MP में 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के मौके पर जेलों से कैदियों की समय-पूर्व रिहाई को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने इस बार केवल उन बंदियों को लाभ देने का निर्णय किया है जिन्होंने अपने जेल जीवन के दौरान अच्छे आचरण का प्रदर्शन किया है और जिनकी पात्रता जेल मैनुअल के अनुसार सुनिश्चित की गई है।
जेल विभाग ने कुल 481 प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा की थी, जिनमें विभिन्न जेलों से रिहाई के लिए भेजे गए बंदियों के नाम शामिल थे। इन प्रस्तावों की जांच के दौरान यह पाया गया कि अधिकांश कैदी अपने व्यवहार या अन्य कानूनी कारणों से समय-पूर्व रिहाई के योग्य नहीं हैं। परिणामस्वरूप, 394 बंदियों के रिहाई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इसका मतलब यह है कि केवल 87 कैदी ही इस बार 26 जनवरी को समय-पूर्व रिहा होंगे। इन 87 कैदियों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं, जो आजीवन कारावास की सजा भुगत रही हैं।
अच्छे आचरण और पात्रता के आधार पर निर्णय
जेल विभाग के अनुसार, जिन बंदियों को रिहाई का लाभ मिलेगा, उन्होंने अपने कैद जीवन में अनुशासन और शिष्टाचार बनाए रखा है। उनके व्यवहार और जेल गतिविधियों के रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की गई। जेल विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि केवल वही बंदी समय-पूर्व रिहा हों, जो समाज में लौटकर पुनर्वास के लिए तैयार हैं और जिन्होंने अपने अपराध की गंभीरता को समझते हुए जेल नियमों का पालन किया।
जेल विभाग ने यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की संबंधित धाराओं के तहत लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन कैदियों की अपील उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, उन्हें फिलहाल रिहाई नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, जिन बंदियों ने जुर्माना राशि जमा नहीं की है, उन्हें रिहाई के बाद भी जुर्माने की सजा पूरी होने तक जेल में रहना होगा।
महिला बंदियों को विशेष रियायत
इस सूची में 7 महिला बंदियों का भी नाम शामिल है, जो आजीवन कारावास की सजा काट रही हैं। इन महिलाओं को विशेष शर्तों के साथ रिहाई का लाभ मिलेगा। महिला बंदियों की रिहाई में सुरक्षा और सामाजिक पुनर्वास की योजनाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि रिहा होने वाली महिला बंदियों को समाज में सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से लौटाया जाए।
सर्कलवार रिहाई का विवरण
रिहाई के आंकड़ों को सर्कलवार देखें तो भोपाल सर्कल से सबसे ज्यादा 11 बंदियों को रिहाई मिली है। रीवा सर्कल से 10, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और इंदौर से 9-9 बंदियों को आजादी मिलेगी। नरसिंहपुर और बड़वानी सर्कल से 6-6, उज्जैन से 5 और नर्मदापुरम से 3 बंदियों को रिहा किया जाएगा। अलीराजपुर जिला जेल से एक और इंदौर की खुली जेल से दो बंदियों को आजादी मिल रही है।
जेल विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं अपराधियों को लाभ दिया गया है जिन्होंने अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा गरिमापूर्ण तरीके से पूरा किया है और जो अब समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं। विभाग के अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह कदम कैदियों में अनुशासन और अच्छे आचरण को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
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पूर्व वर्षों के रिहाई पैटर्न से तुलना
पिछले वर्षों में भी मध्य प्रदेश सरकार ने गणतंत्र दिवस पर समय-पूर्व रिहाई का प्रावधान रखा है। लेकिन इस बार जेल विभाग ने प्रस्तावों की समीक्षा में और अधिक कड़ाई बरती है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि केवल योग्य और तैयार बंदियों को ही लाभ मिले। इससे जेल प्रशासन में अनुशासन बनाए रखने और कैदियों के सुधार की दिशा में प्रयासों को मजबूती मिली है।
समाज और परिवार पर प्रभाव
समय-पूर्व रिहाई से न केवल कैदियों को लाभ मिलता है, बल्कि उनके परिवार और समाज पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 26 जनवरी के अवसर पर रिहाई से परिवार में खुशी का माहौल बनता है और रिहा होने वाले बंदी समाज में लौटकर नया जीवन शुरू कर सकते हैं। जेल विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि रिहाई के बाद कैदियों का सामाजिक पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और समाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय किया जाए।
कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया
जेल विभाग ने रिहाई की प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी बनाया है। सभी प्रस्तावों की समीक्षा में कैदियों के व्यवहार, जेल गतिविधियों में भागीदारी, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति, और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा गया। विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अपात्र व्यक्ति समय-पूर्व रिहाई का लाभ न ले सके।
अंतिम निष्कर्ष
इस बार 26 जनवरी को कुल 87 कैदियों को रिहाई का लाभ मिलेगा, जिसमें 7 महिला आजीवन कारावास बंदी भी शामिल हैं। यह निर्णय उनके अच्छे आचरण, जेल मैनुअल की पात्रता और समाज में पुनर्वास की क्षमता के आधार पर लिया गया है। इस कदम से जेल प्रशासन में अनुशासन और सुधार की दिशा में सकारात्मक संदेश गया है।
राज्य सरकार और जेल विभाग का यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि कानून और अनुशासन के साथ-साथ मानवतावादी दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण है। इससे यह भी संदेश जाता है कि सुधार योग्य कैदियों को समय-पूर्व रिहाई का अवसर देना चाहिए, ताकि वे समाज में लौटकर नया जीवन शुरू कर सकें और अपने परिवार के साथ मिलकर सकारात्मक योगदान दें।

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