Ujjain : नर्सिंग होम पंजीयन के नाम पर अवैध वसूली की चेतावनी, CMHO ने संचालकों को सतर्क रहने को कहा
Ujjain । जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अशोक पटेल ने नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालकों को एक बार फिर से सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। हाल ही में कुछ असामाजिक तत्व नर्सिंग होम पंजीयन और लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर अवैध वसूली की कोशिश कर रहे हैं। CMHO ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम पंजीयन और क्लीनिक लाइसेंस का नवीनीकरण पूरी तरह से शासकीय प्रक्रिया है और इसके लिए कोई भी बाहरी एजेंट या निजी व्यक्ति अधिकृत नहीं है।
डॉ. पटेल ने कहा कि कई बार फर्जी कॉल या अनधिकृत ईमेल/संदेश के माध्यम से संचालकों से संपर्क किया जा रहा है। ऐसे संदिग्ध व्यक्ति पंजीयन प्रक्रिया में बाधा डालने और पैसे की मांग करने की कोशिश कर रहे हैं। CMHO ने संचालकों से अपील की है कि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के झांसे में न आएं और किसी भी अवैध वसूली की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें। इससे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Ujjain नर्सिंग होम और क्लीनिक पंजीयन प्रक्रिया
मध्य प्रदेश उपचारगृह तथा रूजोपचार संबंधी संस्थाएं रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन अधिनियम 1973 के तहत राज्य में संचालित सभी निजी क्लिनिकों और नर्सिंग होम का पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य है। यह पंजीयन एलोपैथी, आयुष, फिजियोथैरेपी, डेन्टल और अन्य सभी मान्य चिकित्सा पद्धतियों पर लागू होता है।
डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि उज्जैन जिले में संचालित किसी भी प्राइवेट क्लिनिक या नर्सिंग होम से अगर कोई गैर-शासकीय व्यक्ति मोबाइल नंबर 9826867443 या 9669578560 से संपर्क करता है और विभाग के नाम पर अनाधिकृत रूप से पूछताछ, निरीक्षण या पैसे की मांग करता है, तो ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय एवं नजदीकी थाना में शिकायत की जा सकती है।
फर्जी कॉल और अवैध वसूली के तरीक़े
पंजीयन और लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर असामाजिक तत्व कई तरीके अपनाते हैं, जिनसे संचालकों को सतर्क रहना आवश्यक है। इनमें शामिल हैं:
- फर्जी कॉल: संचालकों को फोन पर विभाग का अधिकारी होने का दावा कर पैसे की मांग करना।
- अनधिकृत निरीक्षण: बिना शासकीय आदेश के क्लिनिक या नर्सिंग होम में आकर लाइसेंस संबंधी जांच का दबाव बनाना।
- ईमेल/मैसेज धोखाधड़ी: विभाग के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर पंजीयन शुल्क या जुर्माना मांगना।
- प्रलोभन: अगर पैसे नहीं दिए तो पंजीयन या लाइसेंस रद्द करने की धमकी देना।
CMHO डॉ. पटेल ने संचालकों से कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं और केवल शासकीय प्रक्रिया के माध्यम से ही पंजीयन करवाएं।
पंजीयन की वास्तविक प्रक्रिया
नर्सिंग होम और क्लीनिक का पंजीयन और लाइसेंस नवीनीकरण पूरी तरह शासकीय है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित कदम शामिल हैं:
- संबंधित फॉर्म भरना और आवश्यक दस्तावेज जमा करना।
- विभाग द्वारा ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन की समीक्षा।
- शासकीय निरीक्षण और लाइसेंस निर्गत करना।
- कोई भी शुल्क या पंजीयन राशि केवल आधिकारिक माध्यम से ही भुगतान किया जाता है।
किसी भी बाहरी एजेंट, दलाल या निजी व्यक्ति को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता।
CMHO का संदेश
डॉ. पटेल ने कहा कि अवैध वसूली न केवल कानूनी अपराध है बल्कि इसका गंभीर परिणाम हो सकता है। यदि किसी संचालक ने किसी फर्जी कॉल या अवैध वसूली का सामना किया, तो तुरंत शिकायत दर्ज करवाई जाए। CMHO कार्यालय इस मामले में कड़े कदम उठाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
डॉ. पटेल ने कहा कि नर्सिंग होम संचालक केवल शासकीय वेबसाइट और अधिकारियों से संपर्क करें। किसी भी तरह का दबाव या धमकी देने वाले व्यक्ति को नजरअंदाज करें। उन्होंने विशेष रूप से उज्जैन जिले के सभी निजी क्लिनिक संचालकों को सतर्क रहने और अपने कर्मचारियों एवं मरीजों को भी जागरूक करने का निर्देश दिया।
जागरूकता और सुरक्षा
- पंजीयन प्रक्रिया में किसी भी शुल्क का भुगतान केवल शासकीय माध्यम से करें।
- संदिग्ध कॉल, मैसेज या ईमेल की सूचना तुरंत CMHO कार्यालय को दें।
- अपने नर्सिंग होम या क्लिनिक में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश न दें।
- कर्मचारियों को भी फर्जी कॉल और अवैध वसूली के बारे में जागरूक करें।
निष्कर्ष
उज्जैन में नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालकों के लिए यह समय विशेष सतर्कता का है। CMHO डॉ. अशोक पटेल की चेतावनी के अनुसार, किसी भी अवैध वसूली या फर्जी कॉल के झांसे में न पड़ें और पंजीयन की प्रक्रिया शासकीय निर्देशों के अनुसार ही पूरी करें। इससे न केवल कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी से बचाव भी होगा।
उज्जैन स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि सभी नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालक सुरक्षित और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से अपने संस्थानों का पंजीयन करवाएं, ताकि मरीजों और संचालकों दोनों का हित सुनिश्चित हो सके।
