—Advertisement—

‘वर्ल्ड बैंक और IMF की चेतावनी: India में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट’

Author Picture
Published On: 23 January 2026
“World Bank and IMF Warn: Air Pollution Poses Major Health and Economic Crisis for India”
— “World Bank and IMF Warn: Air Pollution Poses Major Health and Economic Crisis for India”

—Advertisement—

World Bank and IMF Warn:‘ट्रंप के टैरिफ’ नहीं, India के लिए वायु प्रदूषण है असली खतरा: दुनिया ने जताई चिंता

दुनिया की नामचीन पत्रिका ‘द लैंसेट’ के संपादक और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रिचर्ड हॉर्टन ने भारत में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। हॉर्टन ने कहा है कि India इस बड़े संकट से निपटने में विफल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों लाखों मौतों और जहरीली हवा के बावजूद भारत में अब तक कोई व्यापक आक्रोश नहीं देखा गया।

वर्तमान में हर दिन India में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के असर पर चर्चा होती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए इस समय टैरिफ से भी बड़ी समस्या वायु प्रदूषण है। भारत में हवा अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। ‘द लैंसेट’ के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोगों की मौत हुई।

हॉर्टन ने उठाए सवाल

हॉर्टन ने कहा कि भारत गंदी हवा से मर रहा है और इस पर किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के लोकतंत्र में जनता साफ हवा की मांग क्यों नहीं कर रही और लोग सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछ रहे। हॉर्टन ने कहा, “भारत की सरकार का वायु प्रदूषण को गंभीरता से न लेना रहस्यमयी और अजीब है। असली समस्या लोगों की उदासीनता और राजनीतिक जवाबदेही की कमी है।”

हॉर्टन ने उदाहरण देते हुए चीन की स्थिति की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि बीजिंग जैसे शहरों में सालों तक दमघोंटू हवा और प्रदूषण झेलने के बाद चीन ने सख्त और ठोस कदम उठाए। इसके विपरीत, भारत अब भी इस दिशा में पीछे है। हॉर्टन ने हैरानी जताते हुए कहा कि भारत जैसा मजबूत लोकतंत्र होने के बावजूद यहाँ प्रदूषण जैसे गंभीर विषय पर कोई बड़ा आक्रोश क्यों नहीं है।

वर्ल्ड बैंक और IMF की चेतावनी

इसी बीच, IMF की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि इस समय भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा टैरिफ नहीं बल्कि वायु प्रदूषण है। प्रदूषण की वजह से भारत को न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानव जीवन के मामले में भी भारी नुकसान हो रहा है।

वर्ल्ड बैंक की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 1.4 अरब आबादी का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा PM2.5 जैसे सबसे हानिकारक वायु प्रदूषकों के संपर्क में है। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में साल के अधिकांश समय एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 50 से कम नहीं रहता, जबकि उत्तरी भारत के कई हिस्सों में AQI स्तर 400 से ऊपर चला जाता है। विशेषकर सर्दियों में दिल्ली और इसके आसपास के इलाके दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरी क्षेत्रों में शामिल हैं।

धीमी मौत और जवाबदेही की कमी

हॉर्टन ने कहा कि प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और मौतें धीरे-धीरे होती हैं, इसलिए जनता और पॉलिसी निर्माता दोनों जिम्मेदारी से बचते हैं। उन्होंने कहा, “गंभीर स्तर का वायु प्रदूषण कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां, सांस की समस्याएं और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। लेकिन इसके असर तुरंत नहीं दिखते।” हॉर्टन के अनुसार, अगर किसी के साथ कार दुर्घटना होती है तो जीवन तुरंत खतरे में आ जाता है, लेकिन प्रदूषण का असर महीनों या सालों बाद दिखाई देता है।

चीन से तुलना

हॉर्टन ने कहा कि बीजिंग में पहले प्रदूषण का स्तर इतना गंभीर था कि उसे हर सांस में महसूस किया जा सकता था। इसके बाद चीन ने उद्योगों को बंद किया, गाड़ियों पर सख्त पाबंदियां लगाईं और शहर के अंदर प्रदूषण कम किया। अब बीजिंग का हाल ऐसा है कि वहां की हवा गांव जैसी साफ और सुंदर है।

समस्या की जड़: राजनीतिक और सामाजिक उदासीनता

हॉर्टन का मानना है कि भारत में प्रदूषण से निपटने में विफलता का मूल कारण सिर्फ तकनीकी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक उदासीनता है। भारत में लोग और पॉलिसी निर्माता दोनों ही प्रदूषण की गंभीरता को लेकर उतनी सतर्क नहीं हैं, जितना होना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए अब तत्काल कार्रवाई करना जरूरी है। नीतिगत सुधार, उद्योगों और वाहनों पर नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन में सुधार और प्रदूषण नियंत्रक उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। हॉर्टन और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत ने अब कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में हर साल लाखों और लोगों की मौत और स्वास्थ्य संकट बढ़ते रहेंगे।

निष्कर्ष
इस तरह, भारत में वायु प्रदूषण न सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट बन चुका है बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से भी देश के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रिचर्ड हॉर्टन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक ने भारत को चेतावनी दी है कि अब समय है त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का। अगर जनता और सरकार दोनों गंभीर नहीं हुए, तो यह संकट और बढ़ सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp