रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक और 80,000 करोड़ रुपये की डिफेंस डील
भारत लगातार अपनी आर्म्ड फोर्सेज को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बैठक में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए बड़े स्वदेशी और विदेशी रक्षा प्रोजेक्ट्स पर निर्णय लिया जाता है।
हाल ही में चर्चा थी कि DAC की बैठक में करीब 80,000 करोड़ रुपये की डिफेंस डील पर मुहर लग सकती है। इसमें विभिन्न रक्षा उपकरण, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, DAC की बैठक शुक्रवार को हुई लेकिन सभी अधिकारी उपस्थित नहीं थे। इसी कारण बैठक का अजेंडा स्थगित कर दिया गया और अंतिम निर्णय अब 15 जनवरी को लिया जाएगा।
DAC की बैठक का महत्व
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया की शीर्ष संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। DAC के फैसले से न केवल सेनाओं की ताकत बढ़ती है, बल्कि देश की रक्षा उद्योग को भी गति मिलती है।
इस बार DAC की बैठक में विशेष रूप से स्वदेशी परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इसमें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को हवाई हमलों से बचाने के लिए एक स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम को मंजूरी देने की संभावना थी। यह सिस्टम पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को एयर स्ट्राइक से सुरक्षित बनाएगा।
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक

DAC की बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। बैठक में सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होती है। इस बार बैठक में अपेक्षित प्रस्तावों में शामिल थे:
- स्वदेशी और विदेशी मिसाइल सिस्टम की खरीद।
- सेना और नौसेना के लिए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम।
- अमेरिकी कंपनी से MQ-9B HALE ड्रोन की तीन साल की लीज।
DAC की बैठक में इन प्रस्तावों पर निर्णय होने से भारतीय सेनाओं की क्षमता में भारी इजाफा होगा।
80,000 करोड़ रुपये की डिफेंस डील
DAC की बैठक में लगभग 80,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर मुहर लगने की उम्मीद थी। यह डील देश के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- सेना की ताकत बढ़ाना – सीमाओं पर तैनात बलों को आधुनिक हथियार और डिफेंस सिस्टम मिलेंगे।
- नौसेना की सुरक्षा – युद्धपोतों को मिसाइल हमलों से बचाने के लिए स्वदेशी मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम।
- वायु सेना का आधुनिकीकरण – ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम से हवाई हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा – भारतीय रक्षा उद्योग में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट और शटडाउन बढ़ी
DAC की बैठक में अधिकांश प्रस्ताव इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (Emergency Procurement) के तहत आते हैं। इस बार लास्ट डेट बढ़ाकर 15 जनवरी कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि अब 15 जनवरी तक इन प्रोजेक्ट्स पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमाओं पर बलों को समय पर अत्याधुनिक हथियार और उपकरण उपलब्ध हो सकें।
सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए प्रस्ताव
DAC बैठक में विभिन्न बलों के लिए प्रस्तावित कुछ प्रमुख हथियार और सिस्टम निम्नलिखित हैं:
- सेना के लिए
- मोर्टार, तोप और अन्य ग्राउंड हथियार।
- सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा और सुरक्षा उपाय।
- नौसेना के लिए
- स्वदेशी मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम।
- युद्धपोतों और फ्रिगेट्स की सुरक्षा।
- वायु सेना के लिए
- ड्रोन और हाई-टेक एयर डिफेंस सिस्टम।
- MQ-9B HALE ड्रोन की तीन साल की लीज।
इन उपकरणों और प्रणालियों से भारतीय सेना की संचालन क्षमता, मुकाबला क्षमता और सीमा सुरक्षा मजबूत होगी।
स्वदेशी उत्पादन पर जोर
DAC की बैठक में स्वदेशी रक्षा उपकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। भारत के लिए यह दो बड़े लाभ देता है:
- विदेशी निर्भरता कम होती है।
- भारतीय रक्षा उद्योग में रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलता है।
स्वदेशी परियोजनाओं में इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम और मीडियम-रेंज मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। ये सिस्टम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
अमेरिकी MQ-9B HALE ड्रोन
बैठक में अमेरिका से MQ-9B HALE ड्रोन की तीन साल की लीज लेने का प्रस्ताव भी है। इन ड्रोन से भारतीय सेनाओं को निगरानी, गश्त और सुरक्षा मिशनों में मदद मिलेगी। ड्रोन उच्च उड़ान क्षमता और लंबी दूरी की निगरानी प्रदान करते हैं।
DAC बैठक का राजनीतिक और रणनीतिक महत्व
DAC की बैठक सिर्फ रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसका रणनीतिक महत्व भी है। यह भारत की सीमा सुरक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा नीतियों को मजबूत करता है।
- सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित हमले का प्रभाव कम होगा।
- भारतीय सेनाओं की क्षमता में तेजी से सुधार होगा।
- राष्ट्र की सुरक्षा में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
आने वाली बैठक और उम्मीदें
अब DAC की बैठक 15 जनवरी को होने वाली है। इस बैठक में:
- 80,000 करोड़ रुपये की बड़ी डिफेंस डील।
- स्वदेशी और विदेशी हथियारों पर अंतिम निर्णय।
- सेना, नौसेना और वायु सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतिक फैसले।
DAC की बैठक के बाद ही यह साफ होगा कि कौन-कौन से हथियार और उपकरण भारतीय सुरक्षा बलों को उपलब्ध होंगे।
निष्कर्ष
DAC की बैठक भारत की सुरक्षा और रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस बैठक में स्वदेशी और विदेशी हथियारों पर निर्णय से भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा।
- सेना, नौसेना और वायु सेना की ताकत में इजाफा होगा।
- सीमा सुरक्षा मजबूत होगी।
- 80,000 करोड़ रुपये के डिफेंस प्रोजेक्ट पर मुहर लगाने की संभावना।
यह बैठक न केवल रक्षा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम मानी जा रही है।

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