Baba Bageshwar की चेतावनी: “तो ना वर्मा बचेंगे, ना शर्मा… हिंदू एकजुट हों”
बांदा, उत्तर प्रदेश: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें लोग Baba Bageshwar के नाम से जानते हैं, ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हिंदुओं के लिए चेतावनी दी। उन्होंने अपने संबोधन में देश में घटती हिंदू आबादी, जातिवाद और राष्ट्रवाद के महत्व पर जोर दिया।
बाबा बागेश्वर ने कहा कि जिस दिन तिरंगे पर चांद आ जाएगा, उस दिन ना तो शर्मा बचेंगे, ना वर्मा, ना क्षत्रिय, ना रविदास वाले, और ना ही तुलसीदास वाले। उनका यह कथन हिंदुओं के एकजुट न होने और देश में घटती आबादी के खतरे को उजागर करता है। बाबा ने कहा कि इसका उदाहरण बांग्लादेश में देखा जा सकता है, जहां एक विधवा के साथ 40-40 लोगों ने दुष्कर्म किया। यह इस बात का संकेत है कि अगर हिंदू एकजुट नहीं हुए तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद की आवश्यकता
Baba Bageshwar ने अपने भाषण में जातिवाद की बजाय राष्ट्रवाद को महत्व देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इस काल में वही इंसान सफल है, वही ताकतवर है, जिसके पास सत्ता है और वही बच सकता है, जो एकजुट होकर रहता है।”
उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम समुदाय में 72 फिरके हैं, जैसे पठान, खान, शिया और सुन्नी, लेकिन जब उनके धर्म की बात आती है, तो वे केवल मुस्लिम कहलाते हैं। इसके विपरीत हिंदू समाज में लोग अपने जातिगत पहचान पर ज्यादा जोर देते हैं। बाबा बागेश्वर ने स्पष्ट किया कि हमें अपनी पहचान जाति से नहीं, बल्कि हिंदू धर्म और हिंदू विचारधारा से करनी चाहिए।
हिंदुओं की घटती आबादी पर चिंता
Baba Bageshwar ने भारत के 9 राज्यों में हिंदुओं की घटती आबादी की चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि “हम तो हिंदू हैं, लेकिन हम हिंदू नहीं हो पाए।” उन्होंने समझाया कि अगर समाज जातिगत पहचान में बंटा रहेगा और एकजुट नहीं होगा, तो यह देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए खतरा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लोग अपने आप को या तो वर्मा, शर्मा, पंडित या किसी अन्य जाति से पहचानते हैं, जबकि असली पहचान हिंदू होने की होनी चाहिए। उनका मुख्य संदेश था कि एकजुट हिंदू समाज ही अपने अस्तित्व और देश की रक्षा कर सकता है।
चार बच्चे लगाएंगे बेड़ा पार
Baba Bageshwar ने सम्मेलन में यह भी कहा कि समाज के लिए चार बच्चे महत्वपूर्ण हैं। उनका मत था कि एकजुट परिवार और संख्या में वृद्धि ही हिंदू समाज को मजबूत बनाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिन्दू समाज में सशक्त संतान ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षा और शक्ति का आधार है।
कार्यक्रम और आयोजन
यह सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित किया गया था। बाबा बागेश्वर ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के माध्यम से हिंदू समाज को सतर्क और जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में वही व्यक्ति बच सकता है जो संघ के आदर्शों और हिंदू धर्म के सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीता है।
बाबा बागेश्वर ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि देश में घटती आबादी और समाज में बिखराव के बीच जातिवाद नहीं, हिंदू एकता जरूरी है। उनका संदेश था कि यदि हिंदू समाज एकजुट नहीं हुआ, तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
संदेश का महत्व
Baba Bageshwar का यह संदेश केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा, समाज की शक्ति और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब हिंदू जाति के बजाय धर्म और विचारधारा के आधार पर एकजुट रहें।
उनकी चेतावनी यह भी बताती है कि सामाजिक और धार्मिक बिखराव से समाज कमजोर हो सकता है। बाबा ने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज के लिए शिक्षा, जागरूकता और संख्या में वृद्धि महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
Baba Bageshwar का विराट हिंदू सम्मेलन का संदेश स्पष्ट है – हिंदू समाज को जातिगत पहचान से ऊपर उठकर धर्म और राष्ट्र के आधार पर एकजुट रहना होगा। उनके अनुसार:
- जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद अपनाएं।
- हिंदू की पहचान जाति नहीं धर्म से होनी चाहिए।
- समाज की सुरक्षा और भविष्य के लिए संख्या में वृद्धि आवश्यक है।
- एकजुटता ही संकट के समय सुरक्षा और शक्ति देती है।
बाबा बागेश्वर का यह संदेश हिंदू समाज के लिए जागरूकता और चेतना का प्रतीक है, और आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुरक्षित बनाने का आह्वान करता है।
