Karitoran में जैन धर्म का ऐतिहासिक आयोजन: 7 से 13 मार्च तक बुंदेलखंड में जैन धर्म का भव्य महापर्व आयोजित होगा
उत्तर प्रदेश के जिला ललितपुर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र Karitoran में आगामी 7 से 13 मार्च 2026 तक जैन धर्म का भव्य पंचकल्याणक महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस अवसर पर श्री 108 विराग सागर जी महामुनि राज के परम पूज्य आशीर्वाद और श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन निर्देशन में मुनि श्री 108 समत्व सागर जी और मुनि श्री 108 शील सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में श्री मज्जिनेन्द्र सहसकूट 11 फुट उत्तुंग खड्गासन चौबीसी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन होगा। इस महोत्सव में प्रमुख आकर्षण 11 फुट की भव्य खड्गासन प्रतिमा, 700 से अधिक प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमाएं और अद्वितीय शिखर निर्माण होगा। बुंदेलखंड के इस प्राचीन और ऐतिहासिक जैन तीर्थ स्थल कारीटोरन में यह पांचवां पंचकल्याणक आयोजन होने जा रहा है, जिसे देश-भर में जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री की उपस्थिति
गत दिवस शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र Karitoran का प्रतिनिधि मंडल, जिसमें जिनेन्द कुमार, रानू सेठ, अनुभव कपासिया (मड़ावरा), दीपक कुमार (मड़ावरा) और मनोज दुबे (कारीटोरन) शामिल थे, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी से मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने आगामी महोत्सव में उन्हें पधारने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए महोत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएं और बधाई प्रदान की। इस स्वीकृति से महोत्सव समिति में उत्साह का माहौल उत्पन्न हुआ है।

महोत्सव की तैयारियों का व्यापक स्वरूप
प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेश कुमार जी (डीमापुर) के कुशल मार्गदर्शन में महोत्सव की तैयारियां वृहद स्तर पर की जा रही हैं। आयोजन की व्यापकता और भव्यता को ध्यान में रखते हुए देश के कई प्रांतों—असम, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली, झारखंड आदि—से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अतिथि पधारने की स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं। Karitoran महोत्सव समिति ने अतिथियों के आवास हेतु अस्थाई कोटेज और डोम तैयार करवाए हैं, जबकि समीपवर्ती क्षेत्रों जैसे नवागढ़ जी, सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव, श्रमणोदय दरगुवा, पपौरा जी, आहार जी, गिरार जी आदि में धर्मशालाएं बुक कर ली गई हैं। सुरक्षा, यातायात, आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की योजना भी विस्तृत स्तर पर बनाई जा रही है।
पंचकल्याणक महोत्सव का धार्मिक महत्व
Karitoran में पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें 11 फुट खड्गासन प्रतिमा और अन्य सहसकूट प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि जैन संस्कृति और आस्था को संरक्षित करने के लिए भी अहम माना जाता है। प्रतिष्ठा के दौरान होने वाले अनुष्ठानों में प्रमुख पात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह पात्र अपने अनुभव और भक्ति के माध्यम से महोत्सव की गरिमा को बढ़ाते हैं। मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने इसे समझाते हुए कहा कि पंचकल्याणक के पुण्य का अनुभव केवल पद ग्रहण करके ही किया जा सकता है; इसे केवल शब्दों में समझाना संभव नहीं है।
भव्य प्रतिमाएं और जिनालय
Karitoran महोत्सव में कुल 700 से अधिक प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इनमें 11 फुट ऊंची खड्गासन प्रतिमाएं, संगमरमर की 24 उत्तुंग शिखर प्रतिमाएं और 31 उपरत्न प्रतिमाएं शामिल हैं। इसके अलावा 108 उत्तुंग सहसकूट जिनालय का निर्माण भी भव्य रूप से किया गया है। इतना विशाल और ऊंचा शिखर अन्यत्र दुर्लभ माना जाता है। तीन-चार किलोमीटर दूर से ही यह शिखर दिखाई देता है और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। प्राचीन जिनालय की प्रतिमाओं में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत अनुभव मिलता है, वहीं Karitoran में नवीन जिनालय में 11 फुट ऊंची प्रतिमाएं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। ये प्रतिमाएं आचार्य यति वृषभ स्वामी द्वारा रचित तिलोम पन्नति और आचार्य बसुबंधी स्वामी तथा उमा स्वामी द्वारा रचित श्रावकाचार के अनुसार तैयार की गई हैं। यह संरचना उत्तर भारत में अद्वितीय है और दक्षिण भारत में भी ऐसी प्रतिमाओं का मिलना दुर्लभ माना जाता है।
देशभर के जैन समाज के लिए महापर्व
Karitoran में आयोजित होने वाला यह महोत्सव जैन धर्मावलंबियों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और धर्म लाभ का अवसर है। आयोजन में सुरक्षा, यातायात, आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को देखते हुए समिति ने सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। प्रतिभागियों के लिए महोत्सव न केवल धार्मिक अवसर होगा, बल्कि यह जैन संस्कृति, आस्था और भक्ति के प्रचार का भी माध्यम बनेगा। बुंदेलखंड की धरा पर इस आयोजन के माध्यम से देशभर के श्रद्धालु मिलकर जैन धर्म और आस्था का उत्सव मनाएंगे।
