PWD ने 40,000 किमी सड़कों का सेफ्टी ऑडिट कराया
मध्य प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य का लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार व्यापक रूप से सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट करवा रहा है। यह पहल एनएचएआई के एक्सप्रेस-वे मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य सड़क निर्माण में किसी भी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है। इस प्रक्रिया के तहत स्टेट हाई-वे, जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों को विभिन्न सुरक्षा मापदंडों पर जांचा जाएगा।
ऑडिट की प्रक्रिया और उद्देश्य
सेफ्टी ऑडिट तीन मुख्य चरणों में किया जाता है। पहला चरण प्री-डिज़ाइन स्टेज है, जिसमें सड़क की आवश्यकता और मार्ग का अवलोकन किया जाता है, साथ ही ट्रैफिक वॉल्यूम, वाहन प्रकार और स्कूल, अस्पताल व बाजार जैसे महत्वपूर्ण पॉइंट्स का चयन किया जाता है। दूसरे चरण में डिजाइन स्टेज आता है, जिसमें रोड की चौड़ाई, मोड़, ग्रेड, जंक्शन डिजाइन, फुटपाथ, स्टॉप, ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग का मूल्यांकन किया जाता है। तीसरे चरण में सड़क निर्माण के दौरान और निर्माण के बाद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्क ज़ोन, बैरिकेडिंग, डायवर्जन, रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत की जांच की जाती है।
सड़कों के संचालन के बाद भी ब्लैक स्पॉट की पहचान और दुर्घटना डेटा का विश्लेषण करके सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सड़क पर कोई तकनीकी खामी दुर्घटना का कारण न बने।
40,000 किलोमीटर सड़कों का ऑडिट
PWD ने राज्य में लगभग 40,000 किलोमीटर सड़कों का ऑडिट कराया। इस दौरान प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गईं। इनमें से लगभग 200 खामियों को तुरंत ठीक कर दिया गया, जबकि 200 से अधिक खामियां ऐसी थीं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ी दुरुस्तियाँ करनी थी। इनमें अंधे मोड़, क्यूकल अंडरपास और सुरक्षित क्रॉसिंग का निर्माण शामिल है। विभाग ने इन सुधारों को पूरा कर लिया है।
इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़कें सिर्फ बनकर उपयोग के लिए तैयार न हों, बल्कि यातायात और सुरक्षा की दृष्टि से पूरी तरह से सुरक्षित हों। ऑडिट के बाद सड़क पर किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो जाती है।
तकनीकी खामियों को दूर करने का महत्व
सड़क निर्माण में छोटी-छोटी खामियां भी समय के साथ गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। रोड सेफ्टी ऑडिट से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुरक्षा सभी मापदंडों के अनुरूप हों। इसके अलावा, ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार से सड़कें और अधिक सुरक्षित बनती हैं।
ऑडिट के दौरान न केवल नई सड़कों को जांचा जाता है, बल्कि पहले से बनी सड़कों को भी परखा जाता है। इससे पता चलता है कि निर्माण में कहां सुधार की आवश्यकता है और किन खामियों को दूर किया जा सकता है। यह पूरी प्रक्रिया सड़क सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
रोड सेफ्टी ऑडिट के लाभ
PWD द्वारा करवाया गया रोड सेफ्टी ऑडिट मध्य प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस ऑडिट के माध्यम से सड़क हादसों को रोकने में मदद मिलेगी और दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि और आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। ऑडिट में सड़क की डिजाइन, निर्माण और संचालन के सभी चरणों की गहन जांच की जाती है, जिससे किसी भी तकनीकी खामी को समय रहते पहचानकर सुधार किया जा सके।
इस प्रक्रिया में सड़क के ब्लैक स्पॉट की पहचान करना, साइन बोर्ड, रोशनी और गति नियंत्रण जैसी सुविधाओं का मूल्यांकन करना शामिल है। इसके अलावा, पैदल यात्री और साइकिल चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाते हैं। ऑडिट से यह पता चलता है कि सड़क पर कौन-कौन से ऐसे क्षेत्र हैं जहां दुर्घटना की संभावना अधिक है और वहां सुधारात्मक उपाय तुरंत लागू किए जा सकते हैं।
इस पहल से न केवल सड़क पर यात्रा करना अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी बढ़ेगा। यात्री सुरक्षित महसूस करेंगे और दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान में कमी आएगी। कुल मिलाकर, यह कदम राज्य की सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और सड़क यात्रा को भरोसेमंद बनाने के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा।
