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MP High Court का ऐतिहासिक फैसला: प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती अवैध, सरकार को पैसा लौटाने का आदेश

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Published On: 8 January 2026
MP High Court Rules Salary Cut During Probation Illegal, Orders Government to Refund Employees
— MP High Court Rules Salary Cut During Probation Illegal, Orders Government to Refund Employees

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MP High Court का ऐतिहासिक फैसला: प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती अवैध, सरकार को कर्मचारियों का पैसा लौटाने के निर्देश

MP High Court ने सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकारी नौकरी के प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन में कटौती करना कानूनन गलत और असंवैधानिक है। इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसके आधार पर नए कर्मचारियों को कई वर्षों तक पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा था।

यह निर्णय हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से प्रोबेशन अवधि में कम वेतन दिए जाने का विरोध कर रहे थे।

2019 के सरकारी सर्कुलर पर लगी रोक

MP High Court ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी किए गए सर्कुलर को रद्द कर दिया है। इस सर्कुलर के तहत राज्य सरकार ने नई भर्तियों में यह व्यवस्था लागू की थी कि नियुक्ति के बाद पहले कुछ वर्षों तक कर्मचारी को पूरा वेतन नहीं दिया जाएगा।

कोर्ट ने माना कि यह व्यवस्था न केवल कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के भी खिलाफ है।

प्रोबेशन पीरियड में कैसे होती थी वेतन कटौती

2019 के सर्कुलर के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को चार वर्षों में विभाजित किया था। इस दौरान कर्मचारियों को निम्नानुसार वेतन दिया जाता था:

  • पहले वर्ष में केवल 70 प्रतिशत वेतन
  • दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत वेतन
  • तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन
  • चौथे वर्ष से पूरा वेतन

इस व्यवस्था के चलते नए कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था, जबकि वे पूरी जिम्मेदारी और समान कार्य कर रहे थे।

High Court की सख्त टिप्पणी

MP High Court ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्त होता है और नियमित कर्मचारी की तरह काम करता है, तो उसके वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन पीरियड का उद्देश्य कर्मचारी की कार्यक्षमता और आचरण का मूल्यांकन करना होता है, न कि उसे आर्थिक रूप से दंडित करना।

कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसी नीति के नाम पर कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित नहीं कर सकती।

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काटी गई सैलरी लौटाने के आदेश

High Court ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारियों के वेतन से जो भी राशि काटी गई है, उसे वापस किया जाए। यह आदेश न केवल भविष्य के लिए लागू होगा, बल्कि पूर्व में की गई कटौतियों पर भी प्रभावी रहेगा।

इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर करोड़ों रुपये का वित्तीय भार आ सकता है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्थिक कारणों से कर्मचारियों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।

सरकार करेगी प्रोबेशन नियमों में बदलाव

High Court के फैसले के बाद राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह प्रोबेशन पीरियड से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार:

  • प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी को 6 महीने के भीतर नियमित करना अनिवार्य होगा
  • यदि संबंधित विभाग समयसीमा के भीतर आदेश जारी नहीं करता है, तो कर्मचारी को डीम्ड रेगुलराइजेशन का लाभ मिलेगा
  • इससे कर्मचारियों को अनिश्चितता से राहत मिलेगी और प्रशासनिक देरी पर भी रोक लगेगी

सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की बैठक में पेश कर सकती है।

कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेशभर के कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। लंबे समय से कर्मचारी यूनियनें प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती को अन्यायपूर्ण बता रही थीं। कई संगठनों ने इसे शोषण की श्रेणी में रखा था।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि सरकारी सेवाओं में सम्मान और समानता की भावना को भी मजबूत करता है।

हजारों कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

इस फैसले से शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, वन, पंचायत, नगरीय प्रशासन सहित कई विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से वे कर्मचारी जो हाल के वर्षों में भर्ती हुए हैं, उन्हें अब पूरा वेतन और बकाया राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से सरकारी सेवाओं में युवाओं का भरोसा भी बढ़ेगा।

प्रशासनिक व्यवस्था पर असर

हाई कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नीतियां बनाते समय कर्मचारियों के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी होगी। प्रशासनिक स्तर पर यह निर्णय भविष्य की भर्तियों और सेवा शर्तों को अधिक पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष: कर्मचारियों के अधिकारों की जीत

MP High Court का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल वेतन कटौती की व्यवस्था को समाप्त करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि प्रोबेशन पीरियड का उपयोग कर्मचारियों के शोषण के लिए न किया जाए।

यह फैसला आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है और सरकारी सेवा प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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