इंदौर से बनेडियाजी पदयात्रा 2026 के तहत सैकड़ों श्रद्धालु नए वर्ष के स्वागत में पैदल रवाना हुए। 46 वर्षों की परंपरा ने आस्था को नया आयाम दिया।
- राजेश जैन दद्दू
- इंदौर
इंदौर से बनेडियाजी पदयात्रा 2026: आस्था से शुरू हुआ नए वर्ष का सफर
इंदौर से बनेडियाजी पदयात्रा 2026 के साथ वर्ष 2025 को भावभीनी विदाई और वर्ष 2026 का आध्यात्मिक स्वागत किया गया। यह केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तप, संयम और सामूहिक श्रद्धा का जीवंत उदाहरण है।
नए वर्ष के प्रथम क्षणों को तीन लोक के नाथ के दर्शन-पूजन-अर्चना से पावन बनाने की भावना लिए सैकड़ों श्रद्धालु आज प्रातः इंदौर से बनेडियाजी तीर्थ क्षेत्र की ओर पैदल रवाना हुए।
46 वर्षों से चली आ रही अटूट परंपरा
इस पदयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता है। पिछले 46 वर्षों से बिना रुके यह परंपरा निभाई जा रही है। हर वर्ष जैन समाज के श्रद्धालु नए वर्ष की शुरुआत सांसारिक उत्सवों से नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आराधना से करते हैं।
यह परंपरा बताती है कि समय बदला है, लेकिन आस्था की जड़ें आज भी उतनी ही मजबूत हैं।
नए वर्ष 2026 का स्वागत – भक्ति और साधना के साथ
जब पूरा देश 31 दिसंबर की रात जश्न में डूबा होता है, उसी समय यह पदयात्रा एक अलग संदेश देती है—
नया साल आत्मसंयम, सेवा और साधना से शुरू होना चाहिए।
पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उद्देश्य स्पष्ट है—
- मन, वचन और काया से शुद्धि
- अहंकार का त्याग
- प्रभु भक्ति में लीन होकर नए वर्ष का आगमन
पदयात्रियों का भव्य स्वागत और सम्मान
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि गांधीनगर क्षेत्र में बनेडिया ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया गया।
ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल गंगवाल, वीरेन्द्र बड़जात्या, ललित छाबड़ा, निखिल छाबड़ा सहित समाजजनों ने
- पदयात्रियों का सम्मान किया
- मंगलकामनाएं दीं
- पचरंगी झंडी दिखाकर पदयात्रा को रवाना किया
यह दृश्य श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बना।
बनेडियाजी तीर्थ: आस्था का केंद्र
बनेडियाजी तीर्थ जैन समाज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां दर्शन मात्र से मन को शांति और आत्मा को स्थिरता मिलती है।
इंदौर से बनेडियाजी पदयात्रा 2026 का लक्ष्य केवल तीर्थ पहुंचना नहीं, बल्कि रास्ते में आत्मावलोकन करना भी है।
हर वर्ग की सहभागिता
इस पदयात्रा में
- युवा
- वरिष्ठजन
- महिलाएं
- परिवार
सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह साबित करता है कि धार्मिक परंपराएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि नई पीढ़ी भी उन्हें आत्मसात कर रही है।
समाज को संदेश
इंदौर से बनेडियाजी पदयात्रा 2026 समाज को यह संदेश देती है कि—
आस्था आधुनिक जीवन के साथ चल सकती है
नया साल केवल उत्सव नहीं, आत्मिक सुधार का अवसर है
सामूहिक साधना समाज को जोड़ती है
