Bhopal स्लॉटर हाउस विवाद: गौ मांस मामला गरमाया, कांग्रेस–बीजेपी पार्षद आमने-सामने
राजधानी Bhopal में नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गौ मांस काटे जाने का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। नगर निगम प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, और पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चों पर हलचल पैदा कर दी है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस में गौ मांस काटा गया, जिससे शहर में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
Bhopal में ट्रक से पकड़ा गया 26 टन मांस
बीते 17 दिसंबर को बजरंग दल ने Bhopal पुलिस मुख्यालय के सामने 26 टन मांस के पैकेट से भरे एक ट्रक को पकड़ा था। इसके बाद संगठन ने गौ मांस की तस्करी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। Bhopal पुलिस ने सभी पैकेटों के सैंपल जांच के लिए भेजे, जिसमें पैकेटों में गौ मांस पाया गया। इस खुलासे के बाद Bhopal में हिंदू संगठनों का गुस्सा भड़क गया और नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। पुलिस ने स्लॉटर हाउस को सील कर दिया और सुरक्षा के लिए भारी संख्या में जवान तैनात किए। वहीं, स्लॉटर हाउस के ठेकेदार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया। स्थानीय हिंदू संगठनों ने मांग की कि गौ हत्या और मांस तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाए। मां भवानी हिंदू संगठन ने बाणगंगा चौराहे पर प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ किया और गौ संरक्षण की मांग के लिए जोरदार विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहे ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तुरंत कदम उठाए। नगर निगम Bhopal में ड्यूटी पर तैनात वेटरनरी डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर को हटाने के आदेश दिए गए। संभाग आयुक्त ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। आरोप है कि डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर ने स्लॉटर हाउस में काटे गए गौ मांस को भैंस का मांस बताकर इसके उपयोग की अवैध रूप से अनुमति दे दी थी। डॉक्टर ने अपने पत्र में लिखा था कि वध से पहले और बाद में निरीक्षण किया गया और मांस मानव उपयोग के लिए फिट पाया गया। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि गौ मांस काटने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निगम परिषद की बैठक में हंगामा
इस पूरे मामले का असर Bhopal नगर निगम परिषद की बैठक में भी देखने को मिला। बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और बीजेपी के पार्षद आमने-सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। दोनों दलों के पार्षदों ने गौ मांस काटने वालों और उनके जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। हंगामा बढ़ने पर सदन कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। जब बैठक दोबारा शुरू हुई तो फिर से हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि Bhopal नगर निगम ने स्लॉटर हाउस बनवाया और यदि वहां गायों को काटा गया है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम की है। उन्होंने मेयर और उनकी एमआईसी को इस्तीफा देने की मांग की। बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षदों ने हंगामे के दौरान “फांसी दो, फांसी दो” के नारे लगाए।
पार्षदों के भावुक पल
बैठक के दौरान बीजेपी पार्षद देवेंद्र भार्गव भावुक हो गए। वे कपड़ों पर कागज चिपकाकर आए थे और गौ हत्या के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने विस्तार न्यूज से बातचीत में फूट-फूट कर रोते हुए कहा कि अगर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आधे घंटे में इस्तीफा दे देंगे। पार्षद ने कहा कि गौ हत्या देखना उनके लिए बेहद दुखदायी है और उन्हें लगता है कि उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही है।
विरोध प्रदर्शन और सामाजिक प्रतिक्रिया
Bhopal में हिंदू संगठनों और नागरिक समाज के विभिन्न समूह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस में गौ मांस काटने की घटना गंभीर उल्लंघन है और इसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जुलूस निकाले और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए जनजागरण अभियान चलाया। विशेषज्ञों और समाजसेवियों का कहना है कि गौ संरक्षण संवैधानिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, और नगर निगम जैसे सार्वजनिक संस्थान में ऐसी घटनाएँ समाज में आक्रोश पैदा करती हैं। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी प्रणाली लागू की जाए।
सरकार की उच्च स्तरीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। जांच के दौरान स्लॉटर हाउस के संचालन, अधिकारियों की जवाबदेही, और मांस की जांच प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और कानूनी कदम उठाने की संभावना है।
