भारत–EU मेगा डील: अब इंडिया में सस्ती होंगी मर्सिडीज-BMW, 110% ड्यूटी घटकर 10%
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने करीब दो दशक से चली आ रही बातचीत के बाद आखिरकार ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसे भारत की सबसे बड़ी और प्रभावशाली व्यापारिक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते का सीधा और सबसे बड़ा असर भारत के लग्जरी ऑटोमोबाइल बाजार पर देखने को मिलेगा। सरकार ने यूरोप से आयात होने वाली पूरी तरह निर्मित कारों (CBU – Completely Built Units) पर लगने वाली 110% की भारी-भरकम इम्पोर्ट ड्यूटी को घटाकर सिर्फ 10% करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद मर्सिडीज-बेंज, BMW, ऑडी और वोल्वो जैसे यूरोपीय लग्जरी ब्रांड्स की कारें भारत में कहीं ज्यादा किफायती हो सकती हैं।
क्यों खास है भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA को लेकर लगभग 20 वर्षों से बातचीत चल रही थी। टैक्स, बाजार पहुंच, पर्यावरण मानक और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण यह डील बार-बार अटकती रही। लेकिन अब दोनों पक्षों ने व्यापार की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक — उच्च आयात शुल्क — को खत्म करने का फैसला किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत स्थिति में लाएगा।

लग्जरी कार बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
अब तक भारत में यूरोप से आयात की जाने वाली लग्जरी कारों पर 110% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कार विदेश में 40,000 डॉलर (लगभग 33 लाख रुपये) की होती थी, तो टैक्स और शुल्क जोड़ने के बाद उसकी कीमत भारत में दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती थी।
नई डील के तहत यह ड्यूटी घटकर सिर्फ 10% रह जाएगी। इससे—
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हाई-एंड यूरोपीय कारें सस्ती होंगी
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लग्जरी सेगमेंट में बिक्री बढ़ेगी
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भारत में ‘मेड इन यूरोप’ प्रीमियम मॉडल्स की पहुंच बढ़ेगी
क्या हैं डील की मुख्य शर्तें ?
हालांकि ड्यूटी में कटौती बहुत बड़ी है, लेकिन सरकार ने इसके साथ कुछ अहम शर्तें भी जोड़ी हैं—
सालाना आयात कोटा
सरकार ने रियायती दर पर आयात होने वाली कारों के लिए 2.5 लाख यूनिट प्रति वर्ष की सीमा तय की है। इससे घरेलू ऑटो उद्योग पर अचानक दबाव नहीं पड़ेगा।
धीरे-धीरे लागू होगा नियम
इम्पोर्ट ड्यूटी में यह कटौती एक साथ लागू नहीं होगी। इसे चरणबद्ध तरीके से 2027 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को राहत नहीं
घरेलू कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा को सुरक्षा देने के लिए यूरोपीय इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को शुरुआती 5 वर्षों तक इस छूट से बाहर रखा गया है।
किन कारों की कीमतों में आएगी सबसे ज्यादा गिरावट?
यह समझना जरूरी है कि मर्सिडीज और BMW की कई लोकप्रिय कारें पहले से ही भारत में CKD (Completely Knocked Down) यूनिट के रूप में असेंबल की जाती हैं, जिन पर 15–16.5% की ड्यूटी लगती है।
इसलिए—
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भारत में असेंबल होने वाले मॉडल्स की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा
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लेकिन वे प्रीमियम मॉडल्स जो सीधे यूरोप से इम्पोर्ट होते हैं, उनकी कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा
यानी ‘मेड इन यूरोप’ हाई-एंड लग्जरी कारें अब पहले के मुकाबले काफी सस्ती होंगी।
भारत: दुनिया का उभरता ऑटो हब
भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। हर साल यहां करीब 44 लाख कारें बिकती हैं, लेकिन इसके बावजूद यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी अभी 4% से भी कम है।इसका सबसे बड़ा कारण अब तक ऊंचे टैक्स और आयात शुल्क रहे हैं।
FTA के बाद—
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फॉक्सवैगन, स्कोडा और वोल्वो जैसी कंपनियों को विस्तार में मदद मिलेगी
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नई टेक्नोलॉजी और मॉडल्स भारत आएंगे
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प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर
भारत और EU के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 190 अरब डॉलर (करीब 15.80 लाख करोड़ रुपये) को पार कर चुका है।
इस समझौते के बाद इसके और बढ़ने की उम्मीद है।
संभावित फायदे—
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निर्यात में बढ़ोतरी: कपड़ा, कृषि, फार्मा और IT सेवाओं को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच
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निवेश में इजाफा: ऑटो पार्ट्स, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नया निवेश
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रोजगार सृजन: हजारों नए रोजगार के अवसर
इसके अलावा, भारत और EU ने 2026–2030 की रणनीतिक योजना और रक्षा सहयोग पर भी सहमति जताई है।
