MP Cabinet Meeting Today: E-Cabinet की शुरुआत, मंत्रियों और सचिवों को मिलेंगे टेबलेट
भोपाल। MP की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 6 जनवरी को मंत्रालय में होने वाली कैबिनेट बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। यह बैठक न केवल अहम नीतिगत प्रस्तावों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य सरकार के “E-Cabinet” सिस्टम की औपचारिक शुरुआत भी इसी बैठक से होने जा रही है।
शाम 4 बजे शुरू होने वाली इस कैबिनेट बैठक में जहां एक ओर कई बड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
E-Cabinet की शुरुआत, अब डिजिटल होगी कैबिनेट बैठक
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने के लिए E-Cabinet सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी मंत्रियों और विभागीय सचिवों को टेबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रियों और सचिवों को E-Cabinet एप्लीकेशन के संचालन से संबंधित प्रेजेंटेशन और प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकें। सरकार का लक्ष्य है कि अगली कैबिनेट बैठक से पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाए।
एजेंडा इस बार फिजिकल और डिजिटल, आगे सिर्फ डिजिटल
आज होने वाली कैबिनेट बैठक के लिए कार्यसूची (एजेंडा) मंत्रियों को फिजिकल और डिजिटल दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, यह केवल एक संक्रमणकालीन व्यवस्था है।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी कैबिनेट बैठकों में एजेंडा केवल डिजिटल फॉर्मेट में ही दिया जाएगा। इससे कागज की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
E-Cabinet एप्लीकेशन के माध्यम से मंत्री और अधिकारी कहीं से भी अपनी सुविधा के अनुसार कैबिनेट के प्रस्ताव, नोट्स और निर्णय देख सकेंगे। इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और फाइलों के लंबित रहने की समस्या भी कम होगी।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी कार्यक्षमता और पारदर्शिता
E-Cabinet सिस्टम लागू होने से न केवल प्रशासनिक खर्च कम होगा, बल्कि कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से एक्सेस किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम “डिजिटल इंडिया” और “ई-गवर्नेंस” की दिशा में मध्य प्रदेश को और आगे ले जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी सरकार टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासन को प्राथमिकता देगी।
टू-चाइल्ड पॉलिसी में रियायत पर हो सकता है बड़ा फैसला
इस कैबिनेट बैठक का सबसे अहम एजेंडा टू-चाइल्ड पॉलिसी में रियायत से जुड़ा प्रस्ताव माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मोहन सरकार उन सरकारी कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को राहत देने पर विचार कर रही है, जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हैं।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में यह नियम बनाया गया था कि जिन अभ्यर्थियों या सरकारी कर्मचारियों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माने जाएंगे या उन्हें पदोन्नति जैसी सुविधाओं से वंचित किया जाएगा।
अब मोहन सरकार इस नियम में बदलाव करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आज की कैबिनेट बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है और उस पर निर्णय लिया जा सकता है।
कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
यदि टू-चाइल्ड पॉलिसी में रियायत का प्रस्ताव पास होता है, तो इससे राज्य के हजारों कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिल सकता है। लंबे समय से इस नियम को लेकर असंतोष बना हुआ था और कर्मचारी संगठनों की ओर से भी इसमें बदलाव की मांग की जा रही थी।
सरकार का तर्क है कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक हालात को ध्यान में रखते हुए इस नीति की समीक्षा आवश्यक है। माना जा रहा है कि नई नीति में कुछ शर्तों के साथ छूट दी जा सकती है।
परिवीक्षा नियमों में भी बदलाव संभव
कैबिनेट बैठक में परिवीक्षा (Probation) नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी आ सकता है। सरकार सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों को अधिक व्यावहारिक और सरल बनाने पर विचार कर रही है।
यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो नई नियुक्तियों और सेवा अवधि से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कई अन्य अहम प्रस्तावों पर भी लग सकती है मुहर
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में विकास योजनाओं, बजट से जुड़े प्रस्तावों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में राज्य की योजनाओं को तेजी से लागू किया जाए और जनता को उनका सीधा लाभ मिले।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 6 जनवरी को होने वाली मोहन कैबिनेट की यह बैठक मध्य प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाली साबित हो सकती है। ई-कैबिनेट की शुरुआत, टू-चाइल्ड पॉलिसी में संभावित बदलाव और कर्मचारियों से जुड़े अहम फैसले इस बैठक को बेहद खास बना रहे हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कैबिनेट बैठक के बाद कौन-कौन से बड़े फैसले सामने आते हैं और उनका राज्य की राजनीति व प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा।

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