Indore BRTS कॉरिडोर में नया मोड़
Indore: शहर के BRTS (बेस्ड रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम) कॉरिडोर प्रोजेक्ट में एक नया विवाद उभरा है। नगर निगम द्वारा नियुक्त एक कबाड़ी ठेकेदार पर आरोप है कि उसने लगभग 10 लाख रुपये की रेलिंग बेच दी। इस घटना ने परियोजना की गंभीरता और प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बाकी बची रेलिंग, बीम और अन्य सामग्री को जब्त कर लिया है। इन सामग्रियों को ट्रेचिंग ग्राउंड और आजाद नगर जीटीएस में सुरक्षित रखा गया है। इस कदम के बाद कॉरिडोर पर जारी तोड़फोड़ का काम पूरी तरह रोक दिया गया है।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है। न्यायालय ने:
- संबंधित कबाड़ी ठेकेदार को तलब किया है।
- लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को बुलाया गया है, जो कॉरिडोर निर्माण का कार्य देख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की कोई ठोस योजना अभी तक तैयार नहीं हुई है।
- ड्राइंग और डिजाइन पर स्पष्टता नहीं है।
- मार्ग और रूटिंग के बारे में कोई निर्णायक निर्णय नहीं हुआ है।
इससे परियोजना की जटिलता और बढ़ गई है और भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
कबाड़ी ठेकेदार ने काम से किया इनकार
घटना के बाद, कबाड़ी ठेकेदार ने खुद को इस मामले में ठगा हुआ बताया।
- उसने नगर निगम को लिखित में सूचित किया कि वह आगे काम नहीं कर सकता।
- ठेकेदार के पीछे हटने से निगम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
इसके परिणामस्वरूप, एलिवेटेड कॉरिडोर की अनिश्चितता और बढ़ गई है। इससे डिवाइडर निर्माण का काम भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
BRTS कॉरिडोर पर परियोजना की स्थिति
बीआरटीएस कॉरिडोर परियोजना शहर में यातायात सुधार और रैपिड ट्रांज़िट सुविधा प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन इस विवाद ने परियोजना की प्रगति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
- तोड़फोड़ का काम ठप पड़ा हुआ है।
- एलिवेटेड कॉरिडोर की योजनाओं में देरी।
- निर्माण सामग्री की सुरक्षा और उपयोग पर सवाल।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला शहर की प्रमुख योजना के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है।
प्रशासन और न्यायालय की भूमिका
नगर निगम ने घटना के तुरंत बाद:
- रेलिंग और अन्य सामग्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
- ठेकेदार से संपर्क कर मामले की जांच शुरू की।
हाईकोर्ट ने भी आदेश दिया है कि मामले में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय की जाए।
- PWD अधिकारियों को मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- ठेकेदार और अन्य संबंधित पक्षों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
परियोजना की जटिलताएँ
BRTS कॉरिडोर का काम पहले से ही तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है।
- निर्माण के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी।
- एलिवेटेड कॉरिडोर का डिज़ाइन और मार्ग निर्धारण नहीं।
- ठेकेदार का पीछे हटना और सामग्री का नुकसान।
इन कारणों से परियोजना की समयबद्धता और कार्यान्वयन पर असर पड़ा है।
भविष्य के विकल्प
नगर निगम और PWD को अब परियोजना को स्थिर और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे।
- नए ठेकेदार का चयन।
- एलिवेटेड कॉरिडोर की डिज़ाइन और ड्राइंग में स्पष्टता।
- सुरक्षा और सामग्री प्रबंधन के लिए कड़े नियम।
यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला शहर की यातायात सुविधा और विकास योजनाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
निष्कर्ष
Indore BRTS कॉरिडोर विवाद:
- 10 लाख रुपये की रेलिंग की बिक्री ने परियोजना पर सवाल खड़े किए।
- हाईकोर्ट ने मामले में सख्त संज्ञान लिया।
- ठेकेदार के पीछे हटने से परियोजना की अनिश्चितता और बढ़ गई।
नगर निगम और प्रशासन को जल्दी और ठोस कदम उठाकर परियोजना को जारी रखना होगा, नहीं तो शहर के लिए यह योजना अनिश्चित काल के लिए ठप हो सकती है।

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