मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुत्र अभिमन्यु यादव और पत्नी डॉ. इशिता यादव की नर्मदा परिक्रमा की पूरी कहानी। जानें कैसे कर रहे हैं बिना ताम-झाम के यह पवित्र यात्रा, उनकी सादगी ने कैसे जीता लोगों का दिल। #नर्मदापरिक्रमा
सीएम पुत्र अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता की नर्मदा परिक्रमा: सादगी और आस्था का अद्भुत संगम
नर्मदा परिक्रमा भारत की सबसे पवित्र और दुर्गम तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है। हाल ही में, इसी पवित्र यात्रा पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुत्र अभिमन्यु यादव और उनकी पत्नी डॉ. इशिता यादव निकले हैं। खास बात यह है कि यह यात्रा किसी वीआईपी दिखावे या सुरक्षा के बड़े प्रबंध के बिना, एक सामान्य श्रद्धालु की तरह की जा रही है। उनकी यह नर्मदा परिक्रमा और उनकी सादगी की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है।
1. नर्मदा परिक्रमा: एक पवित्र अनुष्ठान
नर्मदा परिक्रमा का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्व है। मान्यता है कि नर्मदा नदी की पूरी परिक्रमा (लगभग 3,300 किमी) करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा केवल एक भौगोलिक सफर नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इसे ‘नमामि देवी नर्मदे’ के भाव से किया जाता है। अभिमन्यु और इशिता ने भी इसी भावना के साथ यह संकल्प लिया है।
2. ओंकारेश्वर से शुरुआत: यात्रा का पहला चरण
परंपरा के अनुसार, नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत अक्सर ओंकारेश्वर या अमरकंटक से होती है। अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव ने ओंकारेश्वर स्थित ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद ही अपनी यात्रा का शुभारंभ किया। ओंकारेश्वर, नर्मदा नदी के तट पर बसा एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहाँ से यात्रा शुरू करना शुभ माना जाता है।
3. बिना VVIP दिखावे के सफर: सादगी की मिसाल
इस यात्रा की सबसे चर्चित बात है इसकी सादगी। एक मुख्यमंत्री के पुत्र होने के बावजूद, अभिमन्यु यादव ने किसी तरह के वीआईपी प्रोटोकॉल या सुरक्षा घेरे का उपयोग नहीं किया। वे साधारण वाहनों में यात्रा कर रहे हैं और आम श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिरों में दर्शन करते देखे गए हैं। उन्होंने जानबूझकर इस यात्रा को प्रचार-प्रसार से दूर रखा है।
4. लोगों से मिले, आश्रमों में ठहरे: एक सामान्य श्रद्धालु की तरह
नर्मदा परिक्रमा के दौरान, दंपति रास्ते में आने वाले प्रमुख घाटों, मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर रुक रहे हैं। वे स्थानीय आश्रमों और धर्मशालाओं में ठहर रहे हैं और स्थानीय निवासियों से बातचीत भी कर रहे हैं। जब कुछ लोगों को उनकी पहचान का पता चला, तो वे उनके इस सहज और सरल व्यवहार से अत्यंत प्रभावित हुए।

5. सोशल मीडिया पर छाई सादगी की तस्वीरें
उनकी यात्रा की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं, जिनमें वे नर्मदा तट पर साधारण वस्त्रों में पूजा-अर्चना करते नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा है और सादगी के इस प्रदर्शन की व्यापक सराहना हो रही है।
6. यादव परिवार की सादगी: कोई पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने सादगी का उदाहरण पेश किया हो। इससे पहले, अभिमन्यु यादव के विवाह समारोह को भी बेहद सीमित और सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया था। परिवार के सदस्य अक्सर सामान्य जीवनशैली जीते हुए देखे जाते रहे हैं।
7. राजनीतिक गलियारों में चर्चा: एक सकारात्मक संदेश
राजनीतिक हलकों में अक्सर नेताओं और उनके परिवारों को विशेष सुविधाओं और दिखावे के साथ देखा जाता है। ऐसे में, अभिमन्यु यादव की यह नर्मदा परिक्रमा एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह है। इससे एक सकारात्मक संदेश जाता है कि आस्था और सादगी, हैसियत से ऊपर हो सकती है।
8. नर्मदा परिक्रमा का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व
नर्मदा परिक्रमा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। यह यात्रा व्यक्ति को प्रकृति के नज़दीक ले जाती है, आंतरिक शांति प्रदान करती है और समर्पण की भावना सिखाती है। इसके बारे में और जानने के लिए आप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वेबसाइट पर संबंधित सांस्कृतिक विरासत पृष्ठ देख सकते हैं।
9. कैसे करते हैं नर्मदा परिक्रमा? पूरी जानकारी
पूर्ण नर्मदा परिक्रमा में नदी के दोनों तटों का चक्कर लगाया जाता है, जिसमें 2-3 वर्ष तक का समय लग सकता है। श्रद्धालु प्रतिदिन पैदल चलते हैं, नदी के दर्शन करते हैं और रास्ते में मिलने वाले मंदिरों में पूजा करते हैं। कई लोग अब आंशिक परिक्रमा भी करते हैं। यह एक कठिन तपस्या है जिसके लिए अत्यंत धैर्य और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इससे जुड़ी कुछ यात्रा जानकारी उपलब्ध है।
10. निष्कर्ष: आधुनिक समय में परंपरा और सादगी की जीत
अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव की यह नर्मदा परिक्रमा आज के दौर में परंपरा, आस्था और सादगी के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने दिखाया है कि बिना किसी दिखावे के, एक सामान्य नागरिक की तरह भी पवित्र यात्राएं की जा सकती हैं। यह निश्चित रूप से युवा पीढ़ी और समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम है। उनकी यह यात्रा नर्मदा मैया की कृपा और आशीर्वाद से पूर्ण हो, यही शुभकामना है।
