दिग्विजय सिंह की पदयात्रा VB-G-RAM-G योजना का विरोध, कांग्रेस की देशव्यापी आंदोलन की घोषणा
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया तूफान उठने वाला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गढ़ में पदयात्रा करने जा रहे हैं। इस कदम के पीछे मुख्य मुद्दा है मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G) करना, जिसे विपक्ष भारी आलोचना का विषय बना रहा है। कांग्रेस ने इस बदलाव को लेकर 5 जनवरी 2026 को ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ की घोषणा की है। यह आंदोलन पूरे देश में मनरेगा की अहमियत और गरीबों के अधिकार के संरक्षण के लिए आयोजित किया जाएगा।
केंद्र सरकार का नाम बदलना क्यों विवादित बना
केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर VB-G-RAM-G कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम योजनाओं को और अधिक विकसित और समग्र बनाने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि नाम बदलने से महात्मा गांधी की आत्मा और योजना की मूल भावना मिटाई जा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण भारत के लिए आत्मसम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। इस योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को रोजगार और सम्मान मिला है। मनरेगा के जरिए ग्रामीण भारत के लोगों ने गरीबी और बेरोजगारी से लड़ाई लड़ी। विपक्ष का आरोप है कि नाम बदलने के फैसले से जनता की नजर में यह योजना अपने उद्देश्य और पहचान को खो देगी। कांग्रेस का कहना है कि सरकार गरीबों के अधिकारों पर हमला कर रही है, क्योंकि नाम बदलने के साथ-साथ योजना की मूल पहचान को कमजोर किया जा रहा है।
मनरेगा बचाओ आंदोलन: कांग्रेस की देशव्यापी योजना
कांग्रेस ने 5 जनवरी को पूरे देश में मनरेगा बचाओ आंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन के तहत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता राज्य और जिले स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि VB-G-RAM-G नामक नई योजना गरीबों के अधिकारों और रोजगार की गारंटी को कमजोर कर सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मनरेगा की वजह से कोरोना काल में लाखों लोग भूख और बेरोजगारी से नहीं मर गए। इस योजना ने लोगों को गारंटी के साथ रोजगार और जीवन का सम्मान दिया। खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम गरीबों का हक छीनने जैसा है। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनता और गरीबों को जागरूक करना है। कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा जैसी योजनाओं का नाम बदलना ग्रामीण जनता के हित में नहीं है।

दिग्विजय सिंह की पदयात्रा का उद्देश्य
दिग्विजय सिंह ने सीहोर जिले में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की आत्मा की लड़ाई है। उनका कहना है कि यह पदयात्रा सीहोर जिले की किसी ग्राम पंचायत से शुरू होगी, ताकि ग्रामीण भारत की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंचे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह वही ग्रामीण भारत है, जिसके लिए मनरेगा योजना बनाई गई थी। इस योजना ने न केवल रोजगार प्रदान किया, बल्कि गरीबों और ग्रामीणों को आत्मसम्मान भी दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या महात्मा गांधी के नाम को मिटाकर योजनाओं के उद्देश्य को भी मिटाया जा रहा है।
राजनीति का रंग और मध्य प्रदेश का महत्व
मध्य प्रदेश में यह विवाद राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। शिवराज सिंह चौहान का यह गढ़ माना जाता है और यहां बीजेपी की मजबूत पकड़ है। दिग्विजय सिंह की पदयात्रा सीधे बीजेपी के गढ़ में जाकर राजनीतिक संदेश देने वाली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पदयात्रा केवल नाम बदलने के विरोध तक सीमित नहीं रहेगी। यह कांग्रेस की ग्रामीण और गरीब वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश भी है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि दिग्विजय सिंह की पदयात्रा से मध्य प्रदेश में अगले चुनावों की हवा का अनुमान लगाया जा सकता है। अगर कांग्रेस ग्रामीण समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो बीजेपी को सत्ता और जनाधार दोनों में चुनौती मिल सकती है।
कांग्रेस और बीजेपी की बहस
कांग्रेस
मनरेगा गरीबों और ग्रामीणों के अधिकार की गारंटी है , नाम बदलने से योजना की पहचान और उद्देश्य कमजोर होंगे , VB-G-RAM-G गरीबों के लिए पर्याप्त नहीं , महात्मा गांधी के नाम का सम्मान बनाए रखना जरूरी।
बीजेपी / केंद्र सरकार
योजना का नाम बदलकर इसे और विकसित और समग्र बनाने का प्रयास , उद्देश्य और लाभ पर कोई असर नहीं , योजनाओं का सुधार और डिजिटलाइजेशन जरूरी , इस बहस का केंद्र केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह भारत की ग्रामीण राजनीति, गरीबों के अधिकार और चुनावी रणनीति का मुद्दा भी बन गया है।
भविष्य की दिशा
दिग्विजय सिंह की पदयात्रा से राज्य में राजनीतिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। यह कदम ग्रामीण जनता के बीच कांग्रेस की साख को बढ़ाने के साथ-साथ बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति भी है। कांग्रेस की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन और आंदोलन यह दर्शाते हैं कि पार्टी ग्रामीण मुद्दों और रोजगार की सुरक्षा को मुख्य राजनीतिक हथियार बना रही है। वहीं बीजेपी का मानना है कि योजनाओं का नाम बदलना केवल तकनीकी और प्रशासनिक सुधार है, और इसका गरीबों या ग्रामीणों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विवाद राजनीतिक पटल पर लंबा चलेगा और अगले महीनों में इसके प्रभाव ग्रामीण इलाकों की राजनीति और आगामी चुनावों में दिखाई दे सकते हैं।
