतों का यह उतार-चढ़ाव लगातार देखा गया।
कस्टम ड्यूटी कटौती का उद्देश्य
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी मिलाकर कुल टैक्स लगभग 9 प्रतिशत बनता है। इससे कई तस्कर ग्रे मार्केट में भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
- ड्यूटी घटाने से यह अंतर कम होगा
- कस्टम ड्यूटी कटौती से नैतिक और औपचारिक बाजार में धातुओं का प्रवाह बढ़ेगा
- ज्वेलरी और निवेश के लिए कीमतें स्थिर और किफायती रहेंगी
2024 की ड्यूटी कटौती का अनुभव
पिछले बजट में जुलाई 2024 में इंपोर्ट ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत की गई थी। इसके बाद:
- ज्वेलरी की मांग में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई
- हालांकि यह राहत कई महीनों तक स्थायी नहीं रही
- इस अनुभव से उम्मीद है कि 2026 में भी ड्यूटी कटौती से खरीदारी में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है
चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग
चांदी का उपयोग अब केवल ज्वेलरी और निवेश में ही नहीं, बल्कि ईवी बैटरी, सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर उद्योग में तेजी से बढ़ रहा है।
- ड्यूटी कटौती से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी
- ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन और सस्टेनेबल इंडस्ट्रीज़ को भी लाभ होगा
- उत्पादन लागत घटने से उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त आएगी
निवेशकों के लिए रणनीति
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट के आसपास सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
- अचानक बड़ी खरीदारी करने के बजाय किस्तों में निवेश करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है
- बाजार में हल्की गिरावट का लाभ उठाना निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति है
- लंबे समय के निवेश के लिए सोना और चांदी सुरक्षित और स्थिर विकल्प बने रहेंगे
ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए राहत
कस्टम ड्यूटी कटौती से ज्वेलरी सेक्टर में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
- उत्पादन लागत में कमी
- ग्राहक के लिए कीमतों में नरमी
- मांग में वृद्धि
- ग्रे मार्केट पर नियंत्रण
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी कदमों से ज्वेलरी व्यवसाय में नया उत्साह और निवेश बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
Union Budget 2026 से पहले कस्टम ड्यूटी कटौती की संभावनाओं ने सोना और चांदी के बाजार को प्रभावित कर दिया है।
- निवेशकों और ज्वेलरी इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण राहत की उम्मीद
- औद्योगिक उपयोग, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग के लिए सकारात्मक संकेत
- बजट के बाद कीमतों में 3000 रुपए प्रति 10 ग्राम सोना और 6000 रुपए प्रति किलो चांदी तक गिरावट संभव
इस बजट के परिणाम सीधे तौर पर उपभोक्ता, उद्योग और निवेशक सभी के हित में हो सकते हैं।
