विराट हिंदू सम्मेलन के माध्यम से मड़ावदा गांव में हिंदू एकता, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का भव्य संदेश दिया गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
विराट हिंदू सम्मेलन: मड़ावदा में हिंदू एकता और राष्ट्रभक्ति का ऐतिहासिक आयोजन
विराट हिंदू सम्मेलन के माध्यम से मड़ावदा मंडल के नेतृत्व में ग्राम मड़ावदा में जो दृश्य देखने को मिला, वह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण था। चारों ओर भगवा ध्वज, भारत माता के जयघोष और श्रीराम के नाम से वातावरण पूरी तरह राष्ट्रमय हो गया।
विराट हिंदू सम्मेलन की पृष्ठभूमि
नागदा–मड़ावदा मंडल की अगवानी में ग्राम बड़ौदा में ग्रामवासियों द्वारा विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन संयोजक श्री दिनेश नाहर ने बताया कि कई दिनों से गांव में हिंदुत्व और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण तैयार किया जा रहा था।
18 जनवरी की सुबह 10 बजे जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, पूरा गांव मानो उत्सव में बदल गया।
शुभारंभ: भारत माता की आरती
कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता की आरती और दीप प्रज्वलन से हुआ।
“भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के जयघोष से संपूर्ण वातावरण गूंज उठा।
मंच पर विराजमान रहे—
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संत श्री हर्षजी महाराज
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संघ के मुख्य वक्ता श्री बलराज भट्ट
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राष्ट्रीय परशुराम सेना युवा वाहिनी की नगर अध्यक्ष श्रीमती वर्षा मेहता
संत हर्षजी महाराज का ओजस्वी उद्बोधन
संत श्री हर्षजी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है।
उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कार और परिवार—तीनों मिलकर समाज को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल की दुनिया से निकलकर संस्कृति की ओर लौटें।
बलराज भट्ट का राष्ट्रभक्ति संदेश
संघ से पधारे श्री बलराज भट्ट ने विराट हिंदू सम्मेलन को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि हिंदू एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने संघ के विचार, राष्ट्रसेवा और समाज निर्माण के उदाहरणों से ग्रामीणों को प्रेरित किया।
वर्षा मेहता का “पाँच परिवर्तन” संदेश
महिला वक्ता श्रीमती वर्षा मेहता ने कहा कि समाज बदलने की शुरुआत घर से होती है।
उन्होंने “पाँच परिवर्तन” पर विस्तार से प्रकाश डाला—
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स्वदेशी अपनाना
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पर्यावरण संरक्षण
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सामाजिक समरसता
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नागरिक कर्तव्य
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कुटुंब प्रबंधन
ग्रामीण महिलाओं ने उनके विचारों को खूब सराहा।
ग्रामीणों की भागीदारी
विराट हिंदू सम्मेलन में गांव के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली।
बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—सब राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगे दिखे।
मातृशक्ति और युवाओं की भूमिका
मातृशक्ति ने कार्यक्रम में अनुशासन और व्यवस्था संभाली।
युवाओं ने स्वयंसेवक बनकर अतिथियों का स्वागत किया।
सहभोज और समापन
कार्यक्रम का समापन सहभोज के साथ हुआ।
लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया, जो सामाजिक समरसता का प्रतीक बना।
इस अवसर पर उपस्थित रहे—
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मंडल कोषाध्यक्ष श्री उमाशंकर पाटीदार
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मंडल पदाधिकारी
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ग्राम के गणमान्य नागरिक
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कार्यकर्ता, मातृशक्ति, युवा और बच्चे
सामाजिक प्रभाव और संदेश
विराट हिंदू सम्मेलन ने गांव में नई ऊर्जा भर दी।
लोगों ने संकल्प लिया कि वे—
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भारतीय संस्कृति अपनाएंगे
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परिवार को मजबूत बनाएंगे
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राष्ट्रहित को प्राथमिकता देंगे
निष्कर्ष
विराट हिंदू सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि चेतना का आंदोलन बन गया।
इसने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो राष्ट्र मजबूत बनता है।

