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Saina Nehwal ने बैडमिंटन से संन्यास की घोषणा, कहा – ‘शरीर साथ नहीं दे रहा’

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Published On: 20 January 2026
Saina Nehwal Confirms Retirement from Badminton, Says ‘My Body Couldn’t Keep Up’
— Saina Nehwal Confirms Retirement from Badminton, Says ‘My Body Couldn’t Keep Up’

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Saina Nehwal ने किया रिटायरमेंट कंफर्म: शरीर साथ नहीं दे रहा, बताया क्यों नहीं की थी घोषणा

नई दिल्ली: भारत की पूर्व नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी Saina Nehwal ने आखिरकार अपने खेल से रिटायरमेंट की पुष्टि कर दी है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने खुलासा किया कि उनका शरीर अब हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धी मैचों के लिए साथ नहीं दे रहा है। साइना ने कहा कि इस वजह से उनके लिए आगे खेलना संभव नहीं था।

Saina Nehwal ने बताया कि उन्होंने औपचारिक रूप से रिटायरमेंट की घोषणा इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, “मैंने दो साल पहले खेलना बंद कर दिया था। मुझे सच में लगा कि मैंने अपनी शर्तों पर इस खेल में प्रवेश किया और अपनी शर्तों पर ही इसे छोड़ा। इसलिए इसकी घोषणा करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।”

दो साल से प्रतिस्पर्धा से दूरी

Saina Nehwal बीते दो साल से किसी भी प्रतियोगी मैच में भाग नहीं ले रही थीं। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2023 सिंगापुर ओपन में था। इस दौरान उनके फैंस और खेल जगत के लोग लंबे समय से उनके भविष्य पर सवाल कर रहे थे। साइना ने इस विषय पर साफ कहा, “अगर आप अब खेलने में सक्षम नहीं हैं, तो बस इतना ही। यह ठीक है।”

घुटनों की समस्या और हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग की कठिनाई

Saina Nehwal ने अपने रिटायरमेंट के पीछे मुख्य कारण घुटनों की लगातार बढ़ती चोट और उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग करने में असमर्थता बताया। उन्होंने कहा:
“आपकी कार्टिलेज पूरी तरह से खराब हो गई है, आपको आर्थराइटिस है। मेरे माता-पिता को यह जानने की ज़रूरत थी। मेरे कोच को यह जानने की ज़रूरत थी। मैंने बस उनसे कहा, ‘अब शायद मैं यह और नहीं कर सकती, यह मुश्किल है।'”

साइना ने आगे कहा कि पहले वह दिन में आठ से नौ घंटे की ट्रेनिंग कर सकती थीं, लेकिन अब उनका घुटना केवल एक या दो घंटे की ट्रेनिंग सह पाता था। इसके बाद सूजन आ जाती थी और जोर लगाना मुश्किल हो जाता था। इसी कारण उन्होंने फैसला लिया कि अब और प्रयास करना उनके लिए संभव नहीं है।

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औपचारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं समझी

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने औपचारिक रिटायरमेंट की घोषणा क्यों नहीं की, तो साइना ने कहा कि उन्हें यह बड़ा मामला नहीं लगा। उन्होंने कहा:
“मुझे नहीं लगा कि मेरे रिटायरमेंट की घोषणा करना इतना बड़ा मामला है। बस मैंने महसूस किया कि मेरा समय खत्म हो गया है। मेरा घुटना अब पहले जैसा जवाब नहीं दे रहा था। दुनिया में सबसे अच्छा बनने के लिए आप आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग करते हैं। अब मेरा घुटना केवल कुछ ही घंटे सह पाता था। इसलिए मैंने सोचा कि बस बहुत हो गया। मैं अब और ज़ोर नहीं लगा सकती।”

रियो 2016 की चोट और वापसी की कहानी

Saina Nehwal के करियर में रियो 2016 ओलंपिक एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। वहां उन्हें घुटने में गंभीर चोट लगी थी, जिसने उनके खेल के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ और 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर खुद को साबित किया।

इसके बावजूद, घुटनों की लगातार समस्या ने उनकी गति को बार-बार धीमा किया। इस कारण साइना ने लंबे समय तक प्रतियोगी मैचों में हिस्सा नहीं लिया और धीरे-धीरे खेल से दूरी बना ली।

Saina Nehwal का प्रभाव और योगदान

Saina Nehwal न केवल भारत में, बल्कि दुनिया में बैडमिंटन की पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई। एक समय वह दुनिया की नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं। उनके खेल ने भारत में महिला खिलाड़ियों को प्रेरित किया और बैडमिंटन को देश में लोकप्रिय बनाने में मदद की।

उनके करियर में कई उपलब्धियाँ शामिल हैं:

  • रियो 2016 ओलंपिक में कांस्य पदक
  • 2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़
  • 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड
  • BWF विश्व रैंकिंग में नंबर 1 तक पहुंचना

साइना की मेहनत और समर्पण ने युवा खिलाड़ियों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।

Saina Nehwal की वापसी और अंतिम फैसला

Saina Nehwal ने अपने करियर में चोटों और कठिनाइयों का सामना करते हुए भी लगातार वापसी की। हालांकि, अब उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनका शरीर प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके लिए व्यक्तिगत और स्वाभाविक था, और उन्होंने इसे अपने तरीके से लिया।

उनकी यह यात्रा न केवल उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानी है, बल्कि भारत में खेलों के प्रति नई पीढ़ी के जुनून और प्रेरणा का भी प्रतीक है।

निष्कर्ष

साइना नेहवाल का रिटायरमेंट भारतीय खेल जगत के लिए एक युग का अंत है। उनका करियर और उपलब्धियाँ हमेशा याद रहेंगी। उन्होंने न केवल पदक और पुरस्कार जीते, बल्कि भारत में महिला खेलों के लिए मार्ग भी प्रशस्त किया।

उनके योगदान और खेल के प्रति समर्पण ने देश को गर्व महसूस कराया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

साइना नेहवाल ने अपने शब्दों में खुद कहा:
“बस बहुत हो गया। मैं अब और ज़ोर नहीं लगा सकती।” यह उनके करियर के अंतिम अध्याय का संक्षिप्त लेकिन शक्तिशाली बयान है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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