पुण्योदय के योग से मिला है परमात्मा का जिन शासन – साध्वी शाश्वत प्रिया श्री जी म.सा
महिदपुर रोड, भीनमाल (सचिन भंडारी) – श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में विराजित परम पूज्य साध्वी शाश्वत प्रिया श्री जी महाराज साहब ने शुक्रवार को धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को पुण्योदय के योग और जिन शासन के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
देवगुरु के दर्शन के लिए पूरी तैयारी आवश्यक
साध्वी जी ने सभा में कहा कि देवगुरु के दर्शन के लिए हमें खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर प्रधानमंत्री का आमंत्रण आता है, तो हम सज-धज कर, संपूर्ण तैयारी के साथ जाते हैं। उसी प्रकार तीन लोकों के नाथ तीर्थंकर, परमात्मा के दर्शन के लिए भी हमें अष्टप्रकारी पूजा का सामान लेकर और श्रद्धा भाव से पूरी तैयारी करनी चाहिए।”
साध्वी जी ने आगे बताया कि पुण्योदय के योग से हमें जिन शासन और जैन कुल की प्राप्ति होती है। यह हमारे मनुष्य अवतार को सफल बनाने का अवसर है और धर्म आराधना के माध्यम से हमें अपने जीवन में आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है।
पुण्योदय का महत्व
साध्वी जी ने पुण्योदय के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुण्योदय केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में धर्म और साधना को स्थापित करने का मार्ग है। साध्वी जी ने बताया कि इस दिन तीर्थंकर के दर्शन और सेवा से व्यक्ति को उनके जिन शासन का लाभ प्राप्त होता है।
उन्होंने उपस्थित भक्तों को प्रेरित किया कि वे जीवन में सच्ची भक्ति और साधार्मिक प्रभावना का पालन करें। साध्वी जी ने कहा कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे हमारे कर्मों और व्यवहार में भी झलकाना चाहिए।
भव्य भजन संध्या और धार्मिक कार्यक्रम
धर्मसभा की पूर्व संध्या पर गुरुवार को युवा भजन गायक आकाश बंजारा और उनकी टीम ने नामदेव महाराज के भजन संध्या का आयोजन किया। इस भजन संध्या में पुरुष और महिलाएं दोनों ने मिलकर भजनों का आनंद लिया और भक्तिमय वातावरण का अनुभव किया।
शुक्रवार को महाआरती का आयोजन किया गया और इसके बाद गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा भास्कर भवन से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई वापस भास्कर भवन पहुंची। इसमें युवा भक्तिगीतों में झूमते नजर आए और महिलाएं रंग-बिरंगे परिधानों में मंगलगीत गाती चलीं।

समाजिक और धार्मिक सहभागिता
साध्वी जी के प्रवचन का लाभ अशोक कुमार, बापू लाल, कोचर मावा वाला परिवार सहित कई परिवारों ने लिया। नगर में साध्वी जी की पावन कीर्ती में अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न किए गए।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने धर्म लाभ प्राप्त किया और साध्वी जी से जीवन के मार्गदर्शन के लिए प्रेरणा ली। उन्होंने बताया कि साध्वी जी का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि समाज में नैतिकता और धार्मिक मूल्य फैलाने वाला है।
धर्म सभा का समापन और आगे की योजनाएँ
धर्मसभा के समापन पर श्री नामदेव सेवा मंडल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में समाज के विकास और आगामी धार्मिक गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया गया। साध्वी जी ने समाज के सभी लोगों को धर्म और साधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
सचिन भंडारी, जैन समाज के मीडिया प्रभारी, ने बताया कि इस कार्यक्रम की सफलता में नगरवासियों और आस-पास के क्षेत्रों के लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने कहा कि साध्वी जी के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में धर्म और भक्ति को अधिक महत्व देने की प्रेरणा प्राप्त की।
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निष्कर्ष: पुण्योदय से जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता
साध्वी शाश्वत प्रिया श्री जी का प्रवचन नगरवासियों और जैन समाज के लोगों के लिए आध्यात्मिक जागरूकता का अवसर था। उनके संदेश ने भक्तों के मन में धर्म और भक्ति के प्रति नई चेतना पैदा की। पुण्योदय के इस धार्मिक आयोजन ने सभी उपस्थित लोगों को जीवन में धर्म, साधना और आध्यात्मिकता को स्थायी रूप से अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रकार पुण्योदय का योग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्यों को स्थापित करने का भी एक बड़ा अवसर है। साध्वी जी के उपदेश और मार्गदर्शन से श्रद्धालु अपने जीवन में धर्म और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं।
