CJI का तीखा रुख: मेनका गांधी की टिप्पणियों पर Supreme court भड़का
Supreme court ने पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को आज (मंगलवार, 20 जनवरी) कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उनके एक पॉडकास्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर दिए गए बयान और उनकी “बॉडी लैंग्वेज” पर सवाल उठाए। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि मेनका गांधी की टिप्पणियाँ अदालत की अवमानना (Contempt) के दायरे में आती हैं और यदि अदालत चाहे तो कार्रवाई भी कर सकती है, लेकिन अब तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के भविष्य के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजनिया की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि यह अदालत की “दरियादिली” है कि मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
यह मज़ाक नहीं, गंभीर टिप्पणी थी — कोर्ट ने किया तंज
Supreme court ने मेनका गांधी के वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि क्या उन्होंने यह देखा कि उनकी क्लाइंट पॉडकास्ट में क्या बोल रही हैं और किस तरह बोल रही हैं?
अदालत ने स्पष्ट किया कि मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों के हमलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार ठहराने जैसी टिप्पणियाँ की थीं, जो किसी मज़ाक के रूप में नहीं, बल्कि गंभीर आरोपों के रूप में सामने आईं। पीठ ने कहा: आपने कहा कि हमें सावधान रहना चाहिए। लेकिन आपकी क्लाइंट हर तरह की टिप्पणियाँ कर रही हैं। यह अवमानना है, लेकिन हम उस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं—यह हमारी महानता है। साथ ही, Supreme court ने मेनका गांधी की बॉडी लैंग्वेज पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह अपने पॉडकास्ट में क्या कह रही थीं, यह समझना जरूरी है।
वकील की प्रतिक्रिया पर CJI भड़के: कसाब ने अवमानना नहीं की थी
जब वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि यह अवमानना की सुनवाई नहीं है, तो अदालत ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ “सुनवाई” का नहीं है। इसके बाद वकील ने यह भी कहा कि वे 26/11 के आतंकवादी अजमल कसाब के लिए भी पेश हो चुके हैं। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ भड़क उठे और तुरंत कहा: कसाब ने अवमानना नहीं की थी। इस तरह कोर्ट ने वकील की टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई और साफ किया कि अदालत के सामने इस तरह की तुलना करना सही नहीं है।
बजट और जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
Supreme court ने यह भी सवाल उठाया कि मेनका गांधी एक पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। ऐसे में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने बजट, योजनाओं और नीति-निर्माण में क्या योगदान दिया? Supreme court ने कहा कि केवल आलोचना करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम और बजट की जिम्मेदारी भी होती है। वकील ने इस पर जवाब दिया कि उन्होंने रेबीज नियंत्रण, टीकाकरण, और आवारा कुत्तों के हमलों से निपटने के लिए पेशेवरों की क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन अदालत का कहना था कि यह केवल बहस नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा और कानून का सम्मान भी महत्वपूर्ण है।
लोग कितने टेंशन में हैं — देश में आवारा कुत्तों की समस्या
मेनका गांधी के पॉडकास्ट के दौरान की गई टिप्पणियों पर अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या एक गंभीर मुद्दा है और लोगों में इससे जुड़े तनाव और डर की स्थिति को समझना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में समाज की भावनाओं को समझना और कानून के दायरे में रहकर ही समाधान निकालना चाहिए।
