DGMO से सख्ती से हुई बात, LoC पर पाकिस्तानी ड्रोन पर सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी की कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) LoC के पास पाकिस्तान द्वारा भेजे गए ड्रोन को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। सेना प्रमुख ने बताया कि इस मामले पर डीजीएमओ (डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) स्तर पर बातचीत हुई और पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी प्रकार की निगरानी या सीमा उल्लंघन की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ड्रोन के उपयोग और निगरानी क्षमताओं को और विकसित कर रही है।
पिछले कुछ हफ्तों में एलओसी पर पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियों में इज़ाफ़ा देखा गया। LoC पर इन ड्रोन की मौजूदगी ने भारतीय सेना को सतर्क कर दिया है। सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए ड्रोन छोटे आकार के हैं और मुख्य रूप से निगरानी करने और डिफेंस से संबंधित खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना एलओसी पर किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।
DGMO स्तर पर बातचीत और सख्ती
सेना प्रमुख ने कहा कि LoC पर ड्रोन की गतिविधियों के मामले में डीजीएमओ स्तर पर पाकिस्तानी अधिकारियों से बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान पाकिस्तानी पक्ष को साफ संदेश दिया गया कि सीमा पर किसी भी प्रकार की निगरानी गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज की डीजीएमओ बैठक में हमने इसे लेकर कड़ी चेतावनी दी। LoC पर हमारी तैनाती ऐसी है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत आगे की कार्रवाई की जा सके। इस संबंध में पूरी सतर्कता और तैयारियों को ध्यान में रखा गया है।”
सेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि डीजीएमओ स्तर की इस बातचीत में न्यूक्लियर हथियारों या किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन पर कोई चर्चा नहीं हुई। केवल एलओसी पर ड्रोन गतिविधियों और उनकी निगरानी को लेकर ही यह बैठक आयोजित की गई थी। इससे यह संदेश जाता है कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है और किसी भी अप्रत्याशित गतिविधि का तुरंत जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ऑपरेशन सिंदूर और तैयारियों का अनुभव
सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान सूचना प्रबंधन और क्रेडिबिलिटी पर विशेष ध्यान दिया गया। ऑपरेशन के दौरान पश्चिमी मोर्चे (Western Front) के सभी हैंडल बंद कर दिए गए थे और केवल सेना के एक नियंत्रित हैंडल के माध्यम से ही सूचना साझा की गई। यह कदम ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की जानकारी में अंतर या भ्रम पैदा होने से रोकने के लिए उठाया गया था।
इस अनुभव ने भारतीय सेना को सिखाया कि सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित घटना का सामना करने के लिए सभी उपकरण और तकनीकी साधन पूरी तरह से तैयार होने चाहिए। उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने सेना को यह भी सिखाया कि सूचना साझा करते समय क्रेडिबिलिटी और सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है।
ड्रोन क्षमता में सुधार और आत्मनिर्भरता
सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि भारतीय सेना ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल में लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारी शक्तिबाण रेजिमेंट की ड्रोन रेंज पहले 100 से 400 किलोमीटर थी, जिसे भविष्य में 700 से 1000 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, भारतीय सेना की हर कमांड के पास लगभग 500 ड्रोन बनाने की क्षमता है। हमने आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया की जा सके।”
ड्रोन तकनीक में यह सुधार न केवल एलओसी पर निगरानी बढ़ाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर रणनीतिक और टैक्टिकल उद्देश्यों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ड्रोन के इस्तेमाल की योजना पहले भी बना रही थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी कार्यवाही और तेज कर दी गई।
पाकिस्तानी ड्रोन और सीमा पर भारतीय सतर्कता
एलओसी पर पाकिस्तानी ड्रोन की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि पड़ोसी देश लगातार निगरानी गतिविधियों में जुटा हुआ है। हालांकि, भारतीय सेना ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है। सेना प्रमुख ने कहा कि LoC पर हमारी तैनाती इस प्रकार है कि किसी भी ड्रोन या विदेशी गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सके और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
यह नीति न केवल सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर है और किसी भी प्रकार की निगरानी या घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं करेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण
उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ड्रोन तकनीक में निवेश और सतर्कता बढ़ाने का उद्देश्य केवल LoC पर निगरानी नहीं है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना तकनीकी और रणनीतिक रूप से सशक्त हो रही है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति का सामना कर सके।
भारतीय सेना की तैयारी से यह स्पष्ट होता है कि सीमा पर किसी भी प्रकार की गतिविधि का तुरंत जवाब दिया जाएगा। इसके अलावा, यह संदेश भी जाता है कि भारत अपनी सीमाओं और नागरिक सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
भविष्य की योजना और सतर्कता
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना ड्रोन के इस्तेमाल को और व्यापक बनाने की योजना बना रही है। इससे न केवल सीमा निगरानी बेहतर होगी, बल्कि किसी भी अप्रत्याशित खतरे का त्वरित समाधान भी संभव होगा। भारतीय सेना हर स्थिति में तैयार है और इसकी तकनीकी और रणनीतिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।
डीजीएमओ स्तर की बातचीत और पाकिस्तानी ड्रोन पर चेतावनी यह सुनिश्चित करती है कि भारतीय सेना किसी भी सीमा उल्लंघन या निगरानी गतिविधि का तुरंत जवाब देने में सक्षम है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
निष्कर्ष
एलओसी पर ड्रोन गतिविधियों के मद्देनजर उपेंद्र द्विवेदी द्वारा जारी चेतावनी, भारतीय सेना की तत्परता और सशक्तिकरण को दर्शाती है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव और शक्तिबाण रेजिमेंट की उन्नत ड्रोन क्षमता से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना किसी भी सीमा चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ड्रोन तकनीक, सतर्कता और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि भारतीय सेना किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति का तुरंत मुकाबला कर सकती है। डीजीएमओ स्तर पर हुई कड़ी बातचीत से यह संदेश पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से दिया गया है कि भारत अपनी सीमाओं पर किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
