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Ujjain महाकाल मंदिर में ऑनलाइन दर्शन बंद, VHP-बजरंग दल ने प्रदर्शन किया

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Published On: 13 January 2026
Ujjain Mahakaleshwar Temple Controversy: Activists Demand Restoration of Devotee Facilities
— Ujjain Mahakaleshwar Temple Controversy: Activists Demand Restoration of Devotee Facilities

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Ujjain महाकाल मंदिर में ऑनलाइन दर्शन बंद, VHP-बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन

महाकालेश्वर मंदिर के फैसले पर विवाद

Ujjain: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 25 दिसंबर से बंद किए गए ऑनलाइन दर्शन और रात्रिकालीन आरती में प्रवेश के नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने मंदिर प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

रविवार को सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने नीलकंठ द्वार पर धरना देकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मंदिर प्रशासन भक्तों के लिए पहले जैसी सुविधाएं बहाल नहीं करता, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल को सौंपा।

विरोध का कारण

बजरंग दल के सह-संयोजक विक्की राठौड़ के अनुसार, पहले महाकाल मंदिर के गर्भगृह से यूट्यूब पर 24 घंटे सीधा प्रसारण होता था। इससे दुनिया भर के श्रद्धालु बाबा महाकाल की आरतियों और दर्शन का लाभ उठा पाते थे।

लेकिन 25 दिसंबर से इस लाइव प्रसारण को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, रात्रिकालीन शयन आरती के दौरान आम श्रद्धालुओं का प्रवेश रात 10 बजे की बजाय रात 9 बजे बंद कर दिया गया है।

स्थानीय और दूर-दराज के भक्तों में इस निर्णय को लेकर नाराजगी है। विशेषकर अवंतिका द्वार से स्थानीय लोगों का प्रवेश रोकना भी विवाद का एक बड़ा कारण बना।

विक्की राठौड़ ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल भक्तों के लिए सहज और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करना है। मंदिर में बंदिशों से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।”

मंदिर प्रशासन का पक्ष

मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ने बताया कि लाइव दर्शन की व्यवस्था तकनीकी कारणों से अस्थायी रूप से रोकी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि:

  • नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।
  • 1 जनवरी से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित दर्शन, आरती और फोटो-वीडियो उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • मंदिर परिसर में लगी LED स्क्रीन पर दर्शन की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल सुविधाओं में सुधार और तकनीकी स्थिरता के लिए उठाया गया है, और कोई भी भक्त दर्शन से वंचित नहीं रहेगा।

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जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल

इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।

  • महापौर मुकेश टटवाल ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उज्जैन निवासियों के लिए अवंतिका द्वार से प्रवेश की सुविधा पुनः शुरू करने की मांग की।
  • सांसद अनिल फिरोजिया ने सुझाव दिया कि गर्भगृह दर्शन के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए, ताकि भक्त व्यवस्थित रूप से दर्शन कर सकें।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और भक्तों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रदर्शन में क्या हुआ

रविवार को नीलकंठ द्वार पर:

  • सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने धरना दिया।
  • हनुमान चालीसा का संकल्पपूर्वक पाठ किया गया।
  • कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अधिक उग्र आंदोलन कर सकते हैं।

भक्तों की नाराजगी और सुझाव

स्थानीय और दूर-दराज के श्रद्धालु इस फैसले से परेशान हैं।

  • रात्रिकालीन आरती में देर रात तक दर्शन न कर पाने से उनकी पूजा-अर्चना प्रभावित हो रही है।
  • ऑनलाइन दर्शन बंद होने के कारण विदेश और अन्य राज्यों के भक्तों को महाकाल की आरती देखने में कठिनाई हो रही है।

भक्तों का सुझाव है कि मंदिर में:

  • लाइव प्रसारण जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
  • रात्रिकालीन आरती के समय में कुछ लचीलापन हो।
  • अवंतिका द्वार से स्थानीय भक्तों को प्रवेश की सुविधा नियमित हो।
महाकाल मंदिर: धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन का प्रमुख धार्मिक स्थल है।

  • यह मंदिर हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
  • देश और विदेश के लाखों श्रद्धालु सालभर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं।
  • ऑनलाइन दर्शन और लाइव आरती ने पहले से ही भक्तों को सुविधा प्रदान की थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महाकाल मंदिर की महिमा बढ़ी।

मंदिर प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच संतुलन बनाए रखना भक्तों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष: संतुलन जरूरी

मंदिर प्रशासन का कहना है कि ऑनलाइन दर्शन और लाइव प्रसारण जल्द ही बहाल कर दिया जाएगा।

  • तकनीकी सुधार और नई कंपनी का चयन समय ले सकता है।
  • जनप्रतिनिधियों और संगठनों के साथ संवाद से भक्तों की नाराजगी को कम किया जा सकता है।

वहीं, VHP और बजरंग दल का कहना है कि अगर भक्तों के लिए पहले जैसी सुविधाएं नहीं दी गईं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए तैयार हैं।

यह मामला धार्मिक, सांस्कृतिक और तकनीकी व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती पेश करता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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