म्यूल अकाउंट्स का जाल: मप्र Cyber पुलिस की बड़ी कार्रवाई 3,000 खातों को पहले चरण में किया ब्लॉक
मध्य प्रदेश Cyber पुलिस ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। राज्य में साइबर ठगी और फ्रॉड के मामलों में शामिल होने वाले 3.60 लाख म्यूल अकाउंट्स को लेकर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इन खातों को पुलिस ने वर्चुअल वांटेड नाम दिया है, क्योंकि इनके मालिकों या असली उपयोगकर्ताओं की वास्तविक पहचान अब तक सामने नहीं आ सकी है। केवल ऑनलाइन डेटा के आधार पर इन खातों की जानकारी उपलब्ध हो पाई है। इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल आमतौर पर साइबर ठगी की रकम को एक से दूसरे बैंक खाते में स्थानांतरित करने या रूट करने के लिए किया जाता है। इन खातों के जरिए धोखाधड़ी की गई रकम को सुरक्षित दिखाने और उसके स्रोत को छुपाने की कोशिश की जाती है। जानकारी के अनुसार, ये म्यूल अकाउंट्स वर्ष 2022 से लेकर नवंबर 2025 के बीच मध्य प्रदेश के विभिन्न बैंकों में खोले गए थे। Cyber पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि ये म्यूल अकाउंट्स आम बैंक खातों की तरह ही दिखते हैं, लेकिन इनके माध्यम से होने वाले लेनदेन में लगातार असामान्यता पाई गई। इन खातों को खोलने में जिन नामों का इस्तेमाल किया गया, उनका वास्तविक सत्यापन अब तक नहीं हो सका है। यानी, खाताधारकों की पहचान करना और उनके स्थान का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
म्यूल अकाउंट्स को लेयर में बांटा गया
Cyber पुलिस ने इन खातों को उनकी भूमिका और लेनदेन की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग लेयर में बांटा है। इसका मकसद यह है कि पहले प्राथमिकता वाले खातों की जांच करके ठगी का पैसा जल्द से जल्द फ्रीज किया जा सके और आगे के साइबर फ्रॉड को रोका जा सके।

लेयर-1: प्राथमिक और उच्च जोखिम वाले खाते
लेयर-1 में वे बैंक खाते शामिल हैं, जिनमें Cyber फ्रॉड की रकम सीधे ट्रांसफर की जाती है। इन खातों में अपराधियों द्वारा ठगी की गई रकम सीधे जमा की जाती है और यह आगे के लेनदेन की शुरुआत होती है। मध्य प्रदेश Cyber पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि लेयर-1 में लगभग 50 हजार बैंक खाते शामिल हैं। इन खातों में पिछले छह महीनों में 40 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। Cyber पुलिस ने इस चरण में 3,000 खातों को चिन्हित किया है, जिन पर ब्लॉक करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, लेयर-1 के इन खातों की पहचान करना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन पर रोक लगाने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है।
लेयर-2: ट्रांसफर और रूटिंग वाले खाते
लेयर-2 में वे बैंक खाते आते हैं, जिनमें लेयर-1 खातों से ट्रांसफर की गई रकम जमा होती है। ये खाते धोखाधड़ी की राशि को आगे और पीछे घुमाने या रूट करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इस श्रेणी में करीब 30 हजार बैंक खाते शामिल हैं। इन खातों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ठगी की राशि किस दिशा में जा रही है और इसे कैसे रोकना संभव हो सकता है। Cyber पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि लेयर-2 में शामिल खातों के माध्यम से अपराधियों ने पैसे को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर कई अन्य खातों में भेजा, जिससे उनकी पहचान करना और लेनदेन को ट्रैक करना और भी कठिन हो गया।
साइबर ठगी के बढ़ते मामले और म्यूल अकाउंट्स का महत्व
मध्य प्रदेश में Cyber ठगी और फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी पहले म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन खातों के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करने पर वास्तविक ट्रेस निकालना मुश्किल होता है।
म्यूल अकाउंट्स को आमतौर पर नकली या असली पहचान के साथ खोला जाता है। इन खातों का इस्तेमाल निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाता है:
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रूटिंग ऑफ़ फ्रॉडेड मनी: ठगी की गई रकम को सीधे अपराधी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए बिना अन्य खातों के माध्यम से गुजारा जाता है।
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पहचान छिपाना: वास्तविक अपराधियों की पहचान को छुपाने के लिए म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जाता है।
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लेनदेन की सुरक्षा: बड़े पैमाने पर लेनदेन होने पर बैंक की नजर में यह सामान्य ट्रांजेक्शन के रूप में दिखाई देता है।
इन खतरनाक नेटवर्क के कारण पुलिस और बैंकिंग प्रणाली दोनों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि म्यूल अकाउंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए और समय पर उनका ब्लॉक किया जाए।
पुलिस की रणनीति और आगे की कार्रवाई
मध्य प्रदेश Cyber पुलिस ने म्यूल अकाउंट्स की जांच के लिए कई चरणों में रणनीति तैयार की है। इसमें सबसे पहले लेयर-1 खातों पर रोक लगाई जाएगी। इसके बाद लेयर-2 और अन्य खातों का विश्लेषण किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि म्यूल अकाउंट्स को अलग-अलग लेयर में बांटने से उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है। जिन खातों में सबसे अधिक रकम ट्रांसफर हुई है, उन्हें पहले ब्लॉक किया जाएगा। इसके अलावा, पुलिस ने डिजिटल ट्रैकिंग तकनीक और बैंकिंग डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर यह पता लगाने की कोशिश की है कि धोखाधड़ी का पैसा किन खातों में जा रहा है और इसके पीछे कौन-कौन अपराधी हैं।
Cyber अपराध और म्यूल अकाउंट्स का भविष्य
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर ठगी भी बढ़ रही है। म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से लाखों रुपये की ठगी करना अब आसान हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस के लिए यह चुनौती बड़ी है, क्योंकि इन खातों का वास्तविक सत्यापन करना और उनके मालिकों को पकड़ना मुश्किल है। बावजूद इसके, म्यूल अकाउंट्स की पहचान करना और उन्हें ब्लॉक करना साइबर अपराध को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Cyber पुलिस का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अपराधियों को संदेश मिलेगा कि उनके डिजिटल अपराध पर निगरानी रखी जा रही है और उन्हें बचने की गुंजाइश नहीं दी जाएगी।
