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Indore रेंज में वन भूमि पर बढ़ता अतिक्रमण, सुपर कॉरिडोर बना भूमाफियाओं का निशाना

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Published On: 23 January 2026
Indore Range Witnesses Rapid Rise in Forest Land Encroachment
— Indore Range Witnesses Rapid Rise in Forest Land Encroachment

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Indore वनमंडल में अतिक्रमण का विस्फोट, अवैध खेती से सिमटते जंगल

मध्यप्रदेश में वन भूमि पर अतिक्रमण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में जंगलों पर अवैध कब्जे, प्लॉटिंग और खेती के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन Indore रेंज की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक मानी जा रही है। विशेष रूप से इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण तेजी से बढ़ा है, जिससे पर्यावरण, जैव विविधता और हरियाली पर सीधा असर पड़ रहा है।

Indore वनमंडल में बढ़े अतिक्रमण के मामले

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते एक वर्ष में Indore वनमंडल में अतिक्रमण के मामलों में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इंदौर, चोरल, महू और मानपुर वन क्षेत्रों में अब तक 322 से अधिक अतिक्रमण प्रकरण सामने आ चुके हैं। इन मामलों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने वन भूमि पर अवैध कब्जा कर उस पर अपना दावा पेश किया है।

वन विभाग ने इन सभी प्रकरणों की विस्तृत सूची तैयार कर जिला प्रशासन को भेज दी है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वन क्षेत्र और अधिक सिमट सकते हैं।

सुपर कॉरिडोर क्षेत्र बना अतिक्रमण का केंद्र

Indore रेंज के अंतर्गत आने वाला सुपर कॉरिडोर क्षेत्र अतिक्रमण का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। यहां वन विभाग की भूमि से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 40 से अधिक लोग वन भूमि पर अवैध रूप से काबिज पाए गए हैं।

इनमें बड़ी संख्या भूमाफियाओं की बताई जा रही है, जो वन भूमि पर कब्जा कर उसे प्लॉटिंग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही जंगल से सटे क्षेत्रों में पहले से प्लॉट रखने वाले लोग भी धीरे-धीरे वन भूमि की ओर अपने कब्जे का विस्तार कर रहे हैं।

अवैध खेती से बदल रहा जंगल का स्वरूप

अतिक्रमण की समस्या केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर वन भूमि पर अवैध खेती भी शुरू कर दी गई है। खेतों के लिए जंगल साफ किए जा रहे हैं, पेड़ों की कटाई की जा रही है और प्राकृतिक वनस्पति को नष्ट किया जा रहा है। इसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन, वन्यजीवों के आवास और भूजल स्तर पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में हरियाली की जगह कंक्रीट और खेती का विस्तार दिखाई देगा।

कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार कुछ अतिक्रमण मामलों में वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर जानबूझकर कार्रवाई में देरी की गई या अतिक्रमण को नजरअंदाज किया गया। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले और बढ़ गए।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी रेंज अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही संदिग्ध मामलों की जांच कर विभागीय जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने के संकेत मिले हैं।

मुख्यालय से निरीक्षण और रिपोर्ट के निर्देश

वन विभाग का मुख्यालय पहले ही जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण, अवैध कटाई और अवैध खेती को लेकर चिंता जता चुका है। कुछ महीने पहले सभी वनवृत्त और वनमंडलों को निर्देश दिए गए थे कि विशेष टीमें गठित कर जंगलों का निरीक्षण किया जाए और जमीनी स्थिति की वास्तविक रिपोर्ट तैयार की जाए।

इन टीमों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे अतिक्रमण के साथ-साथ अवैध पेड़ कटाई और खेती की गतिविधियों की भी जानकारी एकत्र करें। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद अतिक्रमण की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जो प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

Indore वृत्त में हालात सबसे अधिक गंभीर

Indore वृत्त के अंतर्गत आने वाले जिलों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। अब तक पूरे इंदौर वृत्त में 800 से अधिक अतिक्रमण प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें इंदौर के अलावा आलीराजपुर, झाबुआ और धार जिले शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार:

  • अकेले इंदौर जिले में 322 से अधिक अतिक्रमण मामले सामने आए हैं
  • धार और आलीराजपुर जिलों में 80 से 85 के बीच प्रकरण दर्ज किए गए हैं
  • इंदौर और झाबुआ में अतिक्रमण करने वाले सबसे अधिक सक्रिय बताए जा रहे हैं

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इंदौर वृत्त प्रदेश के उन क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जहां वन भूमि पर दबाव सबसे अधिक है।

पर्यावरण और भविष्य पर खतरा

वन विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों पर बढ़ता अतिक्रमण केवल वर्तमान समस्या नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। जंगलों के सिमटने से न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, गर्मी में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

सुपर कॉरिडोर जैसे शहरी विस्तार वाले क्षेत्रों में यदि वन भूमि का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में शहरी पर्यावरण पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ दिखाई देगा।

जल्द शुरू होगी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

सीसीएफ पी.एन. मिश्रा ने बताया कि इंदौर वृत्त में वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अतिक्रमण हटाने की रणनीति तय की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जल्द ही चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर पर्यावरण और हरियाली का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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