MP कांग्रेस में ‘एक सीट–कई दावेदार’, राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज
MP की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी में यह हलचल उस समय और बढ़ गई, जब वरिष्ठ नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने में अब कुछ ही समय शेष रह गया है। दिलचस्प बात यह है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले ही कांग्रेस में संभावित दावेदारों की लंबी कतार लग गई है, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है दिग्विजय सिंह का कार्यकाल
Congress के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। वे अब तक दो बार मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। हालांकि, इस बार उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं और प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं।
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि कांग्रेस को मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए नया चेहरा चुनना होगा। इसी कारण पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों की चर्चा तेज हो गई है।
Congress के पास एक, बीजेपी के पास दो सीटें
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो मध्य प्रदेश से राज्यसभा की कुल तीन सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से एक सीट कांग्रेस के पास है, जबकि दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पलड़ा भारी माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह एकमात्र सीट बेहद अहम हो जाती है।
इसी वजह से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस सीट को पाने के लिए पूरी ताकत झोंकते नजर आ रहे हैं। भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बैठकों और रणनीति चर्चाओं का दौर जारी है।
इन नेताओं के नाम सबसे आगे
Congress के जिन नेताओं के नाम राज्यसभा की दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें कई बड़े और अनुभवी चेहरे शामिल हैं:
- कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं
- जीतू पटवारी – वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, संगठन में मजबूत पकड़
- कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री और आदिवासी चेहरे के रूप में पहचान
- मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद और संगठनात्मक अनुभव वाली नेता
- अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री और मजबूत ओबीसी नेता
इन सभी नामों को लेकर कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में गंभीर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखकर फैसला करेगा।
अनुसूचित जाति वर्ग से उम्मीदवार की मांग तेज
राज्यसभा सीट को लेकर Congress में अब सामाजिक संतुलन की मांग भी उठने लगी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इस बार राज्यसभा के लिए अनुसूचित जाति वर्ग से उम्मीदवार को मौका दिया जाए।
इस मांग के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि प्रदेश में दलित मतदाता कांग्रेस का मजबूत आधार रहे हैं, लेकिन उन्हें उच्च सदन में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। ऐसे में राज्यसभा सीट के जरिए इस वर्ग को प्रतिनिधित्व देना राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से अहम हो सकता है।
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दिग्विजय सिंह का पुराना बयान फिर चर्चा में
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने यह बयान दिया था कि अगर दलित वर्ग से मुख्यमंत्री बनता है, तो उन्हें बेहद खुशी होगी। उनके इस बयान के बाद अनुसूचित जाति वर्ग से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की मांग को और बल मिला है।
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दलित वर्ग से कौन-कौन से नेता इस रेस में औपचारिक रूप से सामने आएंगे।
Congress ने खींचतान के आरोपों को नकारा
राज्यसभा टिकट को लेकर कांग्रेस में कथित गुटबाजी और खींचतान के आरोपों पर पार्टी के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में किसी तरह की अंदरूनी लड़ाई नहीं है और यह पूरी तरह से अफवाह है।
उनका कहना है कि राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान द्वारा लिया जाएगा और सभी नेता पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे।
बीजेपी का कांग्रेस पर हमला
वहीं, भाजपा ने इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस आज भी गुटों और खेमों में बंटी हुई है और एक सीट के लिए कई नेता आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस की यही आंतरिक कलह उसकी कमजोरी है और इसी वजह से पार्टी निर्णायक फैसले लेने में असमर्थ रहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार संजीव आचार्य का मानना है कि कांग्रेस की स्थिति इस समय “एक अनार, सौ बीमार” जैसी हो गई है। उनके अनुसार, राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए कई दावेदारों का सामने आना इस बात का संकेत है कि पार्टी में महत्वाकांक्षा चरम पर है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस समय रहते संतुलित फैसला नहीं लेती, तो इसका असर पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में और तेज होगी सियासत
कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की समाप्ति नजदीक आते ही MP Congress में राज्यसभा को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। टिकट किसे मिलेगा, यह तो पार्टी आलाकमान तय करेगा, लेकिन इतना साफ है कि यह फैसला कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नेतृत्व संतुलन के लिहाज से बेहद अहम साबित होने वाला है।
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की पूरी संभावना है।

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