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3.5 Lakh Students Dropout : उमंग सिंघार ने सरकार से पूछा, ‘बच्चे पढ़ाई क्यों छोड़ रहे हैं?’

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Published On: 27 December 2025
3.5 lakh school student Dropout

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मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत गंभीर: 5 हजार स्कूल बंद होने की कगार पर, 3.5 Lakh Students Dropout

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। हाल के वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट और ड्रॉपआउट की बढ़ती दर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। हाल ही में प्रकाशित यूडाइस (UDISE) आंकड़ों के अनुसार इस सत्र में सरकारी स्कूलों में लगभग 3.5 Lakh कम छात्रों का नामांकन हुआ है। साथ ही, लगभग 5,000 स्कूल ऐसे हैं, जो बंद होने की कगार पर हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल रही है बल्कि प्रदेश के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालने वाली है।

कम छात्रों वाले स्कूलों और शिक्षक की कमी

प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है। कुछ स्कूलों में 10 या उससे कम छात्र हैं, वहीं कई स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। कुछ स्कूलों में तो एक भी शिक्षक नहीं है। प्रदेश में 1,200 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां नामांकन शून्य दर्ज किया गया है। इसके अलावा लगभग 4,000 स्कूलों में केवल एक शिक्षक कार्यरत है। शिक्षक और छात्रों की इस कमी के चलते शिक्षा का स्तर प्रभावित हो रहा है। सरकार ने कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय करने और छात्रों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में तैनात किया जाएगा।

3.5 Lakh Students Dropout की बढ़ती दर के कारण

बच्चों का स्कूल छोड़ना कई कारणों से जुड़ा है। स्कूलों की दूरी अधिक होना, पर्याप्त शिक्षक का न होना, और सुविधाओं का अभाव मुख्य कारण हैं। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में एक किलोमीटर की दूरी भी बच्चों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। गरीब परिवार रोज़ाना स्कूल आने-जाने का खर्च नहीं उठा सकते और बच्चों की सुरक्षा भी जोखिम में पड़ सकती है। इसी कारण कई बच्चे स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन बच्चों को शिक्षा तक पहुंचाने के लिए न केवल स्कूलों की संख्या बढ़ानी होगी बल्कि उनके वातावरण और संसाधनों में सुधार करना भी जरूरी है।

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कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

प्रदेश में शिक्षा की गिरती स्थिति को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत “बेहद चिंताजनक और शर्मनाक” हो चुकी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि शिक्षा को सबसे आखिरी प्राथमिकता क्यों दिया गया है और बच्चों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है। सिंघार ने चेतावनी दी कि स्कूलों की कमी, शिक्षकों की कमी और कमजोर शिक्षा व्यवस्था भविष्य में रोजगार और बच्चों के सपनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की स्कूल तक पहुंच सुनिश्चित करना तत्काल आवश्यक है।

सरकार की योजना और संभावित सुधार

सरकार ने कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय करने और इन स्कूलों के छात्रों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों की तैनाती और स्कूलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करना प्राथमिकता होगी। शिक्षा विभाग ने बताया कि स्कूलों की दूरी बढ़ने से बच्चों के ड्रॉपआउट को रोकने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे। इसके अलावा डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म का उपयोग करके बच्चों को पढ़ाई में शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।

भविष्य के लिए चुनौतियां और सुझाव

अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो राज्य में शिक्षा का स्तर और गिर सकता है और बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की संख्या सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके अलावा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में परिवहन की सुविधा और स्कूलों तक आसान पहुंच भी जरूरी है। सरकार को तत्काल नीति और रणनीति तैयार करनी होगी ताकि बच्चों का ड्रॉपआउट कम किया जा सके और शिक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। लगभग 5,000 स्कूल बंद होने की कगार पर हैं और लाखों बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं। यदि इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो न केवल शिक्षा बल्कि बच्चों के सपनों और प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी गंभीर असर पड़ेगा। शिक्षा को प्राथमिकता देने और बच्चों को स्कूल से बाहर जाने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग से शिक्षा को अधिक सुलभ, सुरक्षित और प्रभावी बनाना ही भविष्य की दिशा तय करेगा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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