—Advertisement—

MPPSC मेडिकल ऑफिसर भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 15 दिन में परीक्षा कराने के आदेश

Author Picture
Published On: 28 January 2026
High Court Orders MPPSC Medical Officer Exam to be Reheld Within 15 Days
— High Court Orders MPPSC Medical Officer Exam to be Reheld Within 15 Days

—Advertisement—

MPPSC मेडिकल ऑफिसर भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सैकड़ों डॉक्टर्स को राहत दी है। कोर्ट ने यह पाया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं, और इसके चलते पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने के आदेश दिए। कोर्ट ने MPPSC को 15 दिनों के भीतर नई परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है।

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं

हाईकोर्ट ने पाया कि 2024-25 में निकाली गई मेडिकल ऑफिसर भर्ती में कई अनियमितताएं हुईं। खासकर, जब MPPSC ने अचानक “एडिशनल रजिस्ट्रेशन” का नियम लागू कर दिया। इस नियम की वजह से कई MBBS डॉक्टर्स को इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया। यह निर्णय तब लिया गया जब उम्मीदवारों ने पहले से सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर दिए थे, लेकिन अचानक से रजिस्ट्रेशन का यह अतिरिक्त नियम लागू किया गया, जिससे इन उम्मीदवारों को बड़ी परेशानी हुई।

कुछ डॉक्टरों का आरोप था कि जिनके पास रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन्हें फोन करके इंटरव्यू से हटा दिया गया। इस पर इन डॉक्टर्स ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट ने दी राहत, 15 दिन में फिर से परीक्षा कराने के निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान इस बात का संज्ञान लिया कि भर्ती प्रक्रिया में “रूल ऑफ द गेम” को बदला गया था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती के दौरान यदि नियमों में बदलाव किए जाते हैं, तो यह अनुचित है। कोर्ट ने MPPSC को 15 दिनों के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नई भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। सभी योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने का समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।

एडिशनल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता पर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि MPPSC द्वारा अचानक लागू किया गया एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम भर्ती के मौलिक नियमों में नहीं था। कोर्ट ने कहा कि केवल पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट की आवश्यकता थी, जिसे अधिकांश उम्मीदवार पहले ही प्रस्तुत कर चुके थे। एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम लागू करने का कोई आधार नहीं था, और यह नियम उम्मीदवारों के लिए परेशानियां उत्पन्न करने वाला था।

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का नियम परिवर्तन तभी किया जा सकता है, जब सभी उम्मीदवारों को बराबरी का अवसर दिया गया हो। इस फैसले से यह साफ हो गया कि जो उम्मीदवार पहले योग्य थे, उन्हें अचानक से बाहर करना गलत था।

अभ्यर्थियों को मिलेगा दूसरा मौका

हाईकोर्ट के इस आदेश से सैकड़ों उम्मीदवारों को राहत मिली है। अब उन्हें एक बार फिर से आवेदन करने और इंटरव्यू में भाग लेने का मौका मिलेगा। कोर्ट के फैसले के बाद MPPSC को निर्देश दिया गया है कि वह सभी पात्र उम्मीदवारों को मौका दे और नई भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनाए रखें। इस प्रक्रिया में कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए।

MPPSC पर बढ़ा दबाव

MPPSC के लिए यह आदेश चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अब उन्हें 15 दिनों के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया को फिर से आयोजित करना है। आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि नई प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी उम्मीदवार के साथ भेदभाव न हो। साथ ही, भर्ती में शामिल सभी दस्तावेज़ और प्रमाण सही तरीके से जांचे जाएं।

साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नई भर्ती प्रक्रिया के बाद उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। इस आदेश के बाद MPPSC पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द और सही तरीके से परीक्षा प्रक्रिया को पूरा करें।

क्या है इसका असर?

इस फैसले का प्रभाव यह है कि अब उम्मीदवारों को एक नया अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य की दिशा तय होगी। कोर्ट के आदेश ने यह सुनिश्चित किया है कि भर्ती में कोई भी उम्मीदवार असमानता का सामना न करे। इससे ना केवल उम्मीदवारों को भरोसा मिलेगा, बल्कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

इसके अलावा, यह भी माना जा सकता है कि इस फैसले के बाद MPPSC को भविष्य में किसी भी भर्ती प्रक्रिया में नियमों में बदलाव करने से पहले सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। यह आदेश न केवल उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह सरकारी विभागों और आयोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत भी है कि वे अपनी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखें।

निष्कर्ष

MPPSC द्वारा आयोजित मेडिकल ऑफिसर भर्ती पर जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। कोर्ट ने प्रक्रिया में अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने का आदेश दिया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भर्ती में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण है।

अब, 15 दिनों के भीतर MPPSC को इस भर्ती प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने और सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर देने की जिम्मेदारी उठानी होगी। इस फैसले ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव तब तक नहीं किया जा सकता जब तक सभी उम्मीदवारों को समान अवसर न दिया जाए।

इस फैसले से सैकड़ों डॉक्टरों को राहत मिली है और उन्हें एक नया मौका मिलेगा अपनी मेहनत का फल प्राप्त करने का। साथ ही, यह आदेश यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp