—Advertisement—

Bhopal कोर्ट ने Vyapam Scam में डॉक्टर को सजा सुनाई, फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र का खुलासा

Author Picture
Published On: 31 January 2026
Vyapam Scam: Doctor from Bhind Sentenced to 3 Years in Jail for Fake Domicile Certificate by Bhopal Court
— Vyapam Scam: Doctor from Bhind Sentenced to 3 Years in Jail for Fake Domicile Certificate by Bhopal Court

—Advertisement—

Vyapam Scam: फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र से डॉक्टर बने भिंड के चिकित्सा अधिकारी को 3 साल की जेल

Bhopal । मध्य प्रदेश में Vyapam Scam की कड़ी में एक और बड़ा फैसला आया है। भोपाल की अदालत ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बनने वाले भिंड के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार दिया और उन्हें तीन साल की जेल की सजा और दो हजार रुपए का अर्थदंड सुनाया। यह मामला व्यापमं घोटाले से जुड़े कई अन्य फर्जीवाड़ों का हिस्सा माना जा रहा है।

कोर्ट का फैसला

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने आरोपित डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के फर्जी दस्तावेज पेश कर सरकारी लाभ लेना कानून के अनुसार गंभीर अपराध है। अदालत ने बताया कि यह सजा न केवल आरोपी को दंडित करने के लिए है, बल्कि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोकने का एक उदाहरण भी है।

मामला: फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र

जांच में सामने आया कि डॉ. सीताराम शर्मा ने वर्ष 2009 में पीएमटी (PMT) परीक्षा पास करने के बाद प्रदेश के राज्य कोटे का अवैध लाभ लेने के लिए मुरैना जिले की अंबाह तहसील का फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इस प्रमाण पत्र के जरिए उन्होंने एमबीबीएस में प्रवेश लिया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। उनकी हाईस्कूल (1984) और इंटरमीडिएट (2001) की शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूरी की गई थी।

जांच में फर्जी दस्तावेजों का खुलासा

अंबाह तहसील के रिकॉर्ड की जाँच में पाया गया कि वहाँ डॉ. सीताराम शर्मा के नाम पर कभी कोई मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया गया था। इससे स्पष्ट हुआ कि उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया दस्तावेज पूरी तरह से कूटरचित और फर्जी था।

व्यापमं घोटाले की जाँच के दौरान यह पाया गया कि कई उम्मीदवार फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर मेडिकल और अन्य सरकारी कोर्सेज में प्रवेश पा रहे थे। यह मामला इसी श्रृंखला का हिस्सा था।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की शिकायत

Vyapam Scam का पर्दाफाश पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत में उन्होंने उल्लेख किया था कि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के कई उम्मीदवार फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मध्य प्रदेश की मेडिकल सीटों पर प्रवेश पा रहे हैं।

उनकी शिकायत के आधार पर तत्कालीन जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी डॉ. सीताराम शर्मा तक पहुँची।

भिंड के सरकारी अस्पताल में पद

वर्तमान में डॉ. सीताराम शर्मा जिला भिंड के सरकारी अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए।

कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल गंभीर अपराध है और इससे न केवल सरकार की छवि प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी डगमगा जाता है।

व्यापमं घोटाला और सरकारी जांच

व्यापमं (Vyapam) घोटाला मध्य प्रदेश में शिक्षा और भर्ती प्रणाली में हुए बड़े भ्रष्टाचार का प्रतीक माना जाता है। इस घोटाले में कई उम्मीदवार फर्जी परीक्षा और दस्तावेजों के माध्यम से मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य सरकारी पदों में भर्ती पाए।

घोटाले के खुलासे के बाद राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने सख्त कदम उठाए। कोर्ट और विशेष जांच दलों ने कई लोगों को दोषी ठहराया और जेल की सजा सुनाई। डॉ. सीताराम शर्मा का केस इसी श्रृंखला का नवीनतम उदाहरण है।

न्यायिक सजा का संदेश

कोर्ट ने इस मामले में साफ संदेश दिया है कि फर्जी दस्तावेज पेश करने वाले किसी भी सरकारी अधिकारी या उम्मीदवार को बख्शा नहीं जाएगा। यह सजा भविष्य में आने वाले उम्मीदवारों और सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिए एक चेतावनी है।

अदालत ने यह भी कहा कि फर्जीवाड़ा सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता और लोगों के भरोसे के लिए भी खतरा है।

निष्कर्ष

भोपाल कोर्ट का यह फैसला Vyapam Scam में न्याय दिलाने और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. सीताराम शर्मा की सजा यह दिखाती है कि किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा न केवल कानूनी कार्रवाई का कारण बनता है, बल्कि यह सार्वजनिक हित और सरकारी सेवाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।

इस तरह के फैसले भविष्य में छात्रों और सरकारी अधिकारियों को ईमानदारी और नैतिकता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp