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IRAN में सत्ता विरोधी आंदोलन ने पकड़ा जोर 5 दिनों में 7 मौतें ट्रंप का बयान बना अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय

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Published On: 2 January 2026
IRAN
— ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज, 5 दिनों में 7 की मौत; ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन का संकेत दिया

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IRAN में सत्ता विरोधी आंदोलन ने पकड़ा जोर 5 दिनों में 7 मौतें ट्रंप का बयान बना अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय

IRAN में बीते पांच दिनों से जारी सत्ता विरोधी प्रदर्शनों ने देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को गंभीर बना दिया है। इन प्रदर्शनों में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के कई प्रमुख शहरों में फैल चुका है। बढ़ती हिंसा, आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के बीच यह मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में आ गया है।

इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है, जिसने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए ईरान के प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने की बात कही। उन्होंने लिखा कि यदि ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाती है और उन्हें बेरहमी से मारती है—जो कि उनके अनुसार ईरान की पुरानी आदत रही है—तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क है।

तेहरान से शुरू होकर पूरे देश में फैला आंदोलन

यह आंदोलन सबसे पहले तेहरान में विश्वविद्यालय परिसरों और व्यावसायिक इलाकों से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह कराज, हामेदान, केशम, मलार्ड, इस्फहान, करमानशाह, शिराज और यज्द जैसे शहरों तक फैल गया। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे, व्यापारियों ने दुकानों के शटर गिरा दिए और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया।

प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी मौलवियों के शासन को खत्म करने और देश में दोबारा राजशाही बहाल करने की मांग की जा रही है। कई जगहों पर सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते और उन्हें सत्ता सौंपने की मांग करते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य ईरान के मौजूदा सत्ता ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

IRAN ईरान प्रदर्शन
ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज, 5 दिनों में 7 की मौत

हिंसा, तोड़फोड़ और गिरफ्तारियां

जैसे-जैसे आंदोलन का दायरा बढ़ा, प्रदर्शन हिंसक होते चले गए। कई शहरों में सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ स्थानों पर पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें भी हुईं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों के घायल होने की खबर है, जबकि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठनों ने स्थिति पर चिंता जताई है और ईरानी सरकार से संयम बरतने की अपील की है।

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का बयान

देश में बिगड़ते हालात के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्थिति संभालने की कोशिश की है। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए इन प्रदर्शनों के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि बाहरी शक्तियां ईरान में अस्थिरता फैलाकर अपने राजनीतिक और रणनीतिक हित साधना चाहती हैं। राष्ट्रपति ने नागरिकों से एकजुट रहने और देश की संप्रभुता की रक्षा करने की अपील की।

पेजेशकियान ने यह भी कहा कि सरकार जनता की समस्याओं से अवगत है और आर्थिक हालात सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हिंसा और अराजकता किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

आर्थिक संकट बना आंदोलन की जड़

विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह ईरान की बदहाल अर्थव्यवस्था है। देश इस समय भीषण मुद्रास्फीति से जूझ रहा है। दिसंबर महीने में महंगाई दर बढ़कर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे आम लोगों की जिंदगी बेहद कठिन हो गई है। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और रोजमर्रा का सामान आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।

ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमतों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। 28 दिसंबर को रियाल के अवमूल्यन के खिलाफ तेहरान में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। शुरुआत में यह आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन सरकार की सख्ती और बढ़ते गुस्से के कारण यह धीरे-धीरे उग्र रूप लेता चला गया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ती चिंता

डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर एक बार फिर तनाव की आशंका जताई जा रही है। ईरान पहले ही अमेरिका पर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाता रहा है। ट्रंप का यह बयान ईरानी सरकार के लिए उकसावे वाला माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां ईरान में स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने हिंसा पर चिंता जताते हुए ईरान से मानवाधिकारों का सम्मान करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

आगे क्या?

IRAN फिलहाल एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक ओर जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली से त्रस्त है, तो दूसरी ओर राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। सुरक्षा बलों की सख्ती, विदेशी हस्तक्षेप के आरोप और अंतरराष्ट्रीय दबाव—ये सभी तत्व मिलकर स्थिति को और संवेदनशील बना रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी सरकार इस संकट से कैसे निपटती है—क्या वह सुधारों और संवाद का रास्ता अपनाती है या सख्ती के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश करती है। इतना तय है कि मौजूदा घटनाक्रम ने ईरान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति पर भी गहरा असर डाला है।

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