कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने Burqa विवाद पर दिया बड़ा बयान, विधायक महंत प्रतापपुरी ने किया खुलकर समर्थन
बाड़मेर। धार्मिक और सामाजिक चर्चाओं के बीच बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने Burqa पहनने और बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बेटियों को लव जिहाद जैसी संभावित खतरनाक परिस्थितियों से बचाने के लिए उन्हें केवल Burqa पहनने के लिए नहीं प्रेरित करना चाहिए, बल्कि उन्हें मां दुर्गा जैसी शक्ति स्वरूपा के रूप में तैयार करना चाहिए। इस बयान को पोकरण के विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी ने खुले समर्थन में लिया।
धीरेंद्र शास्त्री का संदेश: शक्ति स्वरूपा बनो Burqa में नहीं
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि बेटियों को केवल सुरक्षा के नाम पर Burqa में ढक देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके अनुसार, हमारी परंपरा में नारी को शक्ति और सम्मान के रूप में देखा गया है। शास्त्रों में देवी सरस्वती, दुर्गा और अन्नपूर्णा जैसी शक्तिशाली स्वरूपाओं का वर्णन मिलता है। शक्ति शब्द में सब कुछ समाहित है और जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसलिए बेटियों को शक्ति स्वरूपा के रूप में विकसित करना चाहिए, न कि तिरस्कार और डर के प्रतीक के रूप में।
शास्त्री ने कहा, “बेटियों को दुर्गा और काली जैसी शक्ति का स्वरूप अपनाना चाहिए, लेकिन Burqa पहनने जैसी केवल बाहरी ढाल उन्हें असली सुरक्षा और आत्मविश्वास नहीं दे सकती। हमें उनकी आंतरिक शक्ति को बढ़ाना है, ताकि वे किसी भी चुनौती का सामना साहस और विवेक के साथ कर सकें।”
यह बयान उन्होंने कोटा के रामगंजमंडी कस्बे में आयोजित तीन दिवसीय श्रद्धा-भक्ति महाकुंभ के दौरान दिया। वहां उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के सामने अपनी बात रखी और कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को सिर्फ सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि शक्ति, सम्मान और पूजा का पात्र माना गया है।

विधायक महंत प्रतापपुरी ने किया समर्थन
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पोकरण विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी ने कहा कि कथावाचक का संदेश पूरी तरह सही है। उन्होंने कहा, “हमारी मातृशक्ति की परंपरा हमेशा हमारे समाज की आधारशिला रही है। बेटियों को शक्ति स्वरूपा के रूप में विकसित करना ही हमारी जिम्मेदारी है। कुछ लोग इसे अशांति फैलाने का माध्यम बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इसे समझना चाहिए।”
महंत प्रतापपुरी ने आगे कहा कि शास्त्री का बयान न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आज की परिस्थिति में जब समाज में लव जिहाद और अन्य सामाजिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब बेटियों को केवल बाहरी सुरक्षा देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना आवश्यक है।
सामाजिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान समाज में बहुपक्षीय बहस का कारण बन सकता है। उनके अनुसार, केवल परिधान के माध्यम से सुरक्षा देना पर्याप्त नहीं है। हमें बेटियों में मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देवी दुर्गा और काली जैसी शक्तियां सिर्फ पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमारी दैनिक जीवनशैली में भी प्रतिबिंबित होती हैं।
शास्त्री ने कहा कि जब बेटियों को शक्ति स्वरूपा के रूप में देखा जाएगा, तो वे अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए स्वयं खड़ी हो सकेंगी। यह दृष्टिकोण लिंग समानता, आत्मनिर्भरता और समाज में महिलाओं के महत्व को बढ़ाने में सहायक होगा।
Burqa विवाद: केवल बाहरी सुरक्षा नहीं
पंडित धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान बुर्का पहनने को लेकर चल रही बहस में नया आयाम जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बुर्का केवल बाहरी ढाल का काम करता है, जबकि असली सुरक्षा और सशक्तिकरण तो आत्मा और मन की शक्ति से आती है। उनके अनुसार, बेटियों को मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति दी जाए, ताकि वे समाज में किसी भी खतरे का सामना न केवल कर सकें, बल्कि उसे रोकने और समझने की क्षमता भी रखें।
शास्त्री ने कहा, “हमारे शास्त्र और संस्कृति में शक्ति, सम्मान और स्वतंत्रता का महत्व बहुत अधिक है। यदि हम बेटियों को केवल बुर्का पहनने की शिक्षा देंगे, तो हम उनकी आंतरिक शक्ति को दबा देंगे। इसे बदलने की आवश्यकता है।”
प्रतिक्रिया और समर्थन
महंत प्रतापपुरी ने कहा कि शास्त्री का बयान समाज और धर्म दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कई लोग इसे गलत अर्थों में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसका मूल संदेश समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के महत्व को उजागर करना है।
उन्होंने आगे कहा कि यह वक्त हमारी बेटियों को केवल संरक्षण देने का नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, साहसी और समाज में अपना योगदान देने वाला बनाने का है। शास्त्री का यह दृष्टिकोण युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
धार्मिक और सामाजिक शिक्षा का संदेश
शास्त्री का बयान केवल आलोचना के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सशक्तिकरण की भावना को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त नहीं होंगी, तब तक बाहरी सुरक्षा जैसे उपाय उनकी वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि शक्ति स्वरूपा की शिक्षा उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है, आत्मसम्मान देती है और समाज में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करती है। इसके साथ ही यह दृष्टिकोण परिवारों और समाज को भी बेटियों के प्रति सही दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
निष्कर्ष
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान वर्तमान समय में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, सशक्तिकरण और समाज में उनकी भूमिका को लेकर गंभीर संदेश देता है। उनके अनुसार, केवल बाहरी सुरक्षा जैसे Burqa पहनना पर्याप्त नहीं है। बेटियों को मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक शक्ति से लैस करना आवश्यक है।
विधायक महंत प्रतापपुरी का खुलकर समर्थन इस बात को और मजबूत करता है कि समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। यह दृष्टिकोण बेटियों के लिए न केवल आत्मनिर्भरता लाएगा बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और अधिकार प्राप्त करने की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा।
शास्त्री और प्रतापपुरी के इस संदेश ने महिलाओं के सशक्तिकरण, धार्मिक परंपराओं और समाज में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। यह बयान निश्चित रूप से सामाजिक बहस और जागरूकता बढ़ाने का काम करेगा।
