UGC एक्ट के विरोध में मध्यप्रदेश में प्रदर्शन, DAVV के गेट पर छात्रों ने की नारेबाजी, 1 फरवरी को इंदौर बंद की घोषणा
UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के विरोध में मध्यप्रदेश में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), इंदौर के एक गेट पर सवर्ण समाज के छात्रों ने श्री राजपूत करणी सेना के बैनर तले जोरदार नारेबाजी की और विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने यूजीसी के नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया और विश्वविद्यालय के कुलपति को यूजीसी के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि यह नियम उनके शैक्षणिक अधिकारों और भविष्य को सीधे प्रभावित करता है और इससे छात्र जीवन में मानसिक दबाव बढ़ेगा।
छात्र-समूह ने किया हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य छात्रों में एकता का भाव जगाना और इस आंदोलन को धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना है। उनका कहना था कि यह आंदोलन केवल विरोध ही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी है।
UGC का नया नियम छात्रों पर दबाव बढ़ाएगा – श्री करणी सेना
इस अवसर पर श्री करणी सेना के प्रमुख अनुराग प्रताप सिंह राघव ने कहा कि UGC का नया नियम सवर्ण समाज सहित कई वर्गों के छात्रों के लिए अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह नियम छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक दबाव बढ़ाएगा और उनके भविष्य को अंधकारमय बना सकता है। राघव ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी समाज के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए है। उनका कहना था कि यदि शासन ने छात्रों की आवाज़ नहीं सुनी, तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए नियमों पर पुनर्विचार किया जाए।
1 फरवरी को इंदौर बंद का आह्वान, 2 फरवरी को सांसद निवास का घेराव
श्री करणी सेना ने आगे कहा कि UGC के ‘काले कानून’ के विरोध में आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। आगामी कार्यक्रमों के तहत 1 फरवरी को इंदौर बंद करने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही 2 फरवरी को इंदौर सांसद के निवास का घेराव करने की घोषणा भी की गई है। आयोजकों ने सभी छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर समर्थन करें और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूती दें। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा सिर्फ छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है।
छात्रों की चिंता: पढ़ाई और करियर पर पड़ेगा भारी असर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि UGC द्वारा लागू किए गए नए नियमों से छात्रों की पढ़ाई और करियर पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। छात्रों ने बताया कि नए नियमों के कारण शिक्षा का महत्त्व घटेगा और प्रतियोगिता की स्थिति और अधिक कठिन हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र ऐसे हैं जिनकी तैयारी और मेहनत के बावजूद नियमों के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो सकती है। इसके साथ ही छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि नियमों में पारदर्शिता का अभाव है और छात्रों की राय को नजरअंदाज किया गया है।
क्या है विवाद का केंद्र?
UGC के नए नियमों को लेकर विवाद का मुख्य कारण यह है कि छात्रों के शैक्षणिक अधिकार, प्रवेश प्रक्रिया, सीट अलॉटमेंट और छात्रवृत्ति जैसी व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं।
छात्र संगठन इस बदलाव को अपने भविष्य के लिए खतरा मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि नए नियमों को वापस लिया जाए और छात्र हितों को प्राथमिकता दी जाए।
