शंकराचार्य अपमान मामला गरमाया, Congress का बड़ा विरोध जीतू पटवारी-पीसी शर्मा ने खोला मोर्चा
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से रोके जाने के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में शनिवार को मध्य प्रदेश Congress ने एक दिवसीय उपवास रखा। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस उपवास में प्रदेश Congress अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। Congress ने इस उपवास के माध्यम से गौ हत्या, गौ मांस तस्करी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कथित अपमान को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल एक संत के अपमान का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
शंकराचार्य का अपमान पूरे सनातन समाज का अपमान
उपवास के दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चार पीठों में से एक पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा, शंकराचार्य को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर स्नान करने से रोका गया। बटुकों की चोटी पकड़कर उन्हें पीटा गया। क्या यही हिंदुत्व है? पीसी शर्मा ने आगे कहा कि शंकराचार्य को जान से मारने की धमकियां तक दी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुगल और अंग्रेजों ने सैकड़ों वर्षों तक शासन किया, लेकिन कभी शंकराचार्यों से प्रमाण नहीं मांगा, जबकि वर्तमान सरकार शंकराचार्य से प्रमाण मांग रही है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
‘जो काम मुगलों और अंग्रेजों ने नहीं किया, वो सरकार कर रही’
पीसी शर्मा ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी शंकराचार्य को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्होंने कहा, जो काम मुगलों और अंग्रेजों ने नहीं किया, वह आज की सरकार कर रही है। यह सीधे-सीधे सनातन परंपरा पर हमला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर शंकराचार्य ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा की क्या गारंटी है। पीसी शर्मा ने कहा कि यह घटना सरकार की मानसिकता को उजागर करती है।
शंकराचार्य से माफी मांगे सरकार
प्रदेश Congress अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा खुद को हिंदुत्व की ठेकेदार बताती है, लेकिन व्यवहार में संतों और धार्मिक परंपराओं का अपमान कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से माफी मांगे और इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे। जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में गौ हत्या और गौ मांस तस्करी की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धर्म का राजनीतिक उपयोग कर रही है।
Congress का आरोप: भाजपा सनातन विरोधी
Congress नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रयागराज में जिस तरह से शंकराचार्य के साथ व्यवहार किया गया, उससे साफ होता है कि भाजपा का असली चेहरा सनातन विरोधी है Congress का कहना है कि सरकार एक तरफ धर्म की बात करती है और दूसरी तरफ संतों और धार्मिक गुरुओं को अपमानित कर रही है। Congress नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल प्रयागराज या एक संत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के सनातन समाज की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
क्या है पूरा विवाद
पूरा मामला प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से जुड़ा है। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि पुलिस ने उनसे पालकी से उतरकर पैदल स्नान घाट जाने को कहा। बताया जा रहा है कि जब शंकराचार्य ने पालकी से उतरने से इनकार किया, तो पुलिस ने उनके समर्थकों के साथ मारपीट की। आरोप यह भी है कि बटुकों की चोटी पकड़कर उन्हें पीटा गया, जिससे संत समाज में भारी आक्रोश फैल गया।
नोटिस के बाद बढ़ा विवाद
विवाद यहीं नहीं थमा। प्रयागराज मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उनके नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखने को लेकर नोटिस भी जारी किया। इस नोटिस के बाद मामला और गंभीर हो गया और संत समाज तथा राजनीतिक दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। Congress का कहना है कि मेला प्रशासन का यह कदम धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप है और इससे संत समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
आंदोलन की चेतावनी
Congress नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की और शंकराचार्य से माफी नहीं मांगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के सम्मान की है। Congress ने साफ किया है कि संतों का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार को इसके लिए जवाब देना होगा।
