—Advertisement—

,

Ujjain Mahakal भस्म आरती में भगवान महाकाल का तिल और तेल से विशेष स्नान, श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई मकर संक्रांति

Author Picture
Published On: 15 January 2026
Ujjain Mahakal
— Ujjain Mahakal: भस्म आरती में तिल और तेल से हुआ भगवान महाकाल का विशेष स्नान, श्रद्धा के साथ मनाई गई मकर संक्रांति

—Advertisement—

Ujjain Mahakal भस्म आरती में भगवान महाकाल का तिल और तेल से विशेष स्नान, श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई मकर संक्रांति

Ujjain Mahakal Makar Sankranti 2026: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। तड़के सुबह होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल को तिल और तिल के तेल से विशेष स्नान कराया गया। इसके बाद तिल्ली के लड्डू, शक्कर से बने पकवान और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।

Ujjain में किसी भी बड़े धार्मिक पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से ही होती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मकर संक्रांति पर्व पर भी सबसे पहले भगवान महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना की गई। भस्म आरती में तिल के उबटन और तेल से किए गए स्नान को विशेष पुण्यदायी माना जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

सूर्य के मकर प्रवेश के साथ बना पर्व काल

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर हुआ था। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में यह मान्यता है कि यदि सूर्य की संक्रांति दोपहर या अपराह्न काल में होती है, तो उसका पर्व अगले दिन मनाया जाता है। इसी कारण मकर संक्रांति का पर्व उज्जैन में 15 जनवरी को मनाया गया।

महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति को सनातन परंपरा में ‘स्नान पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तिल को शुद्धता, स्वास्थ्य और पुण्य का प्रतीक माना गया है। इसी कारण भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को तिल के उबटन से स्नान कराया गया।

Ujjain Mahakal
Ujjain Mahakal भस्म आरती में तिल-तेल से हुआ विशेष अभिषेक

Ujjain भस्म आरती में हुआ विशेष अनुष्ठान

मकर संक्रांति के अवसर पर तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सबसे पहले भगवान महाकाल का पंचामृत स्नान कराया गया, इसके बाद तिल और तिल के तेल से अभिषेक किया गया। मान्यता है कि इस स्नान से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आरोग्य, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को शक्कर से बने तिल के लड्डू, तिल्ली के पकवान, खिचड़ी और मौसमी फलों का महाभोग अर्पित किया गया। साथ ही जलाधारी में भी तिल, पतंग और अन्य प्रतीकात्मक वस्तुएं अर्पित की गईं, जो मकर संक्रांति के पारंपरिक प्रतीक माने जाते हैं।

सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग का महासंयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों में मनाया गया। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ-साथ सर्वार्थसिद्धि योग और अमृतसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बना, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे योग में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना फलदायी होती है।

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा का प्रतीक है। इसे प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता की शुरुआत माना जाता है। इसी कारण इस दिन दान-पुण्य, स्नान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

श्रद्धालुओं ने शिप्रा में किया स्नान, फिर किए महाकाल दर्शन

मकर संक्रांति के अवसर पर Ujjain में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही श्रद्धालु शिप्रा नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान करते नजर आए। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने तिल, अन्न, वस्त्र और पात्रों का दान किया और फिर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे।

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन शिप्रा में स्नान करने और बाबा महाकाल के दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु Ujjain पहुंचे।

दान-पुण्य की रही विशेष परंपरा

संक्रांति पर्व पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन चावल, हरी मूंग की दाल से बनी खिचड़ी, तिल, गुड़, वस्त्र और पात्रों का दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

महाकाल मंदिर परिसर और शिप्रा घाटों पर कई श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा प्रदान की। सामाजिक संगठनों द्वारा भी जगह-जगह भंडारे और सेवा कार्य आयोजित किए गए।

मंदिर प्रशासन की विशेष व्यवस्था

मकर संक्रांति पर्व को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कतारबद्ध दर्शन प्रणाली अपनाई गई।

भस्म आरती और दिनभर होने वाली पूजाओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में अनुशासन और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी गई।

Ujjain की परंपरा में मकर संक्रांति का विशेष स्थान

Ujjain में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का उत्सव है। प्राचीन काल से ही Ujjain सूर्य उपासना और ज्योतिष का प्रमुख केंद्र रहा है। महाकालेश्वर मंदिर में इस दिन होने वाली पूजा-अर्चना को विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि मकर संक्रांति पर बाबा महाकाल के दर्शन से जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। इसी विश्वास के साथ हजारों भक्तों ने इस पावन पर्व पर भगवान महाकाल के चरणों में शीश नवाया।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति 2026 का पर्व Ujjain में धार्मिक आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय मान्यताओं का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। तिल और तेल से हुए विशेष स्नान, भव्य भस्म आरती, दान-पुण्य और शिप्रा स्नान के साथ यह पर्व पूरी भक्ति और श्रद्धा से मनाया गया। बाबा महाकाल के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp