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Ujjain: मोरपंख मुकुट और बादाम माला से सजे त्रिनेत्र स्वरूप में बाबा महाकाल भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

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Published On: 28 January 2026
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— महाकाल भस्म आरती: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, जयघोष से गूंज उठा मंदिर परिसर

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Ujjain: मोरपंख मुकुट और बादाम माला से सजे त्रिनेत्र स्वरूप में बाबा महाकाल भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

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माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार तड़के Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अलसुबह आयोजित भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने मंदिर परिसर को शिवमय बना दिया। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही कतारों में खड़े नजर आए। जैसे ही मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

बुधवार सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल को जगाकर विधिवत भस्म आरती की शुरुआत की गई। इस दौरान भगवान महाकाल का विशेष और दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसने भक्तों का मन मोह लिया। आज के श्रृंगार की सबसे खास बात यह रही कि बाबा महाकाल को मोरपंख का मुकुट, गले में बादाम की माला और त्रिनेत्र स्वरूप में सजाया गया। भस्म रमाकर किए गए इस अलौकिक श्रृंगार में बाबा महाकाल अत्यंत मनोहारी और दिव्य प्रतीत हो रहे थे।

Ujjain भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

माघ माह की इस पावन तिथि पर बाबा महाकाल के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्त रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में लग गए थे। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस दुर्लभ भस्म आरती के दर्शन किए।

भक्तों का मानना है कि भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल अपने साकार रूप में दर्शन देते हैं और इस आरती के दर्शन मात्र से जीवन के कष्टों का नाश होता है। यही कारण है कि हर दिन, विशेषकर माघ माह में, भस्म आरती में शामिल होने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

विधिविधान से संपन्न हुई भस्म आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार सुबह परंपरागत विधि-विधान से भस्म आरती संपन्न कराई गई। सबसे पहले वीरभद्र जी से अनुमति लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके पश्चात गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक में जल के साथ दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का उपयोग किया गया। पूजन के दौरान सबसे पहले घंटाल बजाकर “हरिओम” मंत्र के साथ जल अर्पित किया गया, जिससे पूरा गर्भगृह मंत्रोच्चार से गूंज उठा।

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उज्जैन: मोरपंख मुकुट और बादाम माला से सजा त्रिनेत्रधारी बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

कपूर आरती और भस्म अर्पण का दिव्य दृश्य

अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने विधिवत कपूर आरती की और इसके बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के दौरान झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभूति से भर देने वाला था। कई भक्त इस दौरान भाव-विभोर होकर बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए।

त्रिनेत्र स्वरूप में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार

आज के श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता बाबा महाकाल का त्रिनेत्र स्वरूप रहा। मान्यता है कि त्रिनेत्र शिव का वह रूप है, जो सृष्टि, संहार और संरक्षण का प्रतीक है। बाबा महाकाल के मस्तक पर मोरपंख का मुकुट और गले में बादाम की माला धारण कराई गई, जो उनके सौम्य और उग्र दोनों स्वरूपों को दर्शा रही थी।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस स्वरूप के दर्शन से भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और सुख-समृद्धि की कामना की।

भस्म आरती का धार्मिक महत्व

भस्म आरती को महाकालेश्वर मंदिर की सबसे विशिष्ट और दुर्लभ आरती माना जाता है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिवलिंग पर भस्म चढ़ाकर आरती की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और यह संदेश देती है कि यह संसार क्षणभंगुर है।

मान्यता यह भी है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती के दर्शन को अत्यंत फलदायी माना गया है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर की दैनिक आरती व्यवस्था

श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन छह प्रमुख आरतियां संपन्न होती हैं, जिनका समय इस प्रकार है:

  • प्रथम भस्म आरती: प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक
  • द्वितीय दद्यौतक आरती: प्रातः 7:30 से 8:15 बजे तक
  • तृतीय भोग आरती: प्रातः 10:30 से 11:15 बजे तक
  • चतुर्थ संध्याकालीन पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे तक
  • पंचम संध्या आरती: सायं 6:30 से 7:15 बजे तक
  • शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक

मंदिर प्रशासन के अनुसार, आरती का यह क्रम फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तक जारी रहेगा।

श्रद्धालुओं के लिए हेल्पलाइन और जानकारी

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर से संबंधित दर्शन, आरती, पूजन, दान और अन्य जानकारी के लिए श्रद्धालु टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002331008 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा 24×7 सहायता के लिए निम्न नंबरों पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है:

0734-2559272, 2559277, 2559276, 2559275

 

 

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