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Indore के सरकारी स्कूलों में 74 शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल, फर्जी डिग्री से कर रहे नौकरी

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Published On: 29 January 2026
Indore Issues FIR Orders Against 74 Teachers, Accused of Using Fake Degrees to Secure Jobs
— Indore Issues FIR Orders Against 74 Teachers, Accused of Using Fake Degrees to Secure Jobs

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Indore में फर्जी डिग्री से नौकरी करने वाले 74 शिक्षकों की जांच: 

Indore: मध्यप्रदेश के Indore शहर में सरकारी स्कूलों में नियुक्त 74 शिक्षकों की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि इन शिक्षकों ने संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री का इस्तेमाल कर नौकरी प्राप्त की थी। इस मामले की जांच अब लोकायुक्त के द्वारा की जा रही है, जिन्होंने शिक्षा विभाग से इन शिक्षकों के नियुक्ति संबंधी पूरे रिकॉर्ड की मांग की है। इस मामले ने Indore के शिक्षा क्षेत्र में हलचल मचा दी है, और सवाल उठने लगे हैं कि क्या राज्य के शिक्षा तंत्र में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की जड़ें इतनी गहरी हैं?

लोकायुक्त की जांच

पिछले कुछ समय से Indore जिले के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले 74 शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं कि उन्होंने संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी डीएड (Diploma in Education) और बीएड (Bachelor of Education) की अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं। इस मामले को लेकर लोकायुक्त ने शिक्षा विभाग से इन शिक्षकों के पहले नियुक्ति आदेश, उनकी प्रस्तुत की गई डिग्रियों के सत्यापन, सेवा पुस्तिका की जानकारी और उनकी वर्तमान नियुक्ति स्थान के बारे में पूरा रिकॉर्ड मांगा है।

लोकायुक्त ने यह भी कहा है कि यह मामला गंभीर है क्योंकि अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि इन शिक्षकों ने फर्जी डिग्रियां प्रस्तुत की हैं, तो इससे न सिर्फ इन शिक्षकों की नौकरी पर सवाल उठेंगे, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यशैली और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा होगा। इस जांच से शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी असर पड़ सकता है।

एफआईआर के आदेश

एक साल पहले भी इस मामले में शिकायत की गई थी और एफआईआर के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। लोकायुक्त के पत्र के बाद अब शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाने की योजना बनाई जा रही है।

फर्जी डिग्री का मामला

इस मामले में विशेष बात यह है कि ये शिक्षक वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करके नौकरी में शामिल हुए थे। इन शिक्षकों ने डीएड और बीएड की फर्जी अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं, जिनका सत्यापन किया गया था और यह पाया गया कि अधिकांश डिग्रियां जाली थीं।

यहां तक कि कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर अलग-अलग परीक्षार्थियों के अंकसूचियां पाई गईं, जिससे यह साबित हो गया कि दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी थे। जांच में पाया गया कि कई शिक्षकों ने सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से अपनी नियुक्ति कराई थी, जिनमें अधिकतर शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं।

शिक्षा विभाग की लापरवाही

Indore जिले के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी होने के मामले को लेकर शिक्षा विभाग की लापरवाही भी सामने आई है। 2021 में सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले 77 शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। इस शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों की डिग्रियों की जांच शुरू की। हालांकि, एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी विभाग ने एफआईआर दर्ज करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जांच के दौरान यह पाया गया कि इनमें से अधिकांश शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी पाई गई थीं। इस मामले में 45 शिक्षकों के दस्तावेजों की पुष्टि माध्यमिक शिक्षा मंडल से की गई, और यह पाया गया कि कई दस्तावेज़ जाली थे। हालांकि, विभाग ने इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, जो दर्शाता है कि या तो विभाग में भ्रष्टाचार का माहौल है या फिर अधिकारियों की ओर से इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

नियुक्ति प्रक्रिया में कमी

यह मामला यह भी दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में काफी लापरवाही और कुप्रबंधन है। संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाना यह सिद्ध करता है कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो सकती हैं। यदि शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया होता, तो इस प्रकार के फर्जी मामलों का खुलासा पहले ही हो सकता था।

इसके साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि क्या विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर इन फर्जी दस्तावेजों को नजरअंदाज किया, जिससे इन शिक्षकों को नौकरी मिल सकी। अगर यही सच है, तो यह शिक्षा विभाग की नीतियों और नियुक्ति प्रक्रिया की गंभीर अव्यवस्था को उजागर करता है।

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आगे की कार्रवाई

जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “74 शिक्षकों के मामले की जांच अभी चल रही है। हम लोकायुक्त द्वारा भेजे गए निर्देशों के अनुसार सभी दस्तावेज़ों की जांच करेंगे और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करेंगे। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि यह मामला इस समय जटिल होता जा रहा है, क्योंकि फर्जी डिग्रियों से संबंधित शिकायतों के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। अब जब लोकायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, तो इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रभाव

इस मामले का इंदौर के शिक्षा तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि इन शिक्षकों ने फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल किया है, तो यह शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करेगा। इसके अलावा, इंदौर के सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि फर्जी डिग्रियों वाले शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं।

यह मामला अन्य राज्य और जिलों में भी एक चेतावनी हो सकती है, जहां सरकारी स्कूलों में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। सरकारी विद्यालयों में इस प्रकार के फर्जी मामलों के उजागर होने से शिक्षा विभाग को अपनी नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी रोकी जा सके।

निष्कर्ष

Indore में सरकारी स्कूलों में नियुक्त 74 शिक्षकों द्वारा फर्जी डिग्रियों का उपयोग करके नौकरी पाने का मामला राज्य में एक बड़ी शिक्षा घोटाले का संकेत हो सकता है। लोकायुक्त की जांच इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा सकती है। शिक्षा विभाग को अब इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को रोका जा सके। इसके साथ ही, इस तरह के मामलों से निपटने के लिए सभी शिक्षा विभागों को अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार करने की आवश्यकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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