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आज Dollar के मुकाबले Rupee फिर रिकॉर्ड स्तर पर गिरा, महीनेभर में 2.3% कमजोरी

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Published On: 24 January 2026
Rupee hits record low again, closes at 91.94 against the dollar
— Rupee hits record low again, closes at 91.94 against the dollar

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आज Dollar के मुकाबले Rupee फिर रिकॉर्ड स्तर पर गिरा, महीनेभर में 2.3% कमजोरी

नई दिल्ली। भारतीय Rupee 23 जनवरी, 2026 को अमेरिकी Dollar के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया 91.96 तक फिसला और अंततः 91.94 पर बंद हुआ। यह पिछले छह महीनों में रुपये की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह रुपये का कमजोर प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एशिया की ज्यादातर मुद्राओं ने अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बावजूद हल्की मजबूती दिखाई। इसके बावजूद रुपये पर दबाव बना रहा।

हफ्ते और महीने में रुपया कितना फिसला?

  • हफ्तेभर में रुपये में 1.18% की गिरावट दर्ज की गई।
  • महीनेभर में Dollar के मुकाबले रुपये में 2.3% की कमी आई।

Mecklai Financial Services के वाइस प्रेसीडेंट कुनाल कुरानी का कहना है कि,
“वैश्विक संकेत चाहे जैसे भी हों, रुपया लगातार दबाव में रहता है। यह काफी हद तक वैसा ही है जैसा हमने 2025 के अधिकांश हिस्से में देखा।”

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपया कमजोर होने का असर न केवल विदेशी निवेश पर पड़ रहा है बल्कि आयातकों और कॉरपोरेट कंपनियों की लागत पर भी दिखाई दे रहा है।

Rupee गिरने के पीछे क्या मुख्य कारण हैं?

1. विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालना

भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार पैसा निकालने की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा है। जनवरी की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने लगभग 3.5 अरब डॉलर कीमत के शेयर बेचे हैं। भारतीय मुद्रा में यह लगभग 32,000 करोड़ रुपये के बराबर है।

विदेशी निवेशकों के बाहर निकलने का असर रुपये की कीमत पर तुरंत दिखाई देता है। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालते हैं, तो उन्हें डॉलर में पैसा चाहिए होता है, जिससे रुपये की मांग घटती है और डॉलर की कीमत बढ़ जाती है।

2. आयातकों की बढ़ती Dollar की मांग

भारतीय कंपनियों और आयातकों ने आने वाले समय में रुपये की और कमजोरी की आशंका के कारण हेजिंग बढ़ा दी है। हेजिंग का मतलब है कि कंपनियां पहले ही डॉलर खरीदकर अपनी कीमत लॉक कर रही हैं ताकि भविष्य में रुपये के और गिरने पर उन्हें ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े।

तेल और अन्य कमोडिटी के आयातक इस समय डॉलर खरीदने में तेजी दिखा रहे हैं। इसका असर रुपये पर और अधिक दबाव डालता है।

3. निर्यातकों ने फॉरवर्ड मार्केट में Dollar की बिक्री धीमी की

फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की आपूर्ति कम होने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। फॉरवर्ड मार्केट में किसी भविष्य की तारीख के लिए आज ही कीमत तय कर ली जाती है। इस प्रक्रिया में अगर निर्यातक डॉलर की बिक्री कम करते हैं, तो रुपये में कमजोरी और बढ़ जाती है।

रुपये की लगातार कमजोरी का प्रभाव

रुपये की कमजोरी केवल शेयर बाजार और आयातकों पर ही असर नहीं डाल रही। इससे कई सेक्टर्स पर प्रभाव पड़ रहा है:

  1. तेल और कमोडिटी की कीमतें: रुपये के कमजोर होने से तेल, सोना, चांदी और अन्य कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होती है।
  2. कॉर्पोरेट लागत में वृद्धि: रुपये के कमजोर होने से आयातित कच्चे माल की कीमत बढ़ जाती है, जिससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
  3. विदेशी निवेशकों की धारणा: लगातार रुपये में कमजोरी विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने से हतोत्साहित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश में बाहर निकलने का रुझान जारी रहा और आयातकों की डॉलर की मांग बनी रही, तो रुपये में और गिरावट संभव है।

रुपये के कमजोर होने की तुलना पिछले समय से

पिछले साल जनवरी 2025 में रुपये की स्थिति देखें तो डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा स्थिर थी। लेकिन इस साल की शुरुआत से रुपये में गिरावट तेज हो गई।

  • जनवरी की शुरुआत से अब तक रुपये में लगभग 2.3% की गिरावट दर्ज की गई।
  • हफ्तेभर में रुपये की कमजोरी 1.18% रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेत और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव डाल रही है।

भविष्य के लिए क्या संकेत हैं?
  1. विदेशी निवेशकों के बाहर निकलने की गति
  2. आयातकों और निर्यातकों की हेजिंग रणनीतियाँ
  3. डॉलर की वैश्विक कीमतों में बदलाव

इन तीनों कारकों से अगले कुछ हफ्तों में रुपये की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालना जारी रखा और डॉलर की मांग बढ़ी, तो रुपये की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

निष्कर्ष

जनवरी 2026 को रुपये का ऑल टाइम लो पर पहुंचना और महीनेभर में 2.3% की गिरावट यह संकेत देती है कि भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है।

  • विदेशी निवेशक रुपये पर दबाव डाल रहे हैं।
  • आयातकों और कॉरपोरेट कंपनियों की डॉलर मांग लगातार बढ़ रही है।
  • फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की आपूर्ति घटने से स्थिति और बिगड़ रही है।

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी फिलहाल जारी रह सकती है और निवेशकों, आयातकों और आम जनता के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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