केंद्रीय मंत्री गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लियरेंस से अटके नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) के निर्माण को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। प्रदेश के 10 National Highway का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसकी मुख्य वजह भूमि अधिग्रहण में देरी और फॉरेस्ट क्लियरेंस न मिल पाना बताई जा रही है। इन सभी सड़कों को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है, लेकिन राज्य स्तर पर प्रक्रियाएं पूरी न होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप किया है। अपने पत्र में गडकरी ने इन अटके हुए प्रोजेक्ट्स पर चिंता जताते हुए 5 जनवरी 2026 को एक अहम बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। इस बैठक में लंबित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी।
पत्र में दी गई अटकी परियोजनाओं की जानकारी
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र में उन सभी 10 National Highway का विवरण शामिल है, जिनका निर्माण प्रशासनिक अड़चनों के कारण अब तक शुरू नहीं हो सका है। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जिन्हें काफी पहले मंजूरी मिल चुकी है और जिनके लिए बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया।
बताया जा रहा है कि इस सूची में कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल है। यह परियोजना पर्यावरणीय कारणों और फॉरेस्ट क्लियरेंस न मिलने के चलते लंबे समय से अटकी हुई है। हालात ऐसे रहे कि इस मार्ग का टेंडर भी निरस्त करना पड़ा।
भूमि अधिग्रहण और वन अनुमति बनी बड़ी बाधा
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश में कई National Highway परियोजनाएं केवल तकनीकी या वित्तीय कारणों से नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया और वन विभाग की अनुमति के चलते अटकी हुई हैं। कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां, मुआवजे से जुड़े विवाद और पर्यावरणीय नियमों के कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
केंद्र सरकार की ओर से बार-बार प्रयास किए जा रहे हैं कि राज्य सरकार इन अड़चनों को जल्द दूर करे, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिल सके।
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बैठक में उठेंगे नए प्रस्ताव भी
जानकारों का कहना है कि प्रस्तावित बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव न केवल पहले से स्वीकृत National Highway की प्रगति की समीक्षा करेंगे, बल्कि प्रदेश में प्रस्तावित नए नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट्स को लेकर भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से चर्चा कर सकते हैं।
इस बैठक को प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि बैठक के बाद भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लियरेंस और अन्य प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी।
अटके राष्ट्रीय राजमार्गों को मिल सकती है नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच प्रस्तावित बैठक सकारात्मक और निर्णायक साबित होती है, तो मध्य प्रदेश में लंबे समय से अटके पड़े राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिल सकती है। वर्षों से भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लियरेंस जैसी प्रशासनिक बाधाओं के कारण रुकी हुई परियोजनाएं दोबारा पटरी पर आ सकती हैं।
इन राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और आवागमन पहले से कहीं अधिक सुगम होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल शहरी क्षेत्रों, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों को भी सीधा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही, सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों में तेजी आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
आर्थिक दृष्टि से भी यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि बेहतर सड़क ढांचा निवेश और औद्योगिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। फिलहाल प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजरें 5 जनवरी 2026 को होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसी बैठक के बाद मध्य प्रदेश के नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट्स की दिशा और गति दोनों तय हो सकेंगी।

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