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Trump की चागोस पर टिप्पणी से भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ सकता है तनाव

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Published On: 28 January 2026
Trump Calls Chagos Handover a ‘Mistake’, Raising Concerns for India–US Ties
— Trump Calls Chagos Handover a ‘Mistake’, Raising Concerns for India–US Ties

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Trump की चागोस द्वीपों पर टिप्पणी से भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ सकता है तनाव, समझिए पूरा मामला

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की एक हालिया टिप्पणी ने हिंद महासागर क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के फैसले को ट्रंप ने “बहुत बड़ी मूर्खता” करार दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत के रिश्ते पहले से ही व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दों को लेकर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया कूटनीतिक टकराव पैदा कर सकती है।

क्या है चागोस द्वीप समूह का मामला?

चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित द्वीपों का एक समूह है, जिसमें डिएगो गार्सिया सबसे महत्वपूर्ण द्वीप है। यहीं पर अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा स्थित है, जिसे हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से चागोस द्वीप मॉरीशस का हिस्सा थे, लेकिन 1965 में, मॉरीशस को आजादी मिलने से ठीक तीन साल पहले, ब्रिटेन ने इस द्वीप समूह को उससे अलग कर लिया।

बाद में ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया को अमेरिका को लीज पर दे दिया, जहां एक शक्तिशाली सैन्य बेस स्थापित किया गया। यह सैन्य अड्डा पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य रणनीति का अहम केंद्र रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और ब्रिटेन का फैसला

2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि चागोस द्वीप समूह पर ब्रिटेन का नियंत्रण अवैध है और इसे मॉरीशस को वापस किया जाना चाहिए। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी मॉरीशस के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया।

अक्टूबर 2024 में ब्रिटेन ने अंततः इस फैसले को स्वीकार करते हुए चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने पर सहमति जताई। मई 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक औपचारिक समझौता हुआ, जिसके तहत ब्रिटेन डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए लीज पर ले सकता है। इसके बदले ब्रिटेन हर साल 100 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि देगा।

Trump की टिप्पणी क्यों बनी विवाद की वजह?

Donald Trump ने इस समझौते को “बहुत बड़ी मूर्खता” बताते हुए कहा कि ब्रिटेन का यह कदम वैश्विक रणनीतिक संतुलन को कमजोर करता है। Trump ने यहां तक कहा कि ब्रिटेन का यह फैसला उनके ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की सोच के पीछे की वजहों में से एक है।

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका की पिछली सरकारों ने ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते का समर्थन किया था। ऐसे में Trump का यह बयान न केवल ब्रिटेन के लिए बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

भारत-मॉरीशस संबंध और भारत का रुख

भारत ने हमेशा मॉरीशस के चागोस द्वीप समूह पर संप्रभुता के दावे का समर्थन किया है। यह समर्थन केवल कूटनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यावहारिक सहयोग में भी दिखा है।

भारत और मॉरीशस के बीच मजबूत रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग है। हाल ही में दोनों देशों ने मॉरीशस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में भारत द्वारा हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण सहायता के समझौते का नवीनीकरण किया है। चागोस द्वीप समूह के मॉरीशस में शामिल होने से उसका EEZ काफी बढ़ गया है, जो पहले लगभग 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर था।

भारत की भूमिका क्यों है अहम?

मॉरीशस के पास सीमित संसाधन और छोटा तटरक्षक बल है, जिसमें एक दर्जन से भी कम गश्ती नौकाएं हैं। ऐसे में भारत का सहयोग उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। योजना के तहत मॉरीशस चागोस द्वीप समूह तक पहुंचने के लिए एक भारतीय जहाज का उपयोग करेगा और वहां अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराएगा।

इस कदम का प्रतीकात्मक महत्व बहुत अधिक है। यह न केवल मॉरीशस की संप्रभुता को मजबूत करता है, बल्कि ब्रिटेन को भी एक अप्रत्यक्ष संदेश देता है, जिसने पहले मॉरीशस को चागोस तक पहुंचने के लिए अपना जहाज देने की पेशकश की थी।

चीन की भूमिका पर भी नजर

विश्लेषकों का मानना है कि चागोस द्वीप समूह में भारत की बढ़ती भूमिका से उसे इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है, और ऐसे में भारत-मॉरीशस सहयोग रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

इसके अलावा भारत पोर्ट लुई के पुनर्विकास में भी सहायता कर रहा है, जो मॉरीशस के आर्थिक विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी अहम है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?

Trump की टिप्पणी भारत के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। एक ओर भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह अंतरराष्ट्रीय कानून और उपनिवेशवाद से मुक्ति के सिद्धांतों के समर्थन में मॉरीशस के साथ मजबूती से खड़ा है।

यदि अमेरिका आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के फैसले का विरोध करता है, तो यह भारत-अमेरिका संबंधों में मतभेद का कारण बन सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत संतुलित कूटनीति अपनाते हुए इस मुद्दे पर अपने रुख को स्पष्ट लेकिन संयमित तरीके से रखेगा।

निष्कर्ष

चागोस द्वीप समूह केवल कुछ द्वीपों का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, सैन्य रणनीति और हिंद महासागर की भू-राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा है। ब्रिटेन द्वारा द्वीपों को मॉरीशस को लौटाने का फैसला अंतरराष्ट्रीय न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की तीखी टिप्पणी ने इस पूरी प्रक्रिया में एक नया और अप्रत्याशित मोड़ ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद भारत-अमेरिका संबंधों को किस दिशा में ले जाता है और चागोस द्वीप समूह का भविष्य किस तरह आकार लेता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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