ट्रंप का बयान, Mallikarjun Kharge का मोदी पर हमला: क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका तय करेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के रूसी तेल आयात पर हालिया बयान के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। Kharge ने कहा कि ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति खुश हों। इस बयान के मद्देनजर Kharge ने नरेंद्र मोदी के व्यवहार और विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए।
ट्रंप के बयान पर Kharge का तीखा रुख
Kharge ने सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मुझे समझ नहीं आता कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुकते हैं। देश ने आपको इसलिए चुना कि आप अपने मत और देशहित के लिए खड़े हों, सिर हिलाने के लिए नहीं। Kharge ने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतंत्र में प्रधानमंत्री का मुख्य कर्तव्य देश के हितों की रक्षा करना होना चाहिए, न कि विदेशी नेताओं की खुशामद करना। उन्होंने आगे कहा, यह देश के लिए हानिकारक है। प्रधानमंत्री को अपने कर्तव्यों और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाना चाहिए। केवल इस बात के लिए किसी दूसरे देश के दबाव के आगे झुकना ठीक नहीं है। आपको देश के लिए खड़ा होना चाहिए। Kharge ने इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत पर लगाए गए आर्थिक और राजनीतिक दबावों के संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर कई बार टिप्पणी की, और यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी दबाव में भारत अपनी विदेश नीति बदल रहा है।

वेनेजुएला और दुनिया में विस्तारवाद पर चिंता
Kharge ने इस अवसर पर वेनेजुएला में बन रही हाल की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, वेनेजुएला में हाल की घटनाएं दुनिया के लिए अच्छी नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति विश्व को डराने और धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। जो भी विस्तारवाद करता है, वह लंबे समय तक टिकता नहीं। इतिहास में हिटलर और मुसोलिनी जैसे नेता गए, लेकिन उनकी गलत नीतियाँ लंबे समय तक नहीं चलीं। Kharge ने चेतावनी दी कि दुनिया में किसी भी देश या नेता के द्वारा विस्तारवादी नीति अपनाना और अन्य देशों को डराना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को इस संदर्भ में अपनी नीति स्पष्ट रखनी चाहिए और लोकतांत्रिक तरीकों से ही आगे बढ़ना चाहिए।
भारत-पाकिस्तान विवाद और ट्रंप का दावा
Kharge ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में ट्रंप के बार-बार किए गए दावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “ट्रंप लगातार दावा करते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह बात कम से कम 70 बार कही है। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया उनके सामने झुक जाएगी। लोकतंत्र में किसी देश का नेतृत्व केवल अपने हितों और कूटनीति के आधार पर निर्णय लेता है।” Kharge ने कहा कि ट्रंप की बार-बार की बयानबाजी केवल राजनीतिक लाभ और प्रचार का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारतीय विदेश नीति को किसी विदेशी नेता के बयान या दबाव के अनुसार तय नहीं किया जाना चाहिए।
रूसी तेल पर ऑडियो क्लिप का हवाला
Kharge ने रूसी तेल के मामले में एक ऑडियो क्लिप का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने सुना। खड़गे ने बताया कि इस ऑडियो में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें पता है कि मोदी उनका सम्मान करते हैं और उनकी बात सुनते हैं। खड़गे ने इस बात को लेकर कहा, इसका अर्थ स्पष्ट है। मोदी उनके नियंत्रण में हैं। यदि प्रधानमंत्री किसी विदेशी नेता के दबाव में अपनी नीतियां तय करेंगे, तो यह देश के हित के खिलाफ होगा। Kharge ने इसे लेकर कांग्रेस की स्पष्ट चिंता व्यक्त की और कहा कि देश की विदेश नीति पर किसी अन्य देश का नियंत्रण स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस के 3 प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने मोदी सरकार से तीन बड़े सवाल उठाए हैं:
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क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका द्वारा निर्धारित की जा रही है?
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क्या रूस से तेल आयात घटाने का फैसला केवल ट्रंप को खुश करने के लिए लिया गया?
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ट्रंप की धमकियों और दावों पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं?
इन सवालों के माध्यम से कांग्रेस ने मोदी सरकार पर सीधे हमला बोला और यह स्पष्ट किया कि उन्हें भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों पर चिंता है।
फिल्मी डायलॉग का इस्तेमाल
Kharge ने अपने बयान में फिल्मी डायलॉग का भी उपयोग किया। उन्होंने कहा, मुझे मिस्टर इंडिया फिल्म का डायलॉग याद आ रहा है – ‘मोगैम्बो खुश हुआ’। ट्रंप की टिप्पणियों को सुनकर यही डायलॉग मेरे दिमाग में आया। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के माध्यम से खड़गे ने न केवल विदेशी दबाव पर चिंता व्यक्त की, बल्कि एक हल्का-फुल्का फिल्मी अंदाज देकर अपने तंज को और प्रभावी बनाया।
अमेरिकी दबाव और भारत की स्थिति
Kharge ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगातार लगाए गए आर्थिक और राजनीतिक दबाव, जैसे कि भारत के रूस से तेल आयात पर टिप्पणी और भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी, स्पष्ट संकेत हैं कि भारत की नीतियों पर बाहरी हस्तक्षेप हो रहा है। खड़गे ने कहा, देश की स्वतंत्र नीति और लोकतंत्र को बनाए रखना जरूरी है। किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकना स्वीकार्य नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री को देश के हित के लिए निर्णय लेने चाहिए।
कांग्रेस की रणनीति
Kharge ने यह संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाएगी। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति पर कोई भी निर्णय लोकतांत्रिक और राष्ट्रीय हितों के अनुसार होना चाहिए, न कि किसी विदेशी नेता के दबाव के अनुसार। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद, मीडिया और जनता के बीच लगातार उठाएगी।
