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Indore में हाईकोर्ट का कड़ा रुख: प्रदूषण फैलाने वाले 243 उद्योगों को नोटिस

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Published On: 21 January 2026
High Court Takes Strict Action in Indore: 243 Pollution-Causing Industries Served Notices
— High Court Takes Strict Action in Indore: 243 Pollution-Causing Industries Served Notices

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Indore में बढ़ता पर्यावरण संकट: हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई, 243 उद्योगों को नोटिस

Indore , मध्यप्रदेश: स्वच्छता के लिए पूरे देश में प्रशंसित Indore शहर में हाल ही में जल और वायु प्रदूषण के गंभीर मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। हाल की रिपोर्टों में शहर के कई इलाकों में भूजल प्रदूषित पाया गया है, जबकि वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार असुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति शहरवासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चेतावनी का संकेत है।

इन हालातों के मद्देनजर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर नाराजगी जताई और उद्योगों पर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। यह मामला Indore में पर्यावरण सुरक्षा और औद्योगिक नियमों के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है।

Indore में स्वच्छता और प्रदूषण के बीच विरोधाभास

Indore को वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता रहा है। लगातार स्वच्छता रैंकिंग में उच्च स्थान हासिल करने वाला यह शहर, अब पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है। शहर के कई इलाकों में जल और वायु की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है।

जल प्रदूषण के मामले में भूजल में भारी धातुओं और रासायनिक अपशिष्ट की मौजूदगी सामने आई है। इससे पीने के पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। वहीं, वायु प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां, अस्थमा, और अन्य श्वसन रोगों के मामले बढ़ने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां, वाहन प्रदूषण और निर्माण कार्य वायु गुणवत्ता को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।

उच्च न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि यह केवल स्वच्छता का प्रश्न नहीं है, बल्कि जन स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा से जुड़ा मामला है। न्यायालय ने इसे मध्यप्रदेश जल प्रदूषण नियंत्रण और वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा।

Indore हाईकोर्ट का संज्ञान और औद्योगिक अनुपालन

न्यायालय ने खनन गतिविधियों, स्टोन क्रशर और रेड-ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को मुख्य प्रदूषण स्रोत माना। इन उद्योगों से निकलने वाले धूल, अपशिष्ट और रासायनिक प्रदूषक नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष और गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और यह कहा कि प्रशासन और बोर्ड की उदासीनता आम जनता के जीवन को खतरे में डाल रही है। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी नियम उल्लंघन करने वाले उद्योगों की पहचान कर उन्हें आवश्यक नोटिस जारी किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

243 उद्योगों को नोटिस, बिजली आपूर्ति पर कार्रवाई

Indore क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी सतीश चौकसे ने बताया कि जिले में कुल 243 नियम उल्लंघन करने वाले उद्योगों की पहचान कर नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इनमें कई उद्योग बिना वैधानिक अनुमति के लंबे समय से संचालित हो रहे थे।

उद्योगों का विवरण बिजली वितरण कंपनी को सौंप दिया गया है ताकि आवश्यक कार्रवाई के तहत उनकी विद्युत आपूर्ति बंद की जा सके। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नियमों का पालन न करने वाले उद्योग कार्यरूप से प्रतिबंधित हों और अन्य उद्योगों के लिए यह चेतावनी बनी रहे।

अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 5,961 पंजीकृत उद्योग हैं, जिनमें से लगभग 1,000 उद्योग प्रदूषण विभाग की अनुमति के बिना कार्यरत हैं। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को निर्धारित की है, जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों ने चेताया है कि इन औद्योगिक गतिविधियों के कारण शहर के नागरिकों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। वायु प्रदूषण के प्रभाव से बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन संबंधी रोग, एलर्जी और अस्थमा की शिकायतें बढ़ रही हैं।

जल प्रदूषण का प्रभाव पीने के पानी पर पड़ रहा है। लंबे समय तक अशुद्ध जल का सेवन करने से गुर्दे, लीवर, और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि औद्योगिक अपशिष्ट और रासायनिक कचरा यदि उचित तरीके से न निपटाया गया, तो यह केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा उत्पन्न कर सकता है।

प्रशासन और उद्योगों के लिए संदेश

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन और उद्योगों के लिए अब कोई ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। जो उद्योग नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह कदम इंदौर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है। साथ ही, यह सभी उद्योगों के लिए चेतावनी है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और नियमों का पालन अनिवार्य है।

नागरिकों और समाज की भूमिका

विशेषज्ञों और समाजसेवी संगठनों का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को भी अपने स्तर पर जागरूक रहना होगा।

  • कचरा न फैलाएं: औद्योगिक और घरेलू कचरे का सही निपटान करें।

  • जल संरक्षण: जल स्रोतों को प्रदूषित न होने दें।

  • प्रदूषण रिपोर्टिंग: किसी भी प्रदूषण या नियम उल्लंघन की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि इंदौर न केवल स्वच्छता में बल्कि पर्यावरण सुरक्षा में भी देश में उदाहरण बन सके।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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