गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा परियोजना नागदा के अंतर्गत ग्रेसिम जन सेवा ट्रस्ट, एड-एट-एक्शन और बुकवार्म ट्रस्ट की साझेदारी से पुस्तकालय प्रशिक्षण संपन्न। पठन संस्कृति और सामुदायिक शिक्षा को मिली नई दिशा।
1. भूमिका: शिक्षा में पुस्तकालयों का महत्व
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा परियोजना नागदा का मूल उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान तक सीमित न रहकर बच्चों में सोचने, समझने और पढ़ने की आदत विकसित करना है। पुस्तकालय आज केवल किताबों के भंडार नहीं, बल्कि सृजनात्मक और सहभागितापूर्ण सीखने के केंद्र बन चुके हैं।
2. ग्रेसिम की पहल और CSR दृष्टिकोण
Grasim Industries Limited की सामाजिक इकाई ग्रेसिम जन सेवा ट्रस्ट शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम मानती है। CSR के अंतर्गत ग्रेसिम आंगनवाड़ी, विद्यालयों और ड्रॉपआउट बच्चों तक पहुंच बनाकर समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है।
CSR मैनेजर अरविंद सिंह सिकरवार ने इस पहल को “भविष्य की पीढ़ी के लिए मजबूत नींव” बताया।
3. बुकवार्म ट्रस्ट: पुस्तकालय आधारित शिक्षा का मॉडल
Bookworm Trust देशभर में पुस्तकालयों को जीवंत, बाल-केंद्रित और समावेशी बनाने के लिए जाना जाता है। कहानी-कथन, रचनात्मक लेखन और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बुकवार्म ने शिक्षा को अनुभव आधारित बनाया है।
4. एड-एट-एक्शन की भूमिका
Add-at-Action (AEA) शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्यरत संस्था है। नागदा क्षेत्र में संचालित Ensuring Quality Education परियोजना के अंतर्गत AEA ने Library Mentoring and Support (LMS) कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया।
5. नागदा में LMS कार्यक्रम का क्रियान्वयन
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा परियोजना नागदा के अंतर्गत LMS कार्यक्रम का उद्देश्य था:
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बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करना
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बुनियादी साक्षरता को मजबूत करना
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सामुदायिक पुस्तकालयों को सक्रिय सीखने के केंद्र बनाना
AEA टीम की विद्या भारती एवं सोनिका बंजारा ने बुकवार्म द्वारा संचालित चयन व प्रशिक्षण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की।
6. प्रशिक्षण प्रक्रिया और सहभागिता
प्रशिक्षण में शामिल प्रमुख बिंदु:
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कहानी-कथन तकनीक
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सहभागितापूर्ण शिक्षण विधियाँ
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पुस्तकालय प्रबंधन कौशल
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बच्चों के साथ संवाद आधारित सीख
इससे शिक्षकों और शिक्षा दूतों को व्यावहारिक दृष्टिकोण मिला।
7. दो दिवसीय क्षेत्रीय भ्रमण के अनुभव
बुकवार्म टीम की अश्विनी एवं सुजाता ने नागदा का दो दिवसीय भ्रमण किया।
इस दौरान:
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विद्यालयों में पुस्तकालय गतिविधियों का मूल्यांकन
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शिक्षकों के साथ मार्गदर्शन सत्र
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समुदाय के साथ संवाद
आयोजित किए गए।
8. सामुदायिक भागीदारी और पठन संस्कृति
इस साझेदारी का सबसे बड़ा प्रभाव समुदाय की भागीदारी में देखा गया। अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों ने पुस्तकालय को साझा सीखने के स्थान के रूप में अपनाया।
9. शिक्षा में दीर्घकालिक प्रभाव
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा परियोजना नागदा के माध्यम से:
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बच्चों की भाषा दक्षता बढ़ी
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सीखने में आत्मविश्वास आया
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विद्यालयों में रचनात्मक माहौल बना
यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
10. निष्कर्ष
ग्रेसिम, एड-एट-एक्शन और बुकवार्म ट्रस्ट की यह साझेदारी नागदा क्षेत्र में पठन संस्कृति को सुदृढ़ करने की एक सशक्त मिसाल है। यह पहल साबित करती है कि जब कॉर्पोरेट, NGO और समुदाय साथ आते हैं, तो शिक्षा में वास्तविक बदलाव संभव है।
