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ट्रंप की Greenland खरीद की इच्छा पर पुतिन का तंज: कीमत सिर्फ 23 अरब रुपये

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Published On: 22 January 2026
Putin Sets Greenland Price at $250 Million, Sends Strong Message to Europe
— Putin Sets Greenland Price at $250 Million, Sends Strong Message to Europe

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पुतिन ने Greenland की कीमत बताकर यूरोप को चौंकाया, ट्रंप की मंशा पर लगाई पैनी टिप्पणी

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर Greenland को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित रुचि और संभावित खरीद की खबरों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और यूरोप के लिए अप्रत्यक्ष रूप से तीखा संदेश दिया। पुतिन ने ग्रीनलैंड की कीमत करीब 23 अरब रुपये (लगभग 200–250 मिलियन अमेरिकी डॉलर) लगाई, जिसे उन्होंने ट्रंप और अमेरिका के लिए आसानी से चुकाने योग्य बताया।

Greenland : कूटनीतिक विवाद का केंद्र

दुनिया के सबसे बड़े द्वीप Greenland को हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर लेकर बहस हो रही है। अमेरिका की इस रुचि के पीछे मुख्य उद्देश्य रणनीतिक और आर्थिक लाभ है। वहीं पुतिन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रूस का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यह मामला हमसे संबंधित नहीं है। मुझे लगता है कि इसे डेनमार्क और अमेरिका अपने आप सुलझा लेंगे।”

इतिहास का हवाला: अलास्का और वर्जिन द्वीप

Greenland की कीमत तय करने के लिए पुतिन ने ऐतिहासिक दृष्टांत दिए। उन्होंने वर्ष 1867 का उदाहरण देते हुए बताया कि रूस ने उस समय अलास्का को अमेरिका को 7.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर में बेचा था। आज के हिसाब से महंगाई और मूल्य समायोजन के बाद यह राशि लगभग 158 मिलियन अमेरिकी डॉलर होती।

अलास्का का क्षेत्रफल 1.717 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जबकि ग्रीनलैंड 2.166 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला है। क्षेत्रफल के अनुपात के आधार पर पुतिन ने ग्रीनलैंड की कीमत लगभग 200–250 मिलियन अमेरिकी डॉलर या 23 अरब रुपये के बीच बताई।

उन्होंने वर्जिन द्वीपों का उदाहरण भी दिया, जिन्हें 1917 में डेनमार्क ने अमेरिका को बेचा था। पुतिन ने कहा कि डेनमार्क का अनुभव इस तरह के सौदों में रहा है और ग्रीनलैंड के साथ उसने हमेशा एक कॉलोनी जैसा व्यवहार किया, जिसमें सख्ती और नियंत्रण शामिल था।

यूरोप के लिए संदेश

पुतिन के इस बयान का राजनीतिक अर्थ भी है। ग्रीनलैंड की कीमत केवल 23 अरब रुपये बताकर उन्होंने यूरोप को संकेत दिया कि अमेरिका के सामने यूरोप की बातचीत की शक्ति सीमित है। पुतिन ने कहा, “ग्रीनलैंड कोई पवित्र भूमि नहीं है, इसे सिर्फ एक संपत्ति की तरह देखा जा सकता है।”

यूरोप के नेताओं द्वारा इसे संप्रभुता का मुद्दा मानने और अमेरिका के संभावित हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त करने के बीच, पुतिन ने इस विवाद को एक आर्थिक और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य से देखना सुझाया।

यूरोप के उपनिवेशी व्यवहार पर तीखी टिप्पणी

पुतिन ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर उपनिवेशी व्यवहार की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ कठोर और नियंत्रित व्यवहार किया, जो इतिहास में यूरोप की शक्ति और दबंगई का उदाहरण है। यह टिप्पणी यूक्रेन संकट में यूरोप और रूस के लंबे तनाव को भी दर्शाती है।

ट्रंप, ग्रीनलैंड और वैश्विक रणनीति

ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की इच्छा को वैश्विक रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा दृष्टि से अहम है। लेकिन पुतिन की कीमतों की गणना ने यह संदेश दिया कि दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र भी इस तरह के सौदों में मूल्यांकन के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।

पुतिन ने कहा, “अमेरिका इतनी रकम आसानी से चुका सकता है। असली बात यह है कि डेनमार्क और अमेरिका को इसे खुद सुलझाना चाहिए, रूस का इसमें कोई रोल नहीं है।”

प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक असर

पुतिन के बयान ने यूरोप और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पर असर डाला है। उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे को हल्के अंदाज में प्रस्तुत कर यह दिखाया कि रूस केवल निरीक्षक है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की टिप्पणी ने यूरोप की स्थिति को कमजोर करते हुए अमेरिका की शक्ति को रेखांकित किया है।

इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि पुतिन अंतरराष्ट्रीय विवादों में ऐतिहासिक और रणनीतिक संदर्भों का उपयोग कर अपनी स्थिति मजबूत करना जानते हैं। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनकी टिप्पणियां यूरोप और अमेरिका दोनों के लिए कूटनीतिक चुनौती पैदा कर सकती हैं।

निष्कर्ष

Greenland विवाद दर्शाता है कि इतिहास, भू-राजनीति और आर्थिक दृष्टिकोण कितने गहरे जुड़े हैं। पुतिन द्वारा ग्रीनलैंड की कीमत 23 अरब रुपये तय करना केवल मूल्य निर्धारण नहीं, बल्कि एक संदेश है:

  1. ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से सीख।
  2. यूरोप के उपनिवेशी रवैये पर कटाक्ष।
  3. अमेरिका और यूरोप के बीच शक्ति संतुलन का संकेत।

जैसे-जैसे वार्ता आगे बढ़ेगी, ग्रीनलैंड रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहेगा। पुतिन के तंज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूरोप की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं और ट्रंप की खरीद योजना को भी एक नई कूटनीतिक चुनौती दे दी है।

इस प्रकार, ग्रीनलैंड की कहानी केवल भू-राजनीति का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति, इतिहास और रणनीति का जटिल मिश्रण बन गई है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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