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Dhirendra Shastri Warns: वेद नहीं पढ़े तो बच्चे बनेंगे ‘जावेद-नावेद’

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Published On: 15 January 2026
Dhirendra Shastri Warns: Children Without Vedic Education May Become ‘Javed-Naved’
— Dhirendra Shastri Warns: Children Without Vedic Education May Become ‘Javed-Naved’

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वेद नहीं पढ़े तो बच्चे ‘जावेद-नावेद’ बन जाएंगे: Dhirendra Shastri का बड़ा बयान, बागेश्वर धाम में गुरुकुल खोलने की घोषणा

छतरपुर, मध्य प्रदेश – अपने बयानों और धार्मिक गतिविधियों के लिए चर्चित बागेश्वर धाम के महंत पंडित Dhirendra Shastri ने एक बार फिर हिंदुत्व और वेदों को लेकर बड़ा बयान दिया है। शास्त्री ने कहा कि जो लोग वेदों का अध्ययन नहीं करेंगे, उनके बच्चे भविष्य में ‘जावेद और नावेद’ जैसी पहचान वाले बन सकते हैं। उनका यह बयान सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से काफी चर्चा में रहा।

धीरेंद्र शास्त्री ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उनका उद्देश्य देशभर में गुरुकुल स्थापित करना है। इन गुरुकुलों में सनातनी बच्चों को वेदों की शिक्षा दी जाएगी और वेदों के ज्ञान के साथ ही संस्कार और नैतिक शिक्षा भी impart की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक चेतना के लिए वेदों की ओर लौटना अनिवार्य है।

बागेश्वर धाम में गुरुकुल की स्थापना

Dhirendra Shastri ने घोषणा की कि बागेश्वर धाम में गुरुकुल खोला जाएगा, जहां बच्चों को वेदों की विद्या के साथ-साथ यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शास्त्री का कहना है कि “भोजन एक दिन तक टिकता है, पानी एक घंटे तक टिकता है, लेकिन विद्या जीवनभर टिकती है।” यही कारण है कि वेदों की परंपरा को जीवित रखने के लिए गुरुकुल की स्थापना करना आवश्यक है।

महंत ने यह भी कहा कि गुरुकुल में न केवल पढ़ाई होगी बल्कि बच्चों को धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका मानना है कि वेदों का ज्ञान केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने और समाज में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

ऑनलाइन यज्ञ और सामूहिक हवन अभियान

Dhirendra Shastri ने आधुनिक तकनीक के जरिए वैदिक परंपरा को लोगों तक पहुँचाने के लिए ऑनलाइन यज्ञ और सामूहिक हवन अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि 4 जनवरी को करीब 3 लाख लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से एक साथ हवन में भाग लिया। यह कार्यक्रम उन घरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहां ब्राह्मण या यज्ञ विशेषज्ञ नहीं पहुंच पाते।

आगामी 12 फरवरी को रात 9 बजे फिर से सामूहिक ऑनलाइन हवन का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान घर-घर यज्ञ की परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। शास्त्री का कहना है कि डिजिटल माध्यम से वेदों और यज्ञ की परंपरा को जीवन में लाना संभव है और युवा पीढ़ी को इसका लाभ भी मिलेगा।

‘वेद और यज्ञ’ की ओर लौटना

महंत Dhirendra Shastri का प्रमुख उद्देश्य देश को पुनः यज्ञ और वेदों के गौरवशाली युग की ओर ले जाना है। उनका कहना है कि आज की पीढ़ी आधुनिकता और तकनीक के प्रभाव में रहकर अपनी संस्कृति और परंपरा से दूर होती जा रही है। इसलिए घर-घर वेदों और यज्ञ की परंपरा को पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।

शास्त्री ने जोर देकर कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक मूल्यों पर गर्व होना चाहिए। वेदों का ज्ञान बच्चों और युवाओं में नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और धर्म के प्रति सम्मान की भावना पैदा करता है। इसके साथ ही वेदों के माध्यम से जीवन को व्यवस्थित करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने की शिक्षा भी मिलती है।

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कन्या विवाह उत्सव में संतों का समागम

Dhirendra Shastri ने बागेश्वर धाम में आयोजित होने वाले कन्या विवाह उत्सव की भी जानकारी दी। इस वर्ष यह उत्सव विशेष रूप से तीन दिन तक आयोजित होगा। 13 फरवरी को मंडप और हल्दी की रस्में, 14 फरवरी को संगीत और मेहंदी, और 15 फरवरी को 300 बेटियों का कन्यादान होगा।

शास्त्री ने बताया कि उन बेटियों का विशेष ध्यान रखा जाएगा जिनके माता-पिता नहीं हैं। उनका विवाह बागेश्वर धाम द्वारा कराया जाएगा ताकि उन्हें धर्मज माता-पिता मिल सकें। यह पहल समाज में धर्म और नैतिकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्ग के लिए भी सहारा बनती है।

सांस्कृतिक और धार्मिक शिक्षा पर जोर

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बच्चों को धर्म, संस्कार, वेदों की शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी सिखाई जाएगी। उनका मानना है कि वेदों का ज्ञान बच्चों के चरित्र निर्माण, निर्णय क्षमता और जीवन के नैतिक मार्गदर्शन में सहायक होगा।

महंत ने यह भी कहा कि बागेश्वर धाम में गुरुकुल खोलने का उद्देश्य न केवल बच्चों को वेदों की विद्या देना है, बल्कि उन्हें देश और समाज के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जुड़ सकेगी।

भविष्य की योजनाएं

Dhirendra Shastri ने भविष्य की योजनाओं के बारे में भी बताया। उनका उद्देश्य पूरे देश में ‘घर-घर यज्ञ’ अभियान शुरू करना है। इसके तहत हर घर में ऑनलाइन माध्यम से यज्ञ और हवन आयोजित किए जाएंगे। इससे देश में वेदों और यज्ञ की परंपरा को जीवित रखने में मदद मिलेगी।

शास्त्री का कहना है कि इस पहल से केवल धार्मिक जागरूकता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी विकास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

निष्कर्ष:

महंत पंडित Dhirendra Shastri का यह बयान और उनके द्वारा बागेश्वर धाम में गुरुकुल खोलने की योजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा के प्रसार का एक बड़ा कदम है। उनके प्रयास से युवा पीढ़ी वेदों और यज्ञ की परंपरा से जुड़कर अपनी संस्कृति और विरासत को समझ सकेगी।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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