श्रद्धा का महासंगम: परमरस Muniraj Shri की पावन विहार यात्रा शुरू, क्षेत्र में धर्मोत्सव का वातावरण
त्रिस्तुतिक जैन समुदाय के युगप्रभावक, पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराज के शिष्यरत्न, परमरस मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. की मन्दसौर से आलोट की ओर मंगलमय विहार यात्रा का आज भव्य और श्रद्धामय शुभारंभ हुआ। यह पावन विहार प्रातःकाल ठीक 6 बजे अजीतनाथ जिनालय, मन्दसौर से जैन समाज के श्रद्धालुओं की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ, जहाँ वातावरण पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया। प्रातःकाल से ही अजीतनाथ जिनालय परिसर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया था। समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित होकर Muniraj Shri के दर्शन-वंदन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे। मंगलाचरण, जिनवाणी पाठ और जयघोष के बीच जैसे ही Muniraj Shri ने विहार प्रारंभ किया, संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो उठा। भक्तों ने हाथ जोड़कर, भावभीनी आँखों से अपने आराध्य को विदाई दी और मंगल यात्रा की कामना की।
चिनमोलिया में होगा पावन पदार्पण
कार्यक्रम के अनुसार, Muniraj Shri का 13 जनवरी को प्रातःकाल विहार कर चिनमोलिया में पावन पदार्पण प्रस्तावित है। वहाँ स्थानीय जैन समाज द्वारा स्वागत एवं दर्शन-वंदन की व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर समाजजनों को मुनिराज श्री के प्रवचन एवं आशीर्वचन सुनने का भी लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्र में धर्मभावना और अधिक प्रबल होगी।

सीतामऊ जहाज मंदिर में मंगल आगमन
चिनमोलिया के पश्चात Muniraj Shri का अगला पड़ाव सीतामऊ स्थित प्रसिद्ध जहाज मंदिर रहेगा। कल यहाँ मुनिराज श्री का मंगल आगमन प्रस्तावित है। जहाज मंदिर में दर्शन-वंदन एवं धर्मलाभ के लिए समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे और जिनभक्ति के साथ Muniraj Shri के सान्निध्य का लाभ लेंगे।
आलोट की ओर अग्रसर रहेगा विहार क्रम
सीतामऊ के पश्चात Muniraj Shri का विहार क्रम आलोट की दिशा में अग्रसर रहेगा। इस पूरे विहार मार्ग में विभिन्न ग्रामों और नगरों में मुनिराज श्री के पावन चरण पड़ेंगे, जिससे क्षेत्र के जैन समाज सहित सर्वसमाज में आध्यात्मिक जागरण का वातावरण निर्मित होगा। यह विहार यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों के प्रचार का भी सशक्त माध्यम बन रही है।
भावपूर्वक विहार सेवा का लाभ
आज इस पावन विहार यात्रा में मन्दसौर से अनेक समाजसेवियों एवं श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक विहार सेवा का लाभ लिया। इनमें प्रमुख रूप से यश बाफना, कमलेश सालेचा, धवल चपरोत, अंकुश साग्रावत, महावीर मारू, रिद्धम नाहटा एवं जितेन्द्र लोढ़ा शामिल रहे। इन सभी ने सेवा, संयम और श्रद्धा के भाव से Muniraj Shri के विहार में सहभागिता निभाई और स्वयं को धन्य माना। सेवाभावी श्रद्धालुओं का कहना था कि संतों की विहार सेवा का अवसर जीवन में दुर्लभ होता है और यह आत्मिक शुद्धि तथा पुण्य संचय का श्रेष्ठ साधन है। Muniraj Shri की सेवा करते हुए सभी के चेहरों पर विशेष आनंद और संतोष का भाव झलक रहा था।
धर्मभावना के विस्तार का सशक्त माध्यम
परमरस Muniraj Shri की यह मंगलमय विहार यात्रा क्षेत्र में धर्मभावना के विस्तार और आत्मिक जागरण का सशक्त माध्यम बन रही है। मुनिराज श्री अपने प्रवचनों एवं आचरण के माध्यम से अहिंसा, संयम, तप और आत्मकल्याण का संदेश समाज तक पहुँचा रहे हैं। उनके सान्निध्य से न केवल जैन समाज, बल्कि अन्य समुदायों में भी आध्यात्मिक चेतना का संचार हो रहा है। जैन समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि ऐसे विहार कार्यक्रमों से युवाओं में संस्कारों का विकास होता है और धर्म के प्रति आस्था और मजबूत होती है। यह यात्रा समाज को सही दिशा देने और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
श्रद्धा, सेवा और समर्पण का संगम
मन्दसौर से आलोट तक की यह विहार यात्रा श्रद्धा, सेवा और समर्पण का सुंदर संगम बनकर उभर रही है। हर पड़ाव पर समाजजनों द्वारा स्वागत, सेवा और दर्शन-वंदन की तैयारियाँ की जा रही हैं। Muniraj Shri के पावन चरणों की रज से क्षेत्र धन्य हो रहा है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
